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सत्यकथा: परिवार द्वारा प्रेमी की हत्या से दुखी बेटी ने दे दी जान
सत्यकथा (शिवपुरी)
तीस मार्च की सुबह का वक्त था। ऐेसे में शिवपुरी जिले के कोलारस में बायपास के पास एक नाले के पास लोगों ने 22-25 साल के किसी नवयुवक का शव पड़ा देख पुलिस को खबर कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे टीआई गब्बर सिंह गुर्जर और एसडीओपी संजय मिश्रा शव के शरीर पर चोटों के निशान देखते ही समझ गए कि युवक की हत्या किसी और स्थान पर कर शव को यहां लाकर फेंका गया है।
पुलिस ने मौके पर शव की पहचान करने की कोशिश की लेकिन भीड़ में मौजूद कोई आदमी उसकी पहचान नहीं कर सका।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद युवक की पहचान अर्जुन पाल निवासी रेगमा थाना रन्नौद के रूप में हो गई। दरअसल हुआ यह कि कुछ ही देर के बाद रेगमा गांव से मृतक के पिता ने थाने आकर बताया कि रात में उनके बहनोई के बेटे कल्ला पाल ने उन्हें बताया कि मेरे बेटे को कोलारस में बायपास रोड़ पर रहने वाले दिनेश और उसके पिता लट्टू कुशवाहा ने अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पकड़ कर मारपीट की है। घटना के समय कल्ला भी मेरे बेटे के साथ था लेकिन वह किसी तरह से भागने में सफल हो गया। जिसके बाद रात में ही उसने मुझे यह जानकारी दी।
चूंकि जिस नाले में युवक की लाश मिली थी वह बायपास इलाके में था इसलिए पुलिस ने जब उसे वह लाश दिखाई तो उन्होंने उसकी पहचान अपने बेटे अर्जुन के रूप में कर दी। मामला साफ था क्योंकि अर्जुन के पिता के साथ कल्ला पाल भी थाने आया था जो घटना के वक्त रात में अर्जुन के साथ था। उसने यह भी बताया कि इस विवाद की पूरी जड़ दिनेश की बेहद खूबसूरत 20 वर्षीय बेटी साधना है जिसके साथ अर्जुन का प्रेम प्रसंग चल रहा था।
टीआई गब्बर सिंह का मानना था कि कल्ला से पूरी कहानी तो फिर सुन लेंगे लेकिन अगर देर हुई तो हो सकता है कि आरोपी फरार न हो जाएं। इसलिए उन्होंने तत्काल दबिश देकर दिनेश और उसके पिता लट्टू को गिरफ्तार कर लिया। उस रोज दिनेश की बेटी की गोद भरने के लिए वर पक्ष के लोग आने वाले थे इसलिए उनके कई रिश्तेदार भी कोलारस आए थे जो रात की घटना के बाद वहां से भाग गए थे।

पूछताछ में पहले तो बाप-बेटा दोनों खुद को निर्दोष बताते रहे लेकिन जल्द ही उन्होंने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उनका कहना था कि आज उनकी बेटी की सगाई थी घर में नाते रिश्तेदार जुड़ चुके थे। ऐसे में अर्जुन हमारी इज्जत से खेलने के लिए बेटी को भगा ले जाने आया था। हमने उसे घर के पास देखकर उसे वहां से चले जाने को कहा जिससे विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपियों के पास से वह रस्सी जिससे अर्जुन का बांधा गया था और लाठी आदि बरामद कर अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।
रेन्नौद थाने के रेगंवा गांव का रहने वाला 24 वर्षीय अर्जुन ट्रक ड्राइवर की नौकरी करता था। कोलारस में उसके फुफेरा भाई कल्ला पाल ने एक किसान की जमीन बंटाई पर ली थी। इसलिए कल्ला पाल कोलारस में ही रहता था। ऐसे में अर्जुन का जब कभी भी ट्रक लेकर कोलारस से निकलना होता वह कल्ला के पास जरूर रुकता था।
कोई छह-आठ माह पुरानी बात है। एक रोज अर्जुन कल्ला से मिलने उसके खेत पर पहुंचा तो वहां उसने एक बेहद ही सुंदर युवती को काम करते देखा।
यह राजकुमारी कौन है यार, उसे देखते ही उसने कल्ला से पूछा।
सच कह रहे हो, शक्ल सूरत में तो राजकुमारी ही है लेकिन बेचारी मजदूरी करती है।
क्या नाम है इसका?
साधना (बदला नाम) ।
मेरा तो दिल आ गया भाई इस पर काश यह मुझे मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी।
देख भाई इस मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता। लेकिन तू कोशिश कर ले अगर साधना मान गई तो तेरी किस्मत। कल्ला ने उसकी बात सुनकर अर्जुन से कहा।
ठीक है भाई देखते है भगवान ने मेरी किस्मत में इसे लिखा है या नहीं।
कहना नहीं होगा कि उस दिन के बाद अर्जुन अक्सर ही कल्ला के खेत पर आने लगा और पहले जहां वह घंटे दो घंटे रुकता था अब दिन-दो दिन रुकने लगा। इस दौरान उसकी नजरे जब तक साधना खेत पर रहती उस पर ही लगी रहती। काम देखने के बहाने वह कभी-कभी साधना से बात भी करने लगा।
साधना बीस साल की हो चुकी थी। फिर अपनी सुंदरता के कारण लोगों की नजरों को पहचानना तो उसे किशोर उम्र में ही आ गया था। इसलिए उसने यह समझने में देर नहीं लगी कि अर्जुन उससे क्या चाहता है। पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब उसे लगा कि अर्जुन सचमुच उससे प्यार करता है तो धीरे-धीरे वह भी उसकी ओर झुकने लगी। जिससे जल्द ही उनकी प्रेम कहानी शुरू हो गई।

अब जब भी अर्जुन कोलारस आता तो कल्ला किसी बहाने से खेत छोड़कर चला जाता जिससे अर्जुन और साधना खेत में बने कमरे में घंटो एक दूसरे की बाहों में सिमट कर जिंदगी भर साथ रहने के सपने देखते। अर्जुन ने साधना को एक मोबाइल भी लाकर दे दिया जिससे जब अर्जुन ट्रक पर होता तो दोनों फोन पर बातें कर अपने सपनों में रंग भरते रहते।
लेकिन कोई ढेड महीने पहले अचानक की एक रोज पिता दिनेश ने साधना के हाथ में मोबाइल देख लिया। यह देखकर साधना ने जल्द ही मोबाइल अपने कुर्ते के गले में छुपा लिया लेकिन तब तक दिनेश सब समझ चुके थे उन्होंने पत्नी को आवाज देकर साधना के कुर्ते से मोबाइल निकलवाने के बाद बेटी की खूब खबर ली और उसके घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।
यह जानकारी अर्जुन को लगी तो वह परेशान हो गया। इसी बीच बेटी हाथ से न निकल जाए इसलिए दिनेश ने उसकी सगाई भी पास के एक गांव में तय कर दी। 30 मार्च को लड़के वाले साधना की गोद भरने के लिए आने वाले थे। यह खबर साधना ने एक सहेली के मोबाइल से अर्जुन को दी और गांव आकर उसे साथ ले जाने को कहा।

इस पर अर्जुन, कल्ला को लेकर 29 मार्च की रात अपनी प्रेमिका के घर के बाहर कुछ दूरी पर जाकर खड़ा हो गया। योजना अनुसार साधना को घर से निकलकर अर्जुन से मिलना था। जहां से दोनों की योजना अगले दिन शिवपुरी में लव मैरिज करने की थी।
चूंकि अगले की दिन उसकी गोद भरी जानी थी इसलिए कई रिश्तेदार घर आ चुके थे। इसके बावजूद आधी रात में जब सब सो गए तो साधना चुपचाप दरवाजा खोलकर बाहर जाने लगी। लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उसका पिता आजकल उस पर नजर रखने के लिए एक आंख से सोता है। इसलिए जैसे ही साधना ने दरवाजा खोला दिनेश की नींद टूट गई और उसने साधना को पकड़ लिया।
यह देखकर साधना ने अपने पिता के हाथ जोड़कर कहा मुझे जाने दो मेरा अर्जुन बाहर मेरा इंतजार कर रहा है। यह सुनते की बेटी को घर में कैद कर दिनेश अपने पिता लट्टू और कुछ रिश्तेदारों को लेकर वहां पहुंचा जहां अर्जुन का कल्ला साधना का इंतजार कर रहे थे।

दिनेश और उसके साथियों ने दोनों पर हमला कर दिया जिससे कल्ला तो निकल भागने में सफल रहा लेकिन अर्जुन पकड़ा गया जिसे वे लोग घर ले आए और रस्सी से बांधकर रात भर उसकी पिटाई की जिससे अर्जुन की मौत हो गई तो शव को घर से कुछ दूरी पर नाले में फेंक दिया।
चूंकि कल्ला भागने में सफल हो गया था इसलिए अर्जुन का शव मिलने के साथ ही आरोपियों के नाम भी सामने आ जाने से पुलिस ने दिनेश और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दो दिन बाद बेटी ने भी दी जान
पकड़े जाने के बाद दिनेश का कहना था कि उन्हें अर्जुन की हत्या का कोई अफसोस नहीं है क्योंकि वह मेरी बेटी को भगाने आया था। लेकिन दिनेश को क्या पता था कि उसने बेटी को प्रेमी के साथ भागने से भले ही रोक लिया हो लेकिन वह उसे बांधकर नहीं रख सकेगा। प्रेमी की हत्या से दुखी साधना ने भी दो दिन बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
था प्रेमिका का इंतजार आई मौत
घटना की रात प्रेमिका के कहने पर अर्जुन उसे भगाने के लिए गांव गया था। लेकिन वहां उसका सामना मौत से हुआ। बेटी की योजना पता चल जाने पर उसके पिता और दादा ने कुछ लोगों के साथ मिलकर अर्जुन की हत्या कर दी।
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सत्यकथा (शिवपुरी)
तीस मार्च की सुबह का वक्त था। ऐेसे में शिवपुरी जिले के कोलारस में बायपास के पास एक नाले के पास लोगों ने 22-25 साल के किसी नवयुवक का शव पड़ा देख पुलिस को खबर कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे टीआई गब्बर सिंह गुर्जर और एसडीओपी संजय मिश्रा शव के शरीर पर चोटों के निशान देखते ही समझ गए कि युवक की हत्या किसी और स्थान पर कर शव को यहां लाकर फेंका गया है।
पुलिस ने मौके पर शव की पहचान करने की कोशिश की लेकिन भीड़ में मौजूद कोई आदमी उसकी पहचान नहीं कर सका।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद युवक की पहचान अर्जुन पाल निवासी रेगमा थाना रन्नौद के रूप में हो गई। दरअसल हुआ यह कि कुछ ही देर के बाद रेगमा गांव से मृतक के पिता ने थाने आकर बताया कि रात में उनके बहनोई के बेटे कल्ला पाल ने उन्हें बताया कि मेरे बेटे को कोलारस में बायपास रोड़ पर रहने वाले दिनेश और उसके पिता लट्टू कुशवाहा ने अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पकड़ कर मारपीट की है। घटना के समय कल्ला भी मेरे बेटे के साथ था लेकिन वह किसी तरह से भागने में सफल हो गया। जिसके बाद रात में ही उसने मुझे यह जानकारी दी।
चूंकि जिस नाले में युवक की लाश मिली थी वह बायपास इलाके में था इसलिए पुलिस ने जब उसे वह लाश दिखाई तो उन्होंने उसकी पहचान अपने बेटे अर्जुन के रूप में कर दी। मामला साफ था क्योंकि अर्जुन के पिता के साथ कल्ला पाल भी थाने आया था जो घटना के वक्त रात में अर्जुन के साथ था। उसने यह भी बताया कि इस विवाद की पूरी जड़ दिनेश की बेहद खूबसूरत 20 वर्षीय बेटी साधना है जिसके साथ अर्जुन का प्रेम प्रसंग चल रहा था।
टीआई गब्बर सिंह का मानना था कि कल्ला से पूरी कहानी तो फिर सुन लेंगे लेकिन अगर देर हुई तो हो सकता है कि आरोपी फरार न हो जाएं। इसलिए उन्होंने तत्काल दबिश देकर दिनेश और उसके पिता लट्टू को गिरफ्तार कर लिया। उस रोज दिनेश की बेटी की गोद भरने के लिए वर पक्ष के लोग आने वाले थे इसलिए उनके कई रिश्तेदार भी कोलारस आए थे जो रात की घटना के बाद वहां से भाग गए थे।

पूछताछ में पहले तो बाप-बेटा दोनों खुद को निर्दोष बताते रहे लेकिन जल्द ही उन्होंने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उनका कहना था कि आज उनकी बेटी की सगाई थी घर में नाते रिश्तेदार जुड़ चुके थे। ऐसे में अर्जुन हमारी इज्जत से खेलने के लिए बेटी को भगा ले जाने आया था। हमने उसे घर के पास देखकर उसे वहां से चले जाने को कहा जिससे विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपियों के पास से वह रस्सी जिससे अर्जुन का बांधा गया था और लाठी आदि बरामद कर अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।
रेन्नौद थाने के रेगंवा गांव का रहने वाला 24 वर्षीय अर्जुन ट्रक ड्राइवर की नौकरी करता था। कोलारस में उसके फुफेरा भाई कल्ला पाल ने एक किसान की जमीन बंटाई पर ली थी। इसलिए कल्ला पाल कोलारस में ही रहता था। ऐसे में अर्जुन का जब कभी भी ट्रक लेकर कोलारस से निकलना होता वह कल्ला के पास जरूर रुकता था।
कोई छह-आठ माह पुरानी बात है। एक रोज अर्जुन कल्ला से मिलने उसके खेत पर पहुंचा तो वहां उसने एक बेहद ही सुंदर युवती को काम करते देखा।
यह राजकुमारी कौन है यार, उसे देखते ही उसने कल्ला से पूछा।
सच कह रहे हो, शक्ल सूरत में तो राजकुमारी ही है लेकिन बेचारी मजदूरी करती है।
क्या नाम है इसका?
साधना (बदला नाम) ।
मेरा तो दिल आ गया भाई इस पर काश यह मुझे मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी।
देख भाई इस मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता। लेकिन तू कोशिश कर ले अगर साधना मान गई तो तेरी किस्मत। कल्ला ने उसकी बात सुनकर अर्जुन से कहा।
ठीक है भाई देखते है भगवान ने मेरी किस्मत में इसे लिखा है या नहीं।
कहना नहीं होगा कि उस दिन के बाद अर्जुन अक्सर ही कल्ला के खेत पर आने लगा और पहले जहां वह घंटे दो घंटे रुकता था अब दिन-दो दिन रुकने लगा। इस दौरान उसकी नजरे जब तक साधना खेत पर रहती उस पर ही लगी रहती। काम देखने के बहाने वह कभी-कभी साधना से बात भी करने लगा।
साधना बीस साल की हो चुकी थी। फिर अपनी सुंदरता के कारण लोगों की नजरों को पहचानना तो उसे किशोर उम्र में ही आ गया था। इसलिए उसने यह समझने में देर नहीं लगी कि अर्जुन उससे क्या चाहता है। पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब उसे लगा कि अर्जुन सचमुच उससे प्यार करता है तो धीरे-धीरे वह भी उसकी ओर झुकने लगी। जिससे जल्द ही उनकी प्रेम कहानी शुरू हो गई।

अब जब भी अर्जुन कोलारस आता तो कल्ला किसी बहाने से खेत छोड़कर चला जाता जिससे अर्जुन और साधना खेत में बने कमरे में घंटो एक दूसरे की बाहों में सिमट कर जिंदगी भर साथ रहने के सपने देखते। अर्जुन ने साधना को एक मोबाइल भी लाकर दे दिया जिससे जब अर्जुन ट्रक पर होता तो दोनों फोन पर बातें कर अपने सपनों में रंग भरते रहते।
लेकिन कोई ढेड महीने पहले अचानक की एक रोज पिता दिनेश ने साधना के हाथ में मोबाइल देख लिया। यह देखकर साधना ने जल्द ही मोबाइल अपने कुर्ते के गले में छुपा लिया लेकिन तब तक दिनेश सब समझ चुके थे उन्होंने पत्नी को आवाज देकर साधना के कुर्ते से मोबाइल निकलवाने के बाद बेटी की खूब खबर ली और उसके घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।
यह जानकारी अर्जुन को लगी तो वह परेशान हो गया। इसी बीच बेटी हाथ से न निकल जाए इसलिए दिनेश ने उसकी सगाई भी पास के एक गांव में तय कर दी। 30 मार्च को लड़के वाले साधना की गोद भरने के लिए आने वाले थे। यह खबर साधना ने एक सहेली के मोबाइल से अर्जुन को दी और गांव आकर उसे साथ ले जाने को कहा।

इस पर अर्जुन, कल्ला को लेकर 29 मार्च की रात अपनी प्रेमिका के घर के बाहर कुछ दूरी पर जाकर खड़ा हो गया। योजना अनुसार साधना को घर से निकलकर अर्जुन से मिलना था। जहां से दोनों की योजना अगले दिन शिवपुरी में लव मैरिज करने की थी।
चूंकि अगले की दिन उसकी गोद भरी जानी थी इसलिए कई रिश्तेदार घर आ चुके थे। इसके बावजूद आधी रात में जब सब सो गए तो साधना चुपचाप दरवाजा खोलकर बाहर जाने लगी। लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उसका पिता आजकल उस पर नजर रखने के लिए एक आंख से सोता है। इसलिए जैसे ही साधना ने दरवाजा खोला दिनेश की नींद टूट गई और उसने साधना को पकड़ लिया।
यह देखकर साधना ने अपने पिता के हाथ जोड़कर कहा मुझे जाने दो मेरा अर्जुन बाहर मेरा इंतजार कर रहा है। यह सुनते की बेटी को घर में कैद कर दिनेश अपने पिता लट्टू और कुछ रिश्तेदारों को लेकर वहां पहुंचा जहां अर्जुन का कल्ला साधना का इंतजार कर रहे थे।

दिनेश और उसके साथियों ने दोनों पर हमला कर दिया जिससे कल्ला तो निकल भागने में सफल रहा लेकिन अर्जुन पकड़ा गया जिसे वे लोग घर ले आए और रस्सी से बांधकर रात भर उसकी पिटाई की जिससे अर्जुन की मौत हो गई तो शव को घर से कुछ दूरी पर नाले में फेंक दिया।
चूंकि कल्ला भागने में सफल हो गया था इसलिए अर्जुन का शव मिलने के साथ ही आरोपियों के नाम भी सामने आ जाने से पुलिस ने दिनेश और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

दो दिन बाद बेटी ने भी दी जान
पकड़े जाने के बाद दिनेश का कहना था कि उन्हें अर्जुन की हत्या का कोई अफसोस नहीं है क्योंकि वह मेरी बेटी को भगाने आया था। लेकिन दिनेश को क्या पता था कि उसने बेटी को प्रेमी के साथ भागने से भले ही रोक लिया हो लेकिन वह उसे बांधकर नहीं रख सकेगा। प्रेमी की हत्या से दुखी साधना ने भी दो दिन बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
था प्रेमिका का इंतजार आई मौत
घटना की रात प्रेमिका के कहने पर अर्जुन उसे भगाने के लिए गांव गया था। लेकिन वहां उसका सामना मौत से हुआ। बेटी की योजना पता चल जाने पर उसके पिता और दादा ने कुछ लोगों के साथ मिलकर अर्जुन की हत्या कर दी।
