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भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले की जांच तेज: रायपुर–महासमुंद में ED की कार्रवाई, नकद और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर–विशाखापत्तनम कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं पर शिकंजा, बैकडेट दस्तावेजों से मुआवजा बढ़ाने का संदेह
भारत सरकार की प्रमुख सड़क अवसंरचना योजना भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे रायपुर–विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर और महासमुंद जिले में एक साथ कई ठिकानों पर कार्रवाई कर नकद राशि, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। एजेंसी का मानना है कि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन हुआ है।
ईडी की यह कार्रवाई राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक और आर्थिक अपराध इकाइयों में पहले से दर्ज प्रकरणों के आधार पर की गई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि भूमि अधिग्रहण के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कर मुआवजा राशि को वास्तविक मूल्य से अधिक दिखाया गया। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई जा रही है।
बैकडेट रिकॉर्ड से बढ़ाया गया मुआवजा
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अधिग्रहण के दायरे में आने वाली जमीन को कागजों में कई हिस्सों में विभाजित दिखाया गया। यह प्रक्रिया वास्तविक समय पर नहीं, बल्कि पिछली तारीखों में दर्ज की गई। इससे ऐसा दर्शाया गया कि जमीन पहले से कई खातेदारों के नाम पर थी। इस तकनीकी बदलाव का लाभ उठाकर अलग-अलग नामों से मुआवजा स्वीकृत कराया गया, जिससे कुल भुगतान राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी की टीमों को तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकद, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल माध्यम मिले हैं। इसके अलावा भूमि सौदों, म्यूटेशन और भुगतान से जुड़े कागजात भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी इन डिजिटल साक्ष्यों की मदद से लेनदेन की कड़ियों और संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है।
कौन-कौन जांच के घेरे में
इस प्रकरण में राजस्व विभाग से जुड़े कुछ तत्कालीन अधिकारी, निजी कारोबारी और भूमि से जुड़े एजेंटों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का फोकस उन निर्णयों पर है, जिनके जरिए मुआवजा तय किया गया और भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
प्रवर्तन निदेशालय ने साफ किया है कि यह मामला शुरुआती जांच चरण में है और इलेक्ट्रॉनिक डाटा के विश्लेषण के बाद और तथ्य सामने आ सकते हैं। जरूरत पड़ने पर संपत्तियों को जब्त करने और अतिरिक्त कानूनी कदम उठाने की संभावना भी जताई गई है।
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