सत्यकथा: जीजा की होकर रहने की खातिर साली ने करवाई पति की हत्या

सत्यकथा

By Rohit.P
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रानी रूपमति और बाजबहादुर की अमर प्रेम कथा के लिए प्रसिद्ध धार जिले के एक गांव में अप्रैल महीने में 6 और 7 तारीख की दर्मियानी रात को जो कुछ हुआ , उसे अगर कुछ और न भी कहा जाए तो यह तो कहा ही जा सकता है कि इस एक घटना ने जिले में प्रेम के इतिहास पर अपनी काली परछाई अवश्य छोड़ी है।

धार जिले में सरदार पुरा तहसील का गोंदीखेड़ी चारण गांव। छोटा सा शांत गांव जहां की सीमित आबादी में हर कोई एक दूसरे को जानता-पहचानता ही नहीं बल्कि एक दूसरे के सुख-दुख में शरीक भी है। इसी गांव में रहने वाला 29 वर्षीय देवकृष्ण पुरोहित भी गांव के हर एक घर में पहचाने जाने वाला नाम है।

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देवकृष्ण के पिता एक समय गांव में किराने की दुकान किया करते थे। 1995 में असमय ही जब उनकी मृत्यु हुई तब देवकृष्ण केवल दो साल का और उससे भी छोटी बहन थी ज्योति। मां लक्ष्मी ने गांव में ही रहने वाले ताऊ की मदद से दोनों बच्चों की परवरिश की। समय के साथ देवकृष्ण बड़ा हुआ तो उसने मसाले का करोबार करना शुरू कर दिया। मेहनती और ईमानदार था इससे जल्द ही उसके कारोबार ने गति पकड़ ली।

यह देखकर मां के मन में बहू लाने का विचार आने पर उन्होंने रिश्तेदारों ने चर्चा की जिसके चलते 1 अप्रैल 2015 को जब देवकृष्ण केवल 19 साल का था उसकी शादी महाराष्ट्र के पन्नाखेड़ी में रहने वाले परिवार के पुराने परिचित की बेटी रानी से कर दी गई। विवाह के समय रानी केवल 15 साल की थी इसलिए उसे शादी के पांच साल बाद 2020 में हुए गौना के बाद ही पति पास भेजा गया था।

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इसलिए घटना की रात इस घर में चार लोग मौजूद थे। 4-5 रोज पहले मायके से वापस आई बहू रानी, देवकृष्ण और मां लक्ष्मी तथा बहन ज्योति।

आधी रात बीत चुकी थी। पूरा गांव गहरी नींद में था कि इसी बीच देवकृष्ण के घर से आ रही चीख-पुकार की आवाज से जागे लोग चंद पल में उसके घर पर जमा हो गए। जहां का नजारा काफी डरावना था। अपने कमरे में देवकृष्ण का रक्त रंजित शव उसके पलंग पर पड़ा था और मां, बहन तथा रानी पलंग को घेर का बैठी दहाड़ मारकर रो रहीं थी।

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मामला गांव वालों की समझ से परे था। लेकिन इतना तो देखने से जाहिर था कि देवकृष्ण की हत्या की गई है। इसलिए गांव वालों ने राजोद थाने को घटना की जानकारी दे दी जिससे कुछ ही समय में टीआई राजोद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। मौके पर देवकृष्ण की मां ने उन्हें बताया कि वो बेटी के साथ एक कमरे में सो रही थी जबकि बहू और बेटा दूसरे दो कमरों में अलग-अलग सो रहे थे। उन्होंने बताया कि पड़ोस की एक महिला ने उन्हें फोनकर बेटे के कमरे में जाकर देखने का कहा तो वह बेटी के साथ यहां आई तब यह सब देखने को मिला। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय दूसरे कमरे में बहू के हाथ पैर बंधे थे।

यानी वास्तव में हुआ क्या है यह बात रानी बता सकती थी। सो पूछे जाने पर उसने बताया कि आधी रात चार डकैत घर में घुस आए थे। उन्होंने मुझे कमरे में बांध दिया और लूट पाट करने लगे। पति ने उनका विरोध किया तो उन्होंने उनकी हत्या कर दी। यह कहकर रानी दहाड़ मार कर रोने लगी। लगभग तीन लाख कीमत के जेवर और 50 हजार की नकदी लूटे जाने की बात भी परिवार ने पुलिस को बताई।

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डकैती और हत्या जैसी गंभीर वारदात की खबर पाकर एसडीओपी सरदारपुर सुश्री बेलापुरकर और एसपी धार भी मौके पर पहुंच गए।

घटना स्थल की जांच के दौरान रानी की बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी। क्योंकि अगर हत्या देवकृष्ण के विरोध करने के चलते हुई है तो उसकी लाश बिस्तर के बजाए फर्श पर कहीं मिलना चाहिए थी। इसके अलावा मृतक के सिर पर धारदार हथियार से जो बार किया गया था वह देखकर ही साफ था कि बार हत्या के मकसद से किया गया है और हत्या के समय मृतक बिस्तर र सो रहा होगा।

मामला संदिग्ध था इसलिए शव को पीएम के लिए भेजने के बाद पुलिस ने घर की बारीकी से जांच की तो काफी कुछ काला-सफेद सामने आने लगा। परिवार जिन जेवर और नगदी की लूट की बात बता रहा था वह घर में छुपाकर रखे मिल गए। इसके अलावा सबसे चौंकाने वाली चीज रानी के कमरे में उसके बिस्तर के नीचे मिली, एक यूज किया हुआ...।

लेकिन रानी तो उस रात पति से अलग दूसरे कमरे में सो रही थी। यह मान भी लिया जाए कि सोने से पहले पति-पत्नी नजदीक आए होंगे तब भी कंडोम देवकृष्ण के कमरे में मिलना चाहिए था न कि रानी के। क्योंकि रानी का कमरा उस कमरे से लगा हुआ था जिसमें उसकी सास और ननद सो रही थी। फिर उस रात पति से मिलने जैसी कोई बात रानी ने पुलिस को नहीं बताई थी। इसलिए रानी शक के घेरे में आ गई।

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इसी बीच पुलिस ने गांव वालों के बीच चल रही कानापूसी पर कान लगाया तो काफी चौंकाने वाली बातें जानकारी में आ गई। जिसमें सबसे बड़ी बात तो यही थी कि शादी के बाद से ही रानी की न तो अपने पति से बनती थी और न सास ननद से। इतना ही नहीं 2020 में गौना होने के बाद से रानी व मुश्किल महीने भर ही ससुराल में रही थी। वह केवल चार-पांच रोज ससुराल में रहकर महीनों के लिए कभी मायके तो कभी बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर चली जाती थी। इतना ही नहीं ससुराल में रहने की उसकी अपनी शर्तें भी थी, मसलन कोई उसका मोबाइल नहीं छुएगा, उससे घर के किसी काम को करने के लिए नहीं कहा जाएगा।

सास और ननद से बताया कि वह दिन भर फोन पर बातें करती रहती थी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी न उसके साथ कमरे में सोती थी। रानी ने परिवार में ऐसा दबदबा बना रखा था कि उसके सामने बेटा अपनी मां और बहन से बात भी नहीं कर पाता था।

लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ननद ने पुलिस को बताई उसने बताया कि भाभी के अपने गांव में रहने वाले उनके रिश्ते के जीजा कमल पुरोहित के साथ भाभी के गंदे संबंध है।  रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनकी गंदी चैट और फोटो पकड़ी भी जा चुकी हैं। जिसके बाद वह लड़-झगड़ कर मायके चली गई थी और लगभग दो साल तक नहीं आई थी। फिर आई तो अपनी शर्तों पर।

घटना 7 अप्रैल को घटी उससे पहले भी वह 1 अप्रैल को ही ससुराल आई थी और जब से आई है भाई के कमरे में एक रात भी नहीं सोई। 

अगर पति से इस हद तक विवाद था तो फिर रानी के कमरे में बिस्तर के नीचे छुपाकर रखा गया ...। कई सवाल उठ खड़े हुए थे। इसलिए कमल से संंबंधो के चलते रानी ही शक के दायरे में आ गई। कमल पुरोहित रानी के गांव का ही रहने वाला था और रिश्ते में उसका जीजा लगता था।

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देवकृष्ण के अंतिम संस्कार के बाद उसी रात को एसडीओपी सुश्री बेलापुरकर ने रानी को पूछताछ के लिए राजोद थाने बुला भेजा। जहां पहले तो रानी रात वाली वही लूट की कहानी दोहराती रही लेकिन जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ कर बार-बार मायके जाने के बारे में पूछते हुए कमल पुरोहित के नाम की तरफ इशारा किया तो 24 साल की रानी डर गई। उसने जल्द ही अपना अपराध स्वीकार करते हुए बता दिया कि उसने ही अपने पति को मरवाया है ताकि वह अपने आशिक के साथ बाकी की जिंदगी बिता सके। इस काम के लिए कमल ने सुरेन्द्र पाल सिंह नाम के एक बदमाश को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी जिसमें से 50 हजार रूपए एडवांस के तौर पर दिए जा चुके थे।

रानी द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लेने के बाद पुलिस ने छापामारी कर कमल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जबकि सुपारी किलर सुरेन्द्र फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस ने दोनों आरोपी प्रेमी जीजा-साली को अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद यह कहानी इस प्रकार सामने आई।

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पिता की असमय मृत्यु के बाद मां की आंचल की छांव में पलकर बड़े हुए देवकृष्ण ने मसालों का कारोबार शुरू किया था। चूंकि उसका व्यवहार अच्छा था इससे जल्द ही उसका कारोबार स्थापित हो गया। हर मां की तरह देवकृष्ण की मां लक्ष्मी देवी के मन में भी बेटे के लिए चांद जैसी बहू लाने की हसरत थी।

महाराष्ट्र में पन्नाखेड़ी में रहने वाला रानी के परिवार का देवकृष्ण के परिवार से पुराना परिचय था। इसलिए जब बात रानी के पिता को पता चली तो उन्होंने लक्ष्मी देवी के सामने रानी का विवाह देवकृष्ण से करने की इच्छा जाहिर की। रानी सुंदर ही नहीं अति सुंदर थी फिर परिवार भी जाना पहचाना था इसलिए दोनों की कुंडली का मिलान हो जाने पर लक्ष्मी देवी इस रिश्ते के लिए राजी हो गई। जिससे 1 अप्रैल 2015 में देवकृष्ण और रानी की शादी कर दी गई।

चूंकि विवाह के समय रानी की उम्र केवल 15 साल थी इसलिए इस कच्ची उम्र में उसे पति के पास भेजना दोनों परिवार को उचित नहीं लगा इसलिए आपसी सहमति से एक दो साल बाद गौना करने के बाद रानी को ससुराल भेजने की बात तय हो जाने पर शादी के बाद दूल्हा देवकृष्ण अकेला ही वापस घर आकर काम-धंधे में लग गया।

वास्तव में मायके वालों की तरह लक्ष्मी देवी का भी सोचना था कि 15 साल की मासूम सी रानी अभी पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में क्या ही कुछ जाने। लेकिन वे भूल गए थे कि आज के समय में बच्चे 10-12 साल की उम्र में ही वह सब कुछ जानने समझने लगते हैं जो पुरानी पीढ़ी 20-22 की उम्र में जाकर जान पाती थी।

गांव की कुछ भाभियों और विवाहित सहेलियों के द्वारा रानी भी सब कुछ जानने लगी थी कि शादी का मतलब क्या होता है। पति के प्यार को लेकर वह रोमांचित भी थी इसलिए शादी के बाद जब उसे एक-दो साल बाद गौना करने के नाम पर पति के साथ विदा नहीं किया गया तो रानी उदास हो गई। लेकिन अपने दर्द को वह किससे कहती इसलिए बेसब्री से वह उस दिन का इंतजार करने लगी जब उसका गौना हो और पति का प्यार मिले।

दो बहने अगर शादीशुदा हो तो उनके बीच बातचीत की मर्यादा काफी कुछ मिट जाती है। कमल पुरोहित के साथ रानी के बड़े पिता की बेटी की शादी हुई थी। इसलिए एक बार जब दोनों बहनें मिली तो रानी ने बातों-बातों में अपनी बहन को बताया कि माता-पिता तो उसकी शादी करके बैठ गए है अब जाने कब गौना होगा?

क्यों सुहागरात की जल्दी है क्या, रानी की बात पर उसकी बहन से कहा तो रानी शर्मा कर रह गई। लेकिन उसी रोज रानी की वह बहन जब अपने पति कमल के साथ थी तो उसने बातों-बातों में कमल को बता दिया कि रानी बेचारी परेशान है कि कब उसका गौना हो और पति का संग मिले।

कमल घाघ था इसलिए पत्नी की बात सुनकर भी उसने अनसुनी कर दी। लेकिन वह समझ गया कि शादी होने के बाद भी सुहागरात के लिए तरस रही साली को हाथ में लेने के लिए यह मौका अच्छा है। इसलिए अगले की दिन से उसने रानी के घर आना-जाना शुरू कर दिया। वैसे भी रिश्तेदारी के कारण उसका रानी के घर में आना-जाना पहले से था ही। इस दौरान उसे जब भी मौका मिलता रानी के साथ हंसी मजाक करने लगता। कुछ दिनों तक रानी का मन तौलने के बाद उसने बातों-बातों में रानी से कुछ गहरी मजाक करना शुरू कर दिया। इस पर भी रानी ने बुरा नहीं माना तो एक दिन मौका पाकर उसने रानी से कहा कि मैने आज तक देवकृष्ण जैसा आदमी नहीं देखा जो तुम्हारी जैसी सुंदर पत्नी होने के बाद भी रातों में अकेला सो रहा है। सच मानो अगर तुम्हारी शादी मेरे साथ हुई होती तो मैं तो एक रोज भी तुम्हारे बिना न सो पता।

कमल की बात सुनकर रानी शर्मा गई तो वह बोला अरे मुझसे क्या शर्माना। मेरी बात झूठ लगे तो अपनी बहन से पूछ लेना मैं तो आज भी हर रात उसे प्यार किए बिना नहीं सोता। प्यार का मतलब समझ रहीं हो न।

रानी चुप रही तो कमल ने कहा अरे यार पति-पत्नी वाला प्यार। अच्छा एक बात बताओ तुम्हें शादी के बाद अकेले नींद आ जाती है।

रानी ने नजरे झुकाए हुए हां में सिर हिलाया तो कमल बोला हो सकता है क्योंकि अभी तुमने उस प्यार का नशा किया नहीं न, किसी दिन कर लोगी तो फिर अकेले नींद नहीं आएगी।

इसी तरह मौका मिलने पर कमल रानी के मन में आग लगाता रहा और जब देखा कि अब रानी उसका विरोध नहीं करेगी तो एक रोज मौका मिलने पर उसने रानी के मना करते-करते भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना डाला। रानी को दुख तो हुआ और बुरा भी लगा लेकिन शारीरिक सुख के अनुभव ने उसे सब कुछ भुला दिया।

उस रोज के बाद कमल और रानी अक्सर अकेले में मिलने के मौके निकालने लगे। कमल जो चाहता था वो हासिल कर चुका था लेकिन वो यह भी जानता था कि एक न एक रोज रानी को अपने पति के घर जाना है इसलिए पति के घर जाकर भी वह कमल से दूर न जाए इसलिए वे उसके मन में पति के प्रति नफरत के बीज बोता रहा। वह रानी को कहता कि ऐसा कैसा पति है कि भले ही गौना न हुआ हो कभी किसी बहाने से तुमसे मिलने तो आ ही सकता है। रानी कमल की दीवानी हो चुकी थी इसलिए उसे कमल की हर बात अच्छी और सच्ची लगने लगी थी। इसलिए शादी के बाद लगभग चार साल तक कमल के साथ अवैध सुख उठाने के बाद 2020 में जब रानी का गौना हुआ तो बेमन से पति के साथ आ गई।

ससुराल में आकर रानी रात-दिन कमल से फोन पर बातें करने लगी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी। देवकृष्ण सीधा-साधा युवक था इसलिए वह पत्नी के इस व्यवहार को नजर अंदाज करता रहा। इतना ही नहीं ससुराल में वह चार-पांच दिन ही रही फिर तो मायके गई तो दो-तीन महीने तक वापस नहीं आई। फिर जब आई तो वही हफ्ते भर रहकर वापस महीने भर को मायके चली गई। इस पर देवकृष्ण ने उसे टोका तो उसने घर में लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया।

इसी बीच रिश्तेदारी का बहाना लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल में आना-जाना शुरू कर दिया। कमल के आने पर रानी उसे अकेले ले जाकर अपने कमरे मं घंटों बैठाने लगी तो आखिर सास का सब्र टूट गया। उन्होंने इस बारे में बहू को टोका तो रानी ऐसा बखेड़ा खड़ा किया कि सास और ननद दोनों उससे डरकर रहने लगी।

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इस बात का फायदा उठाकर रानी ने पति देवकृष्ण को बात-बात में नीचा दिखाना शुरू कर दिया। लेकिन अब तक ननद हो शक हो चुका था कि भाभी कमल से ही दिन भर बात करती है इसलिए उसने एक रोज मौका पाकर रानी का मोबाइल चेक किया तो उसमें रानी और कमल की ढेरों अश्लील फोटो के अलावा गंदी चैट भी सामने आ गई। इस पर देवकृष्ण ने उससे सवाल जबाब किया तो वह लड़कर मायके चली गईर् और फिर पूरे दो साल बाद वापस आई तो अपनी शर्तों पर। 

रानी की सभी शर्तें मान ली गई। जिसके बाद वह दिन भर अपने कमरे में पड़ी फोन पर चिपकी रहने लगी। न तो उसे किसी काम का ककहा जाता और विवाद न हो इसलिए मां और बहन रानी के सामने देवकृष्ण बात तक नहीं करती थी। लेकिन अब भी रानी हमेशा की तरह दो चार दिन ससुराल में रहती फिर मायके चली या बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर।

इससे धीरे-धीरे देवकृष्ण समझ गया कि उसकी पत्नी अभी भी अपने आशिक जीजा के साथ संबंध है। इसलिए कुछ समय के बाद वह रानी के बार-बार मायके जाने पर ऐतराज करने लगा। इतना की नहीं एक दो बार तो उसने इस बात को लेकर विवाद भी किया। देवकृष्ण जो अब तक रानी के डर से उसके सामने अपनी मां और बहन से बात तक नहीं करता था वही अब उसके मायके जाने का विरोध करने लगा तो रानी समझ गई कि उसका और कमल को खेल अब ज्यादा नहीं चल सकेगा। इसलिए मार्च के महीने में जब वह होली का त्यौहार बनाने के बहाने मायके गई तो उसने सोच लिया कि इस बार वह कमल से आरपार की बात करके ही आएगी।

होली पर रानी मायके आई और जब कमल उससे होली खेलने आया तो रानी का मन उदास देखकर उसने इसका कारण पूछा। इस पर रानी ने बताया कि देवकृष्ण अब सख्ती करने लगा है। इसलिए उसे नहीं लगता कि अब मैं बार-बार तुमसे मिलने आ पाऊंगी।

ऐसा मत कहो यार मेरा तुम्हारे बिना मन नहीं लगता। मालूम है जब से तुमसे रिश्ता बना है मुझे तो तुम्हारी बहन को प्यार करना भी अच्छा नहीं लगता।

मगर करते तो हो न?

हां मजबूरी में नहीं तो वह मुझ पर शक करने लगेगी।

यही शक तो देवकृष्ण को हो गया है। मगर तुम तो जानते हो कि मुझे तुम्हारी बाहों के बिना नींद भी नहीं आती।

तो क्या करें इसका, कहो तो रास्ते से हटा दें।

हां वर्ना हमारे प्यार को मुश्किल हो जाएगी।

मायके में पति की हत्या की साजिश रची गई। कमल ने अपने पहचान के एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश सुरेन्द्र सिंह को एक लाख रुपए में देवकृष्ण की हत्या के लिए राजी कर लिया। इसके बाद योजना अनुसार महीने भर मायके रहकर रानी 1 अप्रैल को ससुराल लौटी। 4 अप्रैल की रात देवकृष्ण की हत्या की जानी थी मगर उस रात सुरेन्द्र नहीं आया जिससे योजना आगे 7 अप्रैल के लिए टल गई। 7 अप्रैल को योजना अनुसार रात में सबके सो जाने के बाद रानी ने चुपचाप उठकर बाहर का दरवाजा को खोल दिया और वापस आकर अपने कमरे में लेटकर प्रेमी के आकर पति की कहानी खत्म करने का इंतजार करने लगी। रात लगभग 1 बजे कमल, सुरेन्द्र को लेकर रानी के घर में दाखिल हुआ और रानी द्वारा इशारे से बताए गए देवकृष्ण के कमरे में जाकर गहरी नींद में सो रहे देवकृष्ण के सिर पर कुल्हाड़ी से बार कर उसकी कहानी खत्म कर दी।

सुरेन्द्र को 50 हजार रुपया पहले ही दिया जा चुका था। हत्या के बाद रानी ने अपने कमरे से लाकर उसे 50 हजार रूपया और दिया जिससे सुरेन्द्र वहां से चला गया जबकि रानी कमल का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले आई जहां दोनों ने शारीरिक सुख भोगा फिर कमल दिखावे के लिए रानी के हाथ पैर साड़ी से बांधकर वहां से चला गया। जिसके चले जाने के लगभग आधा घंटे बाद रानी ने शोर मचाया जिससे पहले ननद और सास के बाद गांव वाले वहां पहुंचे फिर पुलिस। रानी को भरोसा था कि उसके ऊपर कोई शक नहीं करेगा लेकिन उसके बिस्तर के नीचे छुपाकर रखे गए कंडोम ने पुलिस को कातिल तक पहुंचा दिया।

जिससे छुपाते थे राज, उसी ने खोल दिया राज

जिस कंडोम को रानी और कमल अपने अवैध संबंध की सबसे बड़ी सुरक्षा समझते थे उसी ने दोनों को कत्ल का आरोपी साबित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि रानी ने कभी अपने पति देवकृष्ण से संबंध नहीं बनाए थे। वह हमेशा उसके साथ न सोकर दूसरे कमरे में अकेली सोती थी। ऐसे में कमल और रानी को डर था कि अगर कभी गर्भ रूक गया तो उनके संबंध का भांडा कम से कम देवकृष्ण के सामने तो फूट ही जाएगा। इसलिए हत्या के बाद रानी और कमल ने गर्भ रोकने के लिए इसका उपयोग किया था जिसे बाद में रानी ने बिस्तर के नीचे छुपा दिया जो जांच के दौरान पुलिस के हाथ लग जाने से बड़ा सुराग बना।

DEVKRISHN KI MA AND BAHIN

भाई को हमेशा नीचा दिखाती थी भाभी

देवकृष्ण की बहन ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद भाभी 5 साल मायके में रही फिर गौना होकर हमारे घर आते ही उन्होंने बात-बात पर हम लोगों से लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया था। वह पहली रात ही बड़ी मुश्किल से उनके कमरे में सोने गई थी। उस समय हम लोगों ने उनकी इस बात को उनकी शर्म समझा लेकिन अगले की दिन से उन्होंने भाई से अलग कमरे में सोना शुरू कर दिया था। जब मैने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने सीधे कह दिया कि मुझे उनसे सवाल करने का हक नहीं है। वह बात-बात में भाई कभी काला कलूटा तो कभी गंवार कहकर नीचा दिखाती थी। एक बार तो उन्होंने भाई का गला दबाने की भी कोशिश की थी।

रंगे हाथ पकड़ी गई थी अश्लील चैटिंग

ससुराल में आकर रानी दिन रात अपने प्रेमी जीजा से फोन पर बात करती रहती थी। कुछ दिनों के बाद रिश्तेदारी की ओट लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल आना जाना शुरू कर दिया था। जब कमल कुछ ज्यादा ही आने जाने लगा तो रानी की ननद और सास को उनके रिश्ते पर शक हुआ जिसके बाद ननद ने रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनके अश्लील फोटो और चैटिंग पकड़ ली थी। जिससे लड़ झगड़ कर रानी मायके चली गई थी।

अपनी शर्त पर रहती थी ससुराल में

झगड़ा कर मायके गई रानी तीन साल बाद जब वापस लौटी तो अपनी शर्तों पर। उसकी शर्त थी कि वह घर का कोई काम नहीं करेगी। न कोई उसका मोबाइल छुएगा और न उसके कमरे में आएगा। देवकृष्ण ने यह शर्तें मान ली थी तब कहीं जाकर रानी ससुराल आई थी। लेकिन अब कमल का उसकी ससुराल आना बंद हो गया था इसलिए रानी ससुराल में चार-पांच दिन से अधिक नहीं रहती थी। वह कभी मायके चली जाती तो कभी बदनावर में अपनी नानी के घर।

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09 May 2026 By Rohit.P

सत्यकथा: जीजा की होकर रहने की खातिर साली ने करवाई पति की हत्या

सत्यकथा

रानी रूपमति और बाजबहादुर की अमर प्रेम कथा के लिए प्रसिद्ध धार जिले के एक गांव में अप्रैल महीने में 6 और 7 तारीख की दर्मियानी रात को जो कुछ हुआ , उसे अगर कुछ और न भी कहा जाए तो यह तो कहा ही जा सकता है कि इस एक घटना ने जिले में प्रेम के इतिहास पर अपनी काली परछाई अवश्य छोड़ी है।

धार जिले में सरदार पुरा तहसील का गोंदीखेड़ी चारण गांव। छोटा सा शांत गांव जहां की सीमित आबादी में हर कोई एक दूसरे को जानता-पहचानता ही नहीं बल्कि एक दूसरे के सुख-दुख में शरीक भी है। इसी गांव में रहने वाला 29 वर्षीय देवकृष्ण पुरोहित भी गांव के हर एक घर में पहचाने जाने वाला नाम है।

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देवकृष्ण के पिता एक समय गांव में किराने की दुकान किया करते थे। 1995 में असमय ही जब उनकी मृत्यु हुई तब देवकृष्ण केवल दो साल का और उससे भी छोटी बहन थी ज्योति। मां लक्ष्मी ने गांव में ही रहने वाले ताऊ की मदद से दोनों बच्चों की परवरिश की। समय के साथ देवकृष्ण बड़ा हुआ तो उसने मसाले का करोबार करना शुरू कर दिया। मेहनती और ईमानदार था इससे जल्द ही उसके कारोबार ने गति पकड़ ली।

यह देखकर मां के मन में बहू लाने का विचार आने पर उन्होंने रिश्तेदारों ने चर्चा की जिसके चलते 1 अप्रैल 2015 को जब देवकृष्ण केवल 19 साल का था उसकी शादी महाराष्ट्र के पन्नाखेड़ी में रहने वाले परिवार के पुराने परिचित की बेटी रानी से कर दी गई। विवाह के समय रानी केवल 15 साल की थी इसलिए उसे शादी के पांच साल बाद 2020 में हुए गौना के बाद ही पति पास भेजा गया था।

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इसलिए घटना की रात इस घर में चार लोग मौजूद थे। 4-5 रोज पहले मायके से वापस आई बहू रानी, देवकृष्ण और मां लक्ष्मी तथा बहन ज्योति।

आधी रात बीत चुकी थी। पूरा गांव गहरी नींद में था कि इसी बीच देवकृष्ण के घर से आ रही चीख-पुकार की आवाज से जागे लोग चंद पल में उसके घर पर जमा हो गए। जहां का नजारा काफी डरावना था। अपने कमरे में देवकृष्ण का रक्त रंजित शव उसके पलंग पर पड़ा था और मां, बहन तथा रानी पलंग को घेर का बैठी दहाड़ मारकर रो रहीं थी।

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मामला गांव वालों की समझ से परे था। लेकिन इतना तो देखने से जाहिर था कि देवकृष्ण की हत्या की गई है। इसलिए गांव वालों ने राजोद थाने को घटना की जानकारी दे दी जिससे कुछ ही समय में टीआई राजोद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। मौके पर देवकृष्ण की मां ने उन्हें बताया कि वो बेटी के साथ एक कमरे में सो रही थी जबकि बहू और बेटा दूसरे दो कमरों में अलग-अलग सो रहे थे। उन्होंने बताया कि पड़ोस की एक महिला ने उन्हें फोनकर बेटे के कमरे में जाकर देखने का कहा तो वह बेटी के साथ यहां आई तब यह सब देखने को मिला। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय दूसरे कमरे में बहू के हाथ पैर बंधे थे।

यानी वास्तव में हुआ क्या है यह बात रानी बता सकती थी। सो पूछे जाने पर उसने बताया कि आधी रात चार डकैत घर में घुस आए थे। उन्होंने मुझे कमरे में बांध दिया और लूट पाट करने लगे। पति ने उनका विरोध किया तो उन्होंने उनकी हत्या कर दी। यह कहकर रानी दहाड़ मार कर रोने लगी। लगभग तीन लाख कीमत के जेवर और 50 हजार की नकदी लूटे जाने की बात भी परिवार ने पुलिस को बताई।

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डकैती और हत्या जैसी गंभीर वारदात की खबर पाकर एसडीओपी सरदारपुर सुश्री बेलापुरकर और एसपी धार भी मौके पर पहुंच गए।

घटना स्थल की जांच के दौरान रानी की बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी। क्योंकि अगर हत्या देवकृष्ण के विरोध करने के चलते हुई है तो उसकी लाश बिस्तर के बजाए फर्श पर कहीं मिलना चाहिए थी। इसके अलावा मृतक के सिर पर धारदार हथियार से जो बार किया गया था वह देखकर ही साफ था कि बार हत्या के मकसद से किया गया है और हत्या के समय मृतक बिस्तर र सो रहा होगा।

मामला संदिग्ध था इसलिए शव को पीएम के लिए भेजने के बाद पुलिस ने घर की बारीकी से जांच की तो काफी कुछ काला-सफेद सामने आने लगा। परिवार जिन जेवर और नगदी की लूट की बात बता रहा था वह घर में छुपाकर रखे मिल गए। इसके अलावा सबसे चौंकाने वाली चीज रानी के कमरे में उसके बिस्तर के नीचे मिली, एक यूज किया हुआ...।

लेकिन रानी तो उस रात पति से अलग दूसरे कमरे में सो रही थी। यह मान भी लिया जाए कि सोने से पहले पति-पत्नी नजदीक आए होंगे तब भी कंडोम देवकृष्ण के कमरे में मिलना चाहिए था न कि रानी के। क्योंकि रानी का कमरा उस कमरे से लगा हुआ था जिसमें उसकी सास और ननद सो रही थी। फिर उस रात पति से मिलने जैसी कोई बात रानी ने पुलिस को नहीं बताई थी। इसलिए रानी शक के घेरे में आ गई।

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इसी बीच पुलिस ने गांव वालों के बीच चल रही कानापूसी पर कान लगाया तो काफी चौंकाने वाली बातें जानकारी में आ गई। जिसमें सबसे बड़ी बात तो यही थी कि शादी के बाद से ही रानी की न तो अपने पति से बनती थी और न सास ननद से। इतना ही नहीं 2020 में गौना होने के बाद से रानी व मुश्किल महीने भर ही ससुराल में रही थी। वह केवल चार-पांच रोज ससुराल में रहकर महीनों के लिए कभी मायके तो कभी बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर चली जाती थी। इतना ही नहीं ससुराल में रहने की उसकी अपनी शर्तें भी थी, मसलन कोई उसका मोबाइल नहीं छुएगा, उससे घर के किसी काम को करने के लिए नहीं कहा जाएगा।

सास और ननद से बताया कि वह दिन भर फोन पर बातें करती रहती थी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी न उसके साथ कमरे में सोती थी। रानी ने परिवार में ऐसा दबदबा बना रखा था कि उसके सामने बेटा अपनी मां और बहन से बात भी नहीं कर पाता था।

लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ननद ने पुलिस को बताई उसने बताया कि भाभी के अपने गांव में रहने वाले उनके रिश्ते के जीजा कमल पुरोहित के साथ भाभी के गंदे संबंध है।  रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनकी गंदी चैट और फोटो पकड़ी भी जा चुकी हैं। जिसके बाद वह लड़-झगड़ कर मायके चली गई थी और लगभग दो साल तक नहीं आई थी। फिर आई तो अपनी शर्तों पर।

घटना 7 अप्रैल को घटी उससे पहले भी वह 1 अप्रैल को ही ससुराल आई थी और जब से आई है भाई के कमरे में एक रात भी नहीं सोई। 

अगर पति से इस हद तक विवाद था तो फिर रानी के कमरे में बिस्तर के नीचे छुपाकर रखा गया ...। कई सवाल उठ खड़े हुए थे। इसलिए कमल से संंबंधो के चलते रानी ही शक के दायरे में आ गई। कमल पुरोहित रानी के गांव का ही रहने वाला था और रिश्ते में उसका जीजा लगता था।

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देवकृष्ण के अंतिम संस्कार के बाद उसी रात को एसडीओपी सुश्री बेलापुरकर ने रानी को पूछताछ के लिए राजोद थाने बुला भेजा। जहां पहले तो रानी रात वाली वही लूट की कहानी दोहराती रही लेकिन जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ कर बार-बार मायके जाने के बारे में पूछते हुए कमल पुरोहित के नाम की तरफ इशारा किया तो 24 साल की रानी डर गई। उसने जल्द ही अपना अपराध स्वीकार करते हुए बता दिया कि उसने ही अपने पति को मरवाया है ताकि वह अपने आशिक के साथ बाकी की जिंदगी बिता सके। इस काम के लिए कमल ने सुरेन्द्र पाल सिंह नाम के एक बदमाश को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी जिसमें से 50 हजार रूपए एडवांस के तौर पर दिए जा चुके थे।

रानी द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लेने के बाद पुलिस ने छापामारी कर कमल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जबकि सुपारी किलर सुरेन्द्र फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस ने दोनों आरोपी प्रेमी जीजा-साली को अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद यह कहानी इस प्रकार सामने आई।

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पिता की असमय मृत्यु के बाद मां की आंचल की छांव में पलकर बड़े हुए देवकृष्ण ने मसालों का कारोबार शुरू किया था। चूंकि उसका व्यवहार अच्छा था इससे जल्द ही उसका कारोबार स्थापित हो गया। हर मां की तरह देवकृष्ण की मां लक्ष्मी देवी के मन में भी बेटे के लिए चांद जैसी बहू लाने की हसरत थी।

महाराष्ट्र में पन्नाखेड़ी में रहने वाला रानी के परिवार का देवकृष्ण के परिवार से पुराना परिचय था। इसलिए जब बात रानी के पिता को पता चली तो उन्होंने लक्ष्मी देवी के सामने रानी का विवाह देवकृष्ण से करने की इच्छा जाहिर की। रानी सुंदर ही नहीं अति सुंदर थी फिर परिवार भी जाना पहचाना था इसलिए दोनों की कुंडली का मिलान हो जाने पर लक्ष्मी देवी इस रिश्ते के लिए राजी हो गई। जिससे 1 अप्रैल 2015 में देवकृष्ण और रानी की शादी कर दी गई।

चूंकि विवाह के समय रानी की उम्र केवल 15 साल थी इसलिए इस कच्ची उम्र में उसे पति के पास भेजना दोनों परिवार को उचित नहीं लगा इसलिए आपसी सहमति से एक दो साल बाद गौना करने के बाद रानी को ससुराल भेजने की बात तय हो जाने पर शादी के बाद दूल्हा देवकृष्ण अकेला ही वापस घर आकर काम-धंधे में लग गया।

वास्तव में मायके वालों की तरह लक्ष्मी देवी का भी सोचना था कि 15 साल की मासूम सी रानी अभी पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में क्या ही कुछ जाने। लेकिन वे भूल गए थे कि आज के समय में बच्चे 10-12 साल की उम्र में ही वह सब कुछ जानने समझने लगते हैं जो पुरानी पीढ़ी 20-22 की उम्र में जाकर जान पाती थी।

गांव की कुछ भाभियों और विवाहित सहेलियों के द्वारा रानी भी सब कुछ जानने लगी थी कि शादी का मतलब क्या होता है। पति के प्यार को लेकर वह रोमांचित भी थी इसलिए शादी के बाद जब उसे एक-दो साल बाद गौना करने के नाम पर पति के साथ विदा नहीं किया गया तो रानी उदास हो गई। लेकिन अपने दर्द को वह किससे कहती इसलिए बेसब्री से वह उस दिन का इंतजार करने लगी जब उसका गौना हो और पति का प्यार मिले।

दो बहने अगर शादीशुदा हो तो उनके बीच बातचीत की मर्यादा काफी कुछ मिट जाती है। कमल पुरोहित के साथ रानी के बड़े पिता की बेटी की शादी हुई थी। इसलिए एक बार जब दोनों बहनें मिली तो रानी ने बातों-बातों में अपनी बहन को बताया कि माता-पिता तो उसकी शादी करके बैठ गए है अब जाने कब गौना होगा?

क्यों सुहागरात की जल्दी है क्या, रानी की बात पर उसकी बहन से कहा तो रानी शर्मा कर रह गई। लेकिन उसी रोज रानी की वह बहन जब अपने पति कमल के साथ थी तो उसने बातों-बातों में कमल को बता दिया कि रानी बेचारी परेशान है कि कब उसका गौना हो और पति का संग मिले।

कमल घाघ था इसलिए पत्नी की बात सुनकर भी उसने अनसुनी कर दी। लेकिन वह समझ गया कि शादी होने के बाद भी सुहागरात के लिए तरस रही साली को हाथ में लेने के लिए यह मौका अच्छा है। इसलिए अगले की दिन से उसने रानी के घर आना-जाना शुरू कर दिया। वैसे भी रिश्तेदारी के कारण उसका रानी के घर में आना-जाना पहले से था ही। इस दौरान उसे जब भी मौका मिलता रानी के साथ हंसी मजाक करने लगता। कुछ दिनों तक रानी का मन तौलने के बाद उसने बातों-बातों में रानी से कुछ गहरी मजाक करना शुरू कर दिया। इस पर भी रानी ने बुरा नहीं माना तो एक दिन मौका पाकर उसने रानी से कहा कि मैने आज तक देवकृष्ण जैसा आदमी नहीं देखा जो तुम्हारी जैसी सुंदर पत्नी होने के बाद भी रातों में अकेला सो रहा है। सच मानो अगर तुम्हारी शादी मेरे साथ हुई होती तो मैं तो एक रोज भी तुम्हारे बिना न सो पता।

कमल की बात सुनकर रानी शर्मा गई तो वह बोला अरे मुझसे क्या शर्माना। मेरी बात झूठ लगे तो अपनी बहन से पूछ लेना मैं तो आज भी हर रात उसे प्यार किए बिना नहीं सोता। प्यार का मतलब समझ रहीं हो न।

रानी चुप रही तो कमल ने कहा अरे यार पति-पत्नी वाला प्यार। अच्छा एक बात बताओ तुम्हें शादी के बाद अकेले नींद आ जाती है।

रानी ने नजरे झुकाए हुए हां में सिर हिलाया तो कमल बोला हो सकता है क्योंकि अभी तुमने उस प्यार का नशा किया नहीं न, किसी दिन कर लोगी तो फिर अकेले नींद नहीं आएगी।

इसी तरह मौका मिलने पर कमल रानी के मन में आग लगाता रहा और जब देखा कि अब रानी उसका विरोध नहीं करेगी तो एक रोज मौका मिलने पर उसने रानी के मना करते-करते भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना डाला। रानी को दुख तो हुआ और बुरा भी लगा लेकिन शारीरिक सुख के अनुभव ने उसे सब कुछ भुला दिया।

उस रोज के बाद कमल और रानी अक्सर अकेले में मिलने के मौके निकालने लगे। कमल जो चाहता था वो हासिल कर चुका था लेकिन वो यह भी जानता था कि एक न एक रोज रानी को अपने पति के घर जाना है इसलिए पति के घर जाकर भी वह कमल से दूर न जाए इसलिए वे उसके मन में पति के प्रति नफरत के बीज बोता रहा। वह रानी को कहता कि ऐसा कैसा पति है कि भले ही गौना न हुआ हो कभी किसी बहाने से तुमसे मिलने तो आ ही सकता है। रानी कमल की दीवानी हो चुकी थी इसलिए उसे कमल की हर बात अच्छी और सच्ची लगने लगी थी। इसलिए शादी के बाद लगभग चार साल तक कमल के साथ अवैध सुख उठाने के बाद 2020 में जब रानी का गौना हुआ तो बेमन से पति के साथ आ गई।

ससुराल में आकर रानी रात-दिन कमल से फोन पर बातें करने लगी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी। देवकृष्ण सीधा-साधा युवक था इसलिए वह पत्नी के इस व्यवहार को नजर अंदाज करता रहा। इतना ही नहीं ससुराल में वह चार-पांच दिन ही रही फिर तो मायके गई तो दो-तीन महीने तक वापस नहीं आई। फिर जब आई तो वही हफ्ते भर रहकर वापस महीने भर को मायके चली गई। इस पर देवकृष्ण ने उसे टोका तो उसने घर में लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया।

इसी बीच रिश्तेदारी का बहाना लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल में आना-जाना शुरू कर दिया। कमल के आने पर रानी उसे अकेले ले जाकर अपने कमरे मं घंटों बैठाने लगी तो आखिर सास का सब्र टूट गया। उन्होंने इस बारे में बहू को टोका तो रानी ऐसा बखेड़ा खड़ा किया कि सास और ननद दोनों उससे डरकर रहने लगी।

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इस बात का फायदा उठाकर रानी ने पति देवकृष्ण को बात-बात में नीचा दिखाना शुरू कर दिया। लेकिन अब तक ननद हो शक हो चुका था कि भाभी कमल से ही दिन भर बात करती है इसलिए उसने एक रोज मौका पाकर रानी का मोबाइल चेक किया तो उसमें रानी और कमल की ढेरों अश्लील फोटो के अलावा गंदी चैट भी सामने आ गई। इस पर देवकृष्ण ने उससे सवाल जबाब किया तो वह लड़कर मायके चली गईर् और फिर पूरे दो साल बाद वापस आई तो अपनी शर्तों पर। 

रानी की सभी शर्तें मान ली गई। जिसके बाद वह दिन भर अपने कमरे में पड़ी फोन पर चिपकी रहने लगी। न तो उसे किसी काम का ककहा जाता और विवाद न हो इसलिए मां और बहन रानी के सामने देवकृष्ण बात तक नहीं करती थी। लेकिन अब भी रानी हमेशा की तरह दो चार दिन ससुराल में रहती फिर मायके चली या बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर।

इससे धीरे-धीरे देवकृष्ण समझ गया कि उसकी पत्नी अभी भी अपने आशिक जीजा के साथ संबंध है। इसलिए कुछ समय के बाद वह रानी के बार-बार मायके जाने पर ऐतराज करने लगा। इतना की नहीं एक दो बार तो उसने इस बात को लेकर विवाद भी किया। देवकृष्ण जो अब तक रानी के डर से उसके सामने अपनी मां और बहन से बात तक नहीं करता था वही अब उसके मायके जाने का विरोध करने लगा तो रानी समझ गई कि उसका और कमल को खेल अब ज्यादा नहीं चल सकेगा। इसलिए मार्च के महीने में जब वह होली का त्यौहार बनाने के बहाने मायके गई तो उसने सोच लिया कि इस बार वह कमल से आरपार की बात करके ही आएगी।

होली पर रानी मायके आई और जब कमल उससे होली खेलने आया तो रानी का मन उदास देखकर उसने इसका कारण पूछा। इस पर रानी ने बताया कि देवकृष्ण अब सख्ती करने लगा है। इसलिए उसे नहीं लगता कि अब मैं बार-बार तुमसे मिलने आ पाऊंगी।

ऐसा मत कहो यार मेरा तुम्हारे बिना मन नहीं लगता। मालूम है जब से तुमसे रिश्ता बना है मुझे तो तुम्हारी बहन को प्यार करना भी अच्छा नहीं लगता।

मगर करते तो हो न?

हां मजबूरी में नहीं तो वह मुझ पर शक करने लगेगी।

यही शक तो देवकृष्ण को हो गया है। मगर तुम तो जानते हो कि मुझे तुम्हारी बाहों के बिना नींद भी नहीं आती।

तो क्या करें इसका, कहो तो रास्ते से हटा दें।

हां वर्ना हमारे प्यार को मुश्किल हो जाएगी।

मायके में पति की हत्या की साजिश रची गई। कमल ने अपने पहचान के एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश सुरेन्द्र सिंह को एक लाख रुपए में देवकृष्ण की हत्या के लिए राजी कर लिया। इसके बाद योजना अनुसार महीने भर मायके रहकर रानी 1 अप्रैल को ससुराल लौटी। 4 अप्रैल की रात देवकृष्ण की हत्या की जानी थी मगर उस रात सुरेन्द्र नहीं आया जिससे योजना आगे 7 अप्रैल के लिए टल गई। 7 अप्रैल को योजना अनुसार रात में सबके सो जाने के बाद रानी ने चुपचाप उठकर बाहर का दरवाजा को खोल दिया और वापस आकर अपने कमरे में लेटकर प्रेमी के आकर पति की कहानी खत्म करने का इंतजार करने लगी। रात लगभग 1 बजे कमल, सुरेन्द्र को लेकर रानी के घर में दाखिल हुआ और रानी द्वारा इशारे से बताए गए देवकृष्ण के कमरे में जाकर गहरी नींद में सो रहे देवकृष्ण के सिर पर कुल्हाड़ी से बार कर उसकी कहानी खत्म कर दी।

सुरेन्द्र को 50 हजार रुपया पहले ही दिया जा चुका था। हत्या के बाद रानी ने अपने कमरे से लाकर उसे 50 हजार रूपया और दिया जिससे सुरेन्द्र वहां से चला गया जबकि रानी कमल का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले आई जहां दोनों ने शारीरिक सुख भोगा फिर कमल दिखावे के लिए रानी के हाथ पैर साड़ी से बांधकर वहां से चला गया। जिसके चले जाने के लगभग आधा घंटे बाद रानी ने शोर मचाया जिससे पहले ननद और सास के बाद गांव वाले वहां पहुंचे फिर पुलिस। रानी को भरोसा था कि उसके ऊपर कोई शक नहीं करेगा लेकिन उसके बिस्तर के नीचे छुपाकर रखे गए कंडोम ने पुलिस को कातिल तक पहुंचा दिया।

जिससे छुपाते थे राज, उसी ने खोल दिया राज

जिस कंडोम को रानी और कमल अपने अवैध संबंध की सबसे बड़ी सुरक्षा समझते थे उसी ने दोनों को कत्ल का आरोपी साबित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि रानी ने कभी अपने पति देवकृष्ण से संबंध नहीं बनाए थे। वह हमेशा उसके साथ न सोकर दूसरे कमरे में अकेली सोती थी। ऐसे में कमल और रानी को डर था कि अगर कभी गर्भ रूक गया तो उनके संबंध का भांडा कम से कम देवकृष्ण के सामने तो फूट ही जाएगा। इसलिए हत्या के बाद रानी और कमल ने गर्भ रोकने के लिए इसका उपयोग किया था जिसे बाद में रानी ने बिस्तर के नीचे छुपा दिया जो जांच के दौरान पुलिस के हाथ लग जाने से बड़ा सुराग बना।

DEVKRISHN KI MA AND BAHIN

भाई को हमेशा नीचा दिखाती थी भाभी

देवकृष्ण की बहन ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद भाभी 5 साल मायके में रही फिर गौना होकर हमारे घर आते ही उन्होंने बात-बात पर हम लोगों से लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया था। वह पहली रात ही बड़ी मुश्किल से उनके कमरे में सोने गई थी। उस समय हम लोगों ने उनकी इस बात को उनकी शर्म समझा लेकिन अगले की दिन से उन्होंने भाई से अलग कमरे में सोना शुरू कर दिया था। जब मैने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने सीधे कह दिया कि मुझे उनसे सवाल करने का हक नहीं है। वह बात-बात में भाई कभी काला कलूटा तो कभी गंवार कहकर नीचा दिखाती थी। एक बार तो उन्होंने भाई का गला दबाने की भी कोशिश की थी।

रंगे हाथ पकड़ी गई थी अश्लील चैटिंग

ससुराल में आकर रानी दिन रात अपने प्रेमी जीजा से फोन पर बात करती रहती थी। कुछ दिनों के बाद रिश्तेदारी की ओट लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल आना जाना शुरू कर दिया था। जब कमल कुछ ज्यादा ही आने जाने लगा तो रानी की ननद और सास को उनके रिश्ते पर शक हुआ जिसके बाद ननद ने रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनके अश्लील फोटो और चैटिंग पकड़ ली थी। जिससे लड़ झगड़ कर रानी मायके चली गई थी।

अपनी शर्त पर रहती थी ससुराल में

झगड़ा कर मायके गई रानी तीन साल बाद जब वापस लौटी तो अपनी शर्तों पर। उसकी शर्त थी कि वह घर का कोई काम नहीं करेगी। न कोई उसका मोबाइल छुएगा और न उसके कमरे में आएगा। देवकृष्ण ने यह शर्तें मान ली थी तब कहीं जाकर रानी ससुराल आई थी। लेकिन अब कमल का उसकी ससुराल आना बंद हो गया था इसलिए रानी ससुराल में चार-पांच दिन से अधिक नहीं रहती थी। वह कभी मायके चली जाती तो कभी बदनावर में अपनी नानी के घर।

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