सत्यकथा: बीवी ने मालिक के साथ मिलकर कर दी पति की हत्या

मंदसौर (म.प्र.)

By Rohit.P
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बारह अप्रैल की शाम ढलने को थी। ऐसे में मंदसौर जिले के भानपुरा थाने पहुंची दूधाखेड़ी गांव की एक युवती ने टीआई रमेशचंद दांगी के सामने अपने पति धनराज नाथ की गुमशुदगी की बात बताई।

थाने आई युवती रूपा के साथ आए युवक पंकज चौधरी ने बताया कि धनराज उसके खेत में काम करता था। इसलिए उसने पति-पत्नी को अपने की खेत में रहने के लिए एक कमरा भी बना दिया था। धनराज का मूल काम  ट्रेक्टर चलाना था। लेकिन कल 11 अप्रैल को अचानक कहीं चला गया है।

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पंकज ने यह भी बताया कि यह बात उसे आज पता चली जब सुबह उसने रूपा से पति क बारे में पूछा तो उसने धनराज के कल से लापता होने की बात बताई जिसका मोबाइल भी तभी से बंद था। पुलिस को पहली नजर में यह एक सामान्य मामला लगा इसलिए उसने रूपा की रिपोर्ट पर पति की गुमशुदगी लिखकर उसे तलाश करने की बात कहकर दोनों को वापस भेज दिया।

रिपोर्ट लिखवाकर रूपा और पंकज थाने से बाहर निकल गए। रूपा पंकज के साथ उसकी मोटर साइकल पर सवार होकर आई थी। इसलिए वापस जाते समय जब वह पंकज के साथ मोटर साइकल पर सवार हुई तो अपने मालिक के साथ उसका मोटर साइकल पर बैठने का अंदाज पुलिस की नजर में चढ़ गया। दरअसल नौकर की बीवी अपने पति के मालिक के साथ इतने बिंदास अंदाज में उसकी पीठ से एकदम चिपक कर बैठना सामान्य बात नहीं थी। वह थाने से बाहर आते ही पकंज के साथ हंस कर बातें भी कर रही थी। बहरहाल इस बात को नजरअंदाज कर पुलिस ने एक टीम को गांव में पूछताछ के लिए भेज दी। इस टीम ने गांव में पूछताछ की जिसमें पता चला कि रूपा और पंकज के बीच अवैध संबंध हैं जिसकी जानकारी धनराज को भी लग चुकी थी।

यह बात की जानकारी जैसे ही टीआई श्री दांगी को लगी। उन्होंने रूपा और पंकज दोनों को पूछताछ के लिए थाने बुलाकर दोनों से अलग-अलग पूछताछ की। जिसमें उनके सवालों के जबावों में भारी विरोधाभास के चलते आरोपियों के हौंसले टूट गए जिससे पंकज ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए रूपा को हमेशा के लिए अपना बनाए रखने के लिए प्रेमिका के पति धनराज की हत्या करने की बात उजागर कर दी।

इसके बाद पुलिस ने उसकी निशान देही पर पंकज के खेत में गड््डा खुदवा कर धनराज के शव के अधजले अवशेष भी बरामद कर उसे अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अभी मृतक धनराज की पत्नी रूपा से पूछताछ कर इस हत्याकांड़ में उसकी भूमिका तय करने का प्रयास कर रही है।

क्योंकि पूरे मामले में जो कुछ भी सामने आया है उसमें पुलिस को पूरा शक है कि पति की हत्या में रूपा का भी हाथ हो सकता है। लेकिन अब तक आरोपी और संदिग्ध पत्नी के बयान तथा पुलिस की जांच और गांव वालों में हो रही चर्चा से इस हत्याकांड की जो कहानी निकलकर सामने आई है वह इस प्रकार है।

मंदसौर जिले के भानपुरा थाने की सीमा में बसे छोटे से गांव दूधाखेड़ी के नाम को लेकर कई बातें चर्चित है। कुछ लोग कहते हैं कि यहां पहले दूध का व्यापार बड़ी मात्रा में होता था इसलिए इसका नाम दूधाखेड़ी पड़ा तो कुछ लोगों का मानना है कि यहां होने वाली अफीम के पेड़ों में लगने वाले डोढा में दूध बहुत अधिक मात्रा में निकलता है इसलिए इसका नाम दूधाखेड़ी पड़ा। बहरहाल इसका कारण जो भी रहा हो छोटा सा यह गांव आम भारतीय गांव की तरह है।

इसी गांव में रहने वाले धनराज नाथ कि शादी कोई 15 साल पहले पास के गांव में रहने वाली रूपा के साथ हुई थी। रूपा का रूप सचमुच ही उसके नाम की तरह था। आंखों में नशा ऐसा मानों इलाके में पैदा होने वाली सारी अफीम का अर्क उनमें उतर आया हो। रूपा का पाकर धनराज बहुत खुश था। वह दिन भर मेहनत मजदूरी कर जब शाम को घर लौटता तो पत्नी रूपा को देखकर अपनी सारी थकावट भूल जाता।

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धीरे-धीरे रूपा के रूप की चर्चा गांव भर में होने लगी। उसकी यह तारीफ गांव मेंं ही रहने वाले संपन्न किसान पंकज चौधरी के कानों में पहुंची तो उसे भरोसा नहीं हुआ कि एक मजदूर की औरत इतनी भी सुंदर हो सकती है जितनी लोग उसे बताते है। पंकज दिलफेंक किस्म का था। धन-पैसे की गरमी भी थी जिससे वह किसी को भी खरीदने की सोच रखता था। इसलिए जब उसके नाम कई बार रूपा के रूप का गुणगान हुआ तो एक रोज ऐसे रूप को अपनी आंखों से देखने खुद चलकर धनराज के घर जा पहुंचा।

कभी-कभी बुरे इरादों वालों के लिए भी अच्छे संयोग बन जाते है। जिससे जब पंकज, धनराज के घर पहुंचा उस समय धनराज घर पर नहीं था और रूपा दहलान पार कर खुले आंगन में बैठकर नहा रही थी। पंकज को अपनी ऐसी किस्मत का भरोसा नहीं था। इसलिए जब उसने पानी में भीगा रूपा का अर्धनग्न सौंदर्य देखा तो वह होश खो बैठा। रूपा भी उसे देखकर कपड़े समेटते हुए अंदर भाग गई। इस पर पंकज ने तेज आवाज में कहा धनराज आए तो मेरे से मिलने भेज देना उससे काम है।

धनराज को गांव के रईस पंकज चौधरी के घर आने की बात पता चली तो वह उनसे मिलने जा पहुंचा जहां पंकज ने उसे काफी बड़े वेतन का लालच देकर अपने खेतों में काम पर रख लिया जिसमें भी उसका मुख्य काम ट्रेक्टर चलाना था। धनराज नहीं समझ सका कि अचानक कंजूस चौधरी उस पर मेहरबान क्यों हो रहा है।

अगले की दिन से धनराज काम पर जाने लगा। जिसके बाद पंकज का भी उसके यहां आना-जाना होने लगा। इतना ही नहीं कभी कभी वह काम के लिए रूपा को भी खेत पर भेजने को कहने लगा। धनराज नहीं चाहता था कि उसकी खूबसूरत पत्नी मजदूरी करे लेकिन चौधरी नाराज न हो जाए यह सोचकर वह रूपा को चौधरी के खेत पर भेजने लगा। शुरू में तो चौधरी शरीफ बना रहा लेकिन कुछ समय के बाद जिस रोज रूपा खेत पर आती उस रोज चौधरी किसी न किसी काम के बहाने धनराज हो ट्रेक्टर लेकर शहर भेज देता।

इस दौरान काम बताने के बहाने वह कभी कभी रूपा से बात भी करने लगा। ऐसे में एक रोज चौधरी ने उससे कहा तुम्हें याद है जब मैं पहली बार तुम्हारे घर आया था। तुम तो मुझे देखकर ऐसे भागी मानों में तुम्हें वहीं पकड़ लूंगा। अरे ऐसे नहीं भागते न कोई मर्द ऐसे किसी को पकड़ता है। माना कि तुम बहुत सुंदर हो और मुझे अच्छी लगती हो लेकिन जब तक तुम राजी नहीं होगी तो मैं कैसे तुम्हारा हाथ पकड़ सकता हूं।

चौधरी की बात सुनकर रूपा अंदर तक कांप गई। तो चौधरी बोला अरे डरो मत लो यह पांच सौ रुपए रख लो अपने लिए कुछ खरीद लेना।

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नहीं रहने दीजिए, रूपा ने कहा।

अरे ऐसे कैसे रहने दे। अच्छा लगता है इतनी सुंदर रानी ऐसे कपड़े पहले। कुछ अच्छा सा खरीद लेना और हां धनराज को यह बात मत बताना। लो पकड़ो, कहते हुए चौधरी ने रूपा का हाथ पकड़ कर उसमें 5 सौ का नोट रख दिया। रूपा ने सोच लिया कि वो शाम को पति को यह सब बता देगी। लेकिन दिन भर सोचने के बाद उसे लगा कि कहीं उसका पति उससे गुस्सा न करे कि तूने पैसा क्यों लिया और वो इस बात पर चौधरी का काम ही न छोड़ दे। इसलिए रूपा ने शाम को यह बात पति को नहीं बताई।

चौधरी समझ गया कि रूपा ने पैसे की बात पति को नहीं बताई है तो वह आए दिन उसे कभी दो सौ तो कभी सौ रुपए देने लगा। जिससे दोनों के बीच की दीवार कम होने लगी और एक दिन अकेलेपन का फायदा उठाकर चौधरी ने रूपा के साथ शारीरिक संबंध बना डाले।

रूपा इस बात की शिकायत पति को भी नहीं कर सकी क्योंकि चौधरी से चुपचाप पैसा लेकर वह पहले ही खुद को दोषी मान चुकी थी। लेकिन इस घटना के बाद चौधरी आए दिन रूपा के साथ संबंध बनाकर उसे मंहगे उपहार देने लगा जिससे धीरे-धीरे रूपा भी उसके साथ इस रिश्ते में राजी हो गई तो दोनों खुलकर अय्याशी करने लगे।

नतीजा यह हुआ कि रूपा को चौधरी जैसा रईस आशिक मिला और चौधरी को रूपा जैसी रूपवान महिला का साथ तो वे दोनों की जल्द ही एक दूसरे के दीवाने हो गए। इसलिए चौधरी रूपा को रोज खेत बुलाने लगा और रूपा भी जो पहले खेत जाने में रूचि नहीं दिखाती थी अब सज संवर का  खेत जाने लगी जिससे धनराज को चौधरी के साथ रूपा के संबंध का शक हो जाने से वह विरोध करने लगा। इससे चौधरी समझ गया कि रूपा के साथ उसकी अय्याशी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। इसलिए उसने योजना बनाकर 11 अप्रैल की रात धनराज को खेत पर बुलाकर उसे पहले तो शराब पिलाई फिर तलवार से काटकर उसका शव जलाने के बाद जेसीबी से खुदवाए गड्डे में दफन करने के बाद दूसरे दिन रूपा को साथ ले जाकर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करवा दी लेकिन पुलिस ने जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

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जेसीबी से करवाया शव दफनाने गड्डा

लाश की बदबू आने से किसी को शक न हो इसलिए आरोपी पंकज चौधरी ने अपने खेत में जेसीबी से गड्डा करवाया था। इतना ही नहीं लाश दफन करने से पहले उसने शव को तलवार से काटकर जलाया भी था। पुलिस ने बाद में गड्डा खोदकर शव के अवशेष बरामद किए। लाश के कुछ टुकड़े खेत में बने कुएं से भी बरामद किए गए।

पुलिस तलाश रही पत्नी की भूमिका

इस मामले में चर्चा है कि हत्या के समय मृतक की पत्नी आरोपी प्रेमी के साथ थी। दूसरे दिन सुबह वह प्रेमी के साथ ही पति की गुमशुदगी दर्ज करवाने थाने गई थी। पुलिस ने रूपा को हिरासत लेकर पूरे मामले में उसकी भूमिका की जांच कर रही है। रूपा का कहना है कि वह निर्दोष है आरोपी उसकी गरीबी का फायदा उठाकर जबरन उसके साथ बलात्कार करता था।

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09 May 2026 By Rohit.P

सत्यकथा: बीवी ने मालिक के साथ मिलकर कर दी पति की हत्या

मंदसौर (म.प्र.)

बारह अप्रैल की शाम ढलने को थी। ऐसे में मंदसौर जिले के भानपुरा थाने पहुंची दूधाखेड़ी गांव की एक युवती ने टीआई रमेशचंद दांगी के सामने अपने पति धनराज नाथ की गुमशुदगी की बात बताई।

थाने आई युवती रूपा के साथ आए युवक पंकज चौधरी ने बताया कि धनराज उसके खेत में काम करता था। इसलिए उसने पति-पत्नी को अपने की खेत में रहने के लिए एक कमरा भी बना दिया था। धनराज का मूल काम  ट्रेक्टर चलाना था। लेकिन कल 11 अप्रैल को अचानक कहीं चला गया है।

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पंकज ने यह भी बताया कि यह बात उसे आज पता चली जब सुबह उसने रूपा से पति क बारे में पूछा तो उसने धनराज के कल से लापता होने की बात बताई जिसका मोबाइल भी तभी से बंद था। पुलिस को पहली नजर में यह एक सामान्य मामला लगा इसलिए उसने रूपा की रिपोर्ट पर पति की गुमशुदगी लिखकर उसे तलाश करने की बात कहकर दोनों को वापस भेज दिया।

रिपोर्ट लिखवाकर रूपा और पंकज थाने से बाहर निकल गए। रूपा पंकज के साथ उसकी मोटर साइकल पर सवार होकर आई थी। इसलिए वापस जाते समय जब वह पंकज के साथ मोटर साइकल पर सवार हुई तो अपने मालिक के साथ उसका मोटर साइकल पर बैठने का अंदाज पुलिस की नजर में चढ़ गया। दरअसल नौकर की बीवी अपने पति के मालिक के साथ इतने बिंदास अंदाज में उसकी पीठ से एकदम चिपक कर बैठना सामान्य बात नहीं थी। वह थाने से बाहर आते ही पकंज के साथ हंस कर बातें भी कर रही थी। बहरहाल इस बात को नजरअंदाज कर पुलिस ने एक टीम को गांव में पूछताछ के लिए भेज दी। इस टीम ने गांव में पूछताछ की जिसमें पता चला कि रूपा और पंकज के बीच अवैध संबंध हैं जिसकी जानकारी धनराज को भी लग चुकी थी।

यह बात की जानकारी जैसे ही टीआई श्री दांगी को लगी। उन्होंने रूपा और पंकज दोनों को पूछताछ के लिए थाने बुलाकर दोनों से अलग-अलग पूछताछ की। जिसमें उनके सवालों के जबावों में भारी विरोधाभास के चलते आरोपियों के हौंसले टूट गए जिससे पंकज ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए रूपा को हमेशा के लिए अपना बनाए रखने के लिए प्रेमिका के पति धनराज की हत्या करने की बात उजागर कर दी।

इसके बाद पुलिस ने उसकी निशान देही पर पंकज के खेत में गड््डा खुदवा कर धनराज के शव के अधजले अवशेष भी बरामद कर उसे अदालत में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अभी मृतक धनराज की पत्नी रूपा से पूछताछ कर इस हत्याकांड़ में उसकी भूमिका तय करने का प्रयास कर रही है।

क्योंकि पूरे मामले में जो कुछ भी सामने आया है उसमें पुलिस को पूरा शक है कि पति की हत्या में रूपा का भी हाथ हो सकता है। लेकिन अब तक आरोपी और संदिग्ध पत्नी के बयान तथा पुलिस की जांच और गांव वालों में हो रही चर्चा से इस हत्याकांड की जो कहानी निकलकर सामने आई है वह इस प्रकार है।

मंदसौर जिले के भानपुरा थाने की सीमा में बसे छोटे से गांव दूधाखेड़ी के नाम को लेकर कई बातें चर्चित है। कुछ लोग कहते हैं कि यहां पहले दूध का व्यापार बड़ी मात्रा में होता था इसलिए इसका नाम दूधाखेड़ी पड़ा तो कुछ लोगों का मानना है कि यहां होने वाली अफीम के पेड़ों में लगने वाले डोढा में दूध बहुत अधिक मात्रा में निकलता है इसलिए इसका नाम दूधाखेड़ी पड़ा। बहरहाल इसका कारण जो भी रहा हो छोटा सा यह गांव आम भारतीय गांव की तरह है।

इसी गांव में रहने वाले धनराज नाथ कि शादी कोई 15 साल पहले पास के गांव में रहने वाली रूपा के साथ हुई थी। रूपा का रूप सचमुच ही उसके नाम की तरह था। आंखों में नशा ऐसा मानों इलाके में पैदा होने वाली सारी अफीम का अर्क उनमें उतर आया हो। रूपा का पाकर धनराज बहुत खुश था। वह दिन भर मेहनत मजदूरी कर जब शाम को घर लौटता तो पत्नी रूपा को देखकर अपनी सारी थकावट भूल जाता।

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धीरे-धीरे रूपा के रूप की चर्चा गांव भर में होने लगी। उसकी यह तारीफ गांव मेंं ही रहने वाले संपन्न किसान पंकज चौधरी के कानों में पहुंची तो उसे भरोसा नहीं हुआ कि एक मजदूर की औरत इतनी भी सुंदर हो सकती है जितनी लोग उसे बताते है। पंकज दिलफेंक किस्म का था। धन-पैसे की गरमी भी थी जिससे वह किसी को भी खरीदने की सोच रखता था। इसलिए जब उसके नाम कई बार रूपा के रूप का गुणगान हुआ तो एक रोज ऐसे रूप को अपनी आंखों से देखने खुद चलकर धनराज के घर जा पहुंचा।

कभी-कभी बुरे इरादों वालों के लिए भी अच्छे संयोग बन जाते है। जिससे जब पंकज, धनराज के घर पहुंचा उस समय धनराज घर पर नहीं था और रूपा दहलान पार कर खुले आंगन में बैठकर नहा रही थी। पंकज को अपनी ऐसी किस्मत का भरोसा नहीं था। इसलिए जब उसने पानी में भीगा रूपा का अर्धनग्न सौंदर्य देखा तो वह होश खो बैठा। रूपा भी उसे देखकर कपड़े समेटते हुए अंदर भाग गई। इस पर पंकज ने तेज आवाज में कहा धनराज आए तो मेरे से मिलने भेज देना उससे काम है।

धनराज को गांव के रईस पंकज चौधरी के घर आने की बात पता चली तो वह उनसे मिलने जा पहुंचा जहां पंकज ने उसे काफी बड़े वेतन का लालच देकर अपने खेतों में काम पर रख लिया जिसमें भी उसका मुख्य काम ट्रेक्टर चलाना था। धनराज नहीं समझ सका कि अचानक कंजूस चौधरी उस पर मेहरबान क्यों हो रहा है।

अगले की दिन से धनराज काम पर जाने लगा। जिसके बाद पंकज का भी उसके यहां आना-जाना होने लगा। इतना ही नहीं कभी कभी वह काम के लिए रूपा को भी खेत पर भेजने को कहने लगा। धनराज नहीं चाहता था कि उसकी खूबसूरत पत्नी मजदूरी करे लेकिन चौधरी नाराज न हो जाए यह सोचकर वह रूपा को चौधरी के खेत पर भेजने लगा। शुरू में तो चौधरी शरीफ बना रहा लेकिन कुछ समय के बाद जिस रोज रूपा खेत पर आती उस रोज चौधरी किसी न किसी काम के बहाने धनराज हो ट्रेक्टर लेकर शहर भेज देता।

इस दौरान काम बताने के बहाने वह कभी कभी रूपा से बात भी करने लगा। ऐसे में एक रोज चौधरी ने उससे कहा तुम्हें याद है जब मैं पहली बार तुम्हारे घर आया था। तुम तो मुझे देखकर ऐसे भागी मानों में तुम्हें वहीं पकड़ लूंगा। अरे ऐसे नहीं भागते न कोई मर्द ऐसे किसी को पकड़ता है। माना कि तुम बहुत सुंदर हो और मुझे अच्छी लगती हो लेकिन जब तक तुम राजी नहीं होगी तो मैं कैसे तुम्हारा हाथ पकड़ सकता हूं।

चौधरी की बात सुनकर रूपा अंदर तक कांप गई। तो चौधरी बोला अरे डरो मत लो यह पांच सौ रुपए रख लो अपने लिए कुछ खरीद लेना।

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नहीं रहने दीजिए, रूपा ने कहा।

अरे ऐसे कैसे रहने दे। अच्छा लगता है इतनी सुंदर रानी ऐसे कपड़े पहले। कुछ अच्छा सा खरीद लेना और हां धनराज को यह बात मत बताना। लो पकड़ो, कहते हुए चौधरी ने रूपा का हाथ पकड़ कर उसमें 5 सौ का नोट रख दिया। रूपा ने सोच लिया कि वो शाम को पति को यह सब बता देगी। लेकिन दिन भर सोचने के बाद उसे लगा कि कहीं उसका पति उससे गुस्सा न करे कि तूने पैसा क्यों लिया और वो इस बात पर चौधरी का काम ही न छोड़ दे। इसलिए रूपा ने शाम को यह बात पति को नहीं बताई।

चौधरी समझ गया कि रूपा ने पैसे की बात पति को नहीं बताई है तो वह आए दिन उसे कभी दो सौ तो कभी सौ रुपए देने लगा। जिससे दोनों के बीच की दीवार कम होने लगी और एक दिन अकेलेपन का फायदा उठाकर चौधरी ने रूपा के साथ शारीरिक संबंध बना डाले।

रूपा इस बात की शिकायत पति को भी नहीं कर सकी क्योंकि चौधरी से चुपचाप पैसा लेकर वह पहले ही खुद को दोषी मान चुकी थी। लेकिन इस घटना के बाद चौधरी आए दिन रूपा के साथ संबंध बनाकर उसे मंहगे उपहार देने लगा जिससे धीरे-धीरे रूपा भी उसके साथ इस रिश्ते में राजी हो गई तो दोनों खुलकर अय्याशी करने लगे।

नतीजा यह हुआ कि रूपा को चौधरी जैसा रईस आशिक मिला और चौधरी को रूपा जैसी रूपवान महिला का साथ तो वे दोनों की जल्द ही एक दूसरे के दीवाने हो गए। इसलिए चौधरी रूपा को रोज खेत बुलाने लगा और रूपा भी जो पहले खेत जाने में रूचि नहीं दिखाती थी अब सज संवर का  खेत जाने लगी जिससे धनराज को चौधरी के साथ रूपा के संबंध का शक हो जाने से वह विरोध करने लगा। इससे चौधरी समझ गया कि रूपा के साथ उसकी अय्याशी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। इसलिए उसने योजना बनाकर 11 अप्रैल की रात धनराज को खेत पर बुलाकर उसे पहले तो शराब पिलाई फिर तलवार से काटकर उसका शव जलाने के बाद जेसीबी से खुदवाए गड्डे में दफन करने के बाद दूसरे दिन रूपा को साथ ले जाकर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करवा दी लेकिन पुलिस ने जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

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जेसीबी से करवाया शव दफनाने गड्डा

लाश की बदबू आने से किसी को शक न हो इसलिए आरोपी पंकज चौधरी ने अपने खेत में जेसीबी से गड्डा करवाया था। इतना ही नहीं लाश दफन करने से पहले उसने शव को तलवार से काटकर जलाया भी था। पुलिस ने बाद में गड्डा खोदकर शव के अवशेष बरामद किए। लाश के कुछ टुकड़े खेत में बने कुएं से भी बरामद किए गए।

पुलिस तलाश रही पत्नी की भूमिका

इस मामले में चर्चा है कि हत्या के समय मृतक की पत्नी आरोपी प्रेमी के साथ थी। दूसरे दिन सुबह वह प्रेमी के साथ ही पति की गुमशुदगी दर्ज करवाने थाने गई थी। पुलिस ने रूपा को हिरासत लेकर पूरे मामले में उसकी भूमिका की जांच कर रही है। रूपा का कहना है कि वह निर्दोष है आरोपी उसकी गरीबी का फायदा उठाकर जबरन उसके साथ बलात्कार करता था।

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