छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज में पीजी और इंटर्न छात्रों का आंदोलन गुरुवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। पिछले छह दिनों से लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अब अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले ही दिन कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण हालात बन गए, जब छात्रों ने कॉलेज गेट पर धरना देते हुए डॉक्टरों, मरीजों और कॉलेज स्टाफ की एंट्री पर रोक लगा दी। इसका सीधा असर दंत चिकित्सा सेवाओं पर पड़ा और अधिकांश ओपीडी व उपचार कार्य बाधित हो गए।
छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी कारण उन्हें आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए कॉलेज परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर छात्रों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
हड़ताल के कारण सबसे अधिक परेशानी मरीजों को झेलनी पड़ रही है। कई मरीज बिना इलाज कराए ही लौटने को मजबूर हुए। रायपुर निवासी शिव कुमार महानंद ने बताया कि उनके पिता सड़क दुर्घटना में घायल हुए हैं और उनका जबड़ा टूट गया है। डेंटल कॉलेज में इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन हड़ताल के चलते उपचार नहीं हो सका। ऐसे कई मरीज दिनभर अस्पताल परिसर में भटकते नजर आए।
छात्रों की पहली और प्रमुख मांग स्टाइपेंड में समानता को लेकर है। पीजी और इंटर्न छात्रों का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्रों को समान ड्यूटी, ओपीडी और सर्जिकल जिम्मेदारियों के बावजूद अधिक स्टाइपेंड दिया जाता है, जबकि डेंटल कॉलेज के छात्रों को कम भुगतान मिलता है। उनका आरोप है कि यह स्पष्ट भेदभाव है। छात्र मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड तय करने और इसे पूर्व प्रभाव से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
दूसरा अहम मुद्दा गर्ल्स हॉस्टल की कमी से जुड़ा है। कॉलेज में महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त आवासीय सुविधा नहीं होने के कारण कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहना पड़ता है। इससे न केवल अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बनी रहती हैं। छात्राओं का कहना है कि कॉलेज परिसर में ही अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हड़ताल के चलते कॉलेज के कई विभागों में कुर्सियां खाली रहीं और दंत चिकित्सा सेवाएं लगभग ठप रहीं। छात्रों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, प्रशासन के लिए यह चुनौती बन गई है कि छात्रों की मांगों और मरीजों की जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आने वाले दिनों में रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यह मामला अब केवल छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में सामने आ गया है, जिस पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया जरूरी मानी जा रही है।
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