बांग्लादेश में बड़ा सियासी मोड़: पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी सत्ता के करीब

अंतराष्ट्रीय न्यूज

On

सर्वे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी जमात, फरवरी चुनाव में सरकार बनाने की संभावना; भारत की चिंता बढ़ी

ढाका। बांग्लादेश में अगले महीने होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान समर्थक मानी जाने वाली इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सत्ता के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है। हालिया सर्वेक्षणों में पार्टी देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को कड़ी चुनौती दे रही है।

12 फरवरी को बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव होने हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में कराए गए दो स्वतंत्र सर्वे में जमात-ए-इस्लामी को 29 से 33.6 प्रतिशत तक समर्थन मिला है, जबकि BNP को 33 से 34.7 प्रतिशत मतदाताओं की पसंद बताया गया है। दोनों के बीच अंतर बेहद कम है, जिससे चुनावी मुकाबला रोमांचक और निर्णायक माना जा रहा है।

जमात-ए-इस्लामी का इतिहास बांग्लादेश में विवादों से भरा रहा है। 1971 में पार्टी ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया था। आजादी के बाद 1972 में उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसे 1975 में हटाया गया। हालांकि 2013 में अदालत ने पार्टी की विचारधारा को देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ बताते हुए उस पर फिर से चुनावी रोक लगा दी थी। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने यह प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद जमात तेजी से राजनीतिक रूप से सक्रिय हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग पर बैन लगने से बने राजनीतिक शून्य का सबसे ज्यादा फायदा जमात को मिला है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह 179 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान का दावा है कि पार्टी अब टकराव की राजनीति छोड़कर जनकल्याण और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। पार्टी बाढ़ राहत, मेडिकल कैंप और सामाजिक सहायता जैसे कार्यक्रमों के जरिए अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है।

जमात युवाओं को साधने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों पर भी जोर दे रही है। एक चुनावी गीत, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, के जरिए पार्टी ने खुद को पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में पेश किया है। बांग्लादेश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या करीब 13 करोड़ है, जो कुल आबादी का 74 प्रतिशत है, और इसे जमात अपनी रणनीति का अहम आधार बना रही है।

हालांकि, जमात का अतीत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बना हुआ है। 1971 के युद्ध अपराधों को लेकर आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग पार्टी के खिलाफ है। इसके अलावा हाल के महीनों में हिंदुओं और सूफी स्थलों पर हुए हमलों ने अल्पसंख्यकों की चिंता बढ़ाई है। जमात ने इन घटनाओं से खुद को अलग बताया है और पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट देने का दावा किया है।

भारत के लिए यह स्थिति खास चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमात के सत्ता में आने से बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ सकता है। पहले से ही भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण दौर में हैं। ऐसे में फरवरी चुनाव न केवल बांग्लादेश की राजनीति, बल्कि दक्षिण एशिया के रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

--------------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
22 Jan 2026 By Nitin Trivedi

बांग्लादेश में बड़ा सियासी मोड़: पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी सत्ता के करीब

अंतराष्ट्रीय न्यूज

ढाका। बांग्लादेश में अगले महीने होने वाले आम चुनाव से पहले राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान समर्थक मानी जाने वाली इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सत्ता के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है। हालिया सर्वेक्षणों में पार्टी देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को कड़ी चुनौती दे रही है।

12 फरवरी को बांग्लादेश की 300 संसदीय सीटों के लिए आम चुनाव होने हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, दिसंबर और जनवरी में कराए गए दो स्वतंत्र सर्वे में जमात-ए-इस्लामी को 29 से 33.6 प्रतिशत तक समर्थन मिला है, जबकि BNP को 33 से 34.7 प्रतिशत मतदाताओं की पसंद बताया गया है। दोनों के बीच अंतर बेहद कम है, जिससे चुनावी मुकाबला रोमांचक और निर्णायक माना जा रहा है।

जमात-ए-इस्लामी का इतिहास बांग्लादेश में विवादों से भरा रहा है। 1971 में पार्टी ने बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया था। आजादी के बाद 1972 में उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसे 1975 में हटाया गया। हालांकि 2013 में अदालत ने पार्टी की विचारधारा को देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ बताते हुए उस पर फिर से चुनावी रोक लगा दी थी। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने यह प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद जमात तेजी से राजनीतिक रूप से सक्रिय हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग पर बैन लगने से बने राजनीतिक शून्य का सबसे ज्यादा फायदा जमात को मिला है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह 179 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान का दावा है कि पार्टी अब टकराव की राजनीति छोड़कर जनकल्याण और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे पर आगे बढ़ रही है। पार्टी बाढ़ राहत, मेडिकल कैंप और सामाजिक सहायता जैसे कार्यक्रमों के जरिए अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है।

जमात युवाओं को साधने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल अभियानों पर भी जोर दे रही है। एक चुनावी गीत, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, के जरिए पार्टी ने खुद को पारंपरिक दलों के विकल्प के रूप में पेश किया है। बांग्लादेश में इंटरनेट यूजर्स की संख्या करीब 13 करोड़ है, जो कुल आबादी का 74 प्रतिशत है, और इसे जमात अपनी रणनीति का अहम आधार बना रही है।

हालांकि, जमात का अतीत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बना हुआ है। 1971 के युद्ध अपराधों को लेकर आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग पार्टी के खिलाफ है। इसके अलावा हाल के महीनों में हिंदुओं और सूफी स्थलों पर हुए हमलों ने अल्पसंख्यकों की चिंता बढ़ाई है। जमात ने इन घटनाओं से खुद को अलग बताया है और पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट देने का दावा किया है।

भारत के लिए यह स्थिति खास चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमात के सत्ता में आने से बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान की ओर बढ़ सकता है। पहले से ही भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण दौर में हैं। ऐसे में फरवरी चुनाव न केवल बांग्लादेश की राजनीति, बल्कि दक्षिण एशिया के रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

--------------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6971e49e7991b/article-43985

खबरें और भी हैं

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

टाप न्यूज

सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

मझौली जनपद पंचायत के विभागीय ग्रुप में सामने आया मैसेज, प्रभारी मंत्री के दौरे से पहले सोशल मीडिया पर वायरल...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
सीधी में वायरल व्हाट्सएप चैट से मचा बवाल, 3 हजार रुपए की मांग पर गरमाई सियासत

रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

प्रयागराज से रीवा लाई जा रही थी 1312 शीशी नशीली कफ सीरप, 19 वर्षीय तस्कर गिरफ्तार, पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस...
मध्य प्रदेश  विंध्य/रीवा 
रीवा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: सोहागी पहाड़ पर घेराबंदी कर पकड़ी अवैध नशीली कफ सीरप की खेप, होंडा सिटी कार सहित लाखों का माल जब्त

ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष...
देश विदेश 
ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है

2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन...
देश विदेश 
2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे

बिजनेस

ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप
एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी...
पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू
शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान
BSNL ने लॉन्च किया सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क भी होगी बातचीत; खरीदने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी
शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी
Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.