- Hindi News
- देश विदेश
- बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026: BNP उम्मीदवार की बढ़त
बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026: BNP उम्मीदवार की बढ़त
Sandeep Patel
बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026 में 35 साल बाद पहली बार मुकाबला हो रहा है। BNP के मिर्जा फखरुल और ओली अहमद आमने-सामने हैं।
बांग्लादेश में गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव 2026 के लिए मतदान हो रहा है। यह 35 वर्षों में पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सांसदों के सामने दो उम्मीदवारों के बीच वास्तविक मुकाबला है।
संसद भवन में मतदान का समय स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। चुनाव आयोग की निगरानी में होने वाला यह मतदान हाल के उन चुनावों से अलग है, जिनमें राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए थे।
दो उम्मीदवार मैदान में
राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद आमने-सामने हैं।
चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध घोषित किया था।
78 वर्षीय आलमगीर BNP के उम्मीदवार हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष ओली अहमद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
BNP को संख्यात्मक बढ़त
संसद में सीटों की संख्या के लिहाज से BNP उम्मीदवार को स्पष्ट बढ़त हासिल है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, BNP के पास 247 सांसद, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास 90 सांसद हैं। कुल 349 सांसदों के मतदान में हिस्सा लेने की उम्मीद है। बाकी सदस्य अन्य दलों या निर्दलीय श्रेणी से हैं।
बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 70 के तहत सांसदों पर पार्टी लाइन का पालन करने की बाध्यता है। खुले मतदान की व्यवस्था के साथ यह स्थिति आलमगीर को मजबूत शुरुआती बढ़त देती है।
हालांकि, अंतिम फैसला संसद में डाले गए मतों से ही होगा।
मतदान की प्रक्रिया
राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्येक सांसद के पास एक वोट है। स्पीकर भी मतदान प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन इस चुनाव के निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी काम कर रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि चुनाव को सुचारू रूप से कराने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि दोनों उम्मीदवारों को बराबर वोट मिलते हैं तो विजेता का फैसला लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है।
35 साल बाद मुकाबला
बांग्लादेश में संसदीय व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया 1991 से जुड़ी है।
1996 से 2023 के बीच आठ राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन इनमें से प्रत्येक निर्विरोध निर्वाचित हुआ। इस लिहाज से मौजूदा चुनाव तीन दशक से अधिक समय बाद राष्ट्रपति पद का पहला वास्तविक संसदीय मुकाबला है।
मतदान समाप्त होने के बाद परिणाम घोषित किए जाने की उम्मीद है। आधिकारिक राजपत्र भी उसी दिन जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
राष्ट्रपति पद का इतिहास
बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद की व्यवस्था स्वतंत्रता के बाद कई चरणों से गुजरी है।
10 अप्रैल 1971 को देश की पहली सरकार का गठन हुआ और शेख मुजीबुर रहमान को संस्थापक राष्ट्रपति नामित किया गया। उस समय उनके पाकिस्तान में हिरासत में होने के कारण सैयद नजरुल इस्लाम ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली।
1972 के मूल संविधान में संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने जाने की व्यवस्था थी। बाद में चौथे संशोधन के जरिए देश को राष्ट्रपति प्रणाली की ओर ले जाया गया और राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा होने लगा।
इसके बाद 1978, 1981 और 1986 में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव हुए। बाद में बांग्लादेश फिर संसदीय प्रणाली की ओर लौट गया।
अब आगे क्या होगा
मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद होने वाला यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों से पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा था।
फिलहाल संसद में संख्या बल के कारण BNP उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। लेकिन 35 वर्षों बाद हो रहा यह मुकाबला परिणाम से अलग भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया फिर सामने आई है।
आने वाले घंटों में मतदान और परिणाम पर नजर रहेगी, क्योंकि बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026 के बाद देश को नया राष्ट्रपति मिलने वाला है।
बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026: BNP उम्मीदवार की बढ़त
Sandeep Patel
बांग्लादेश में गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव 2026 के लिए मतदान हो रहा है। यह 35 वर्षों में पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सांसदों के सामने दो उम्मीदवारों के बीच वास्तविक मुकाबला है।
संसद भवन में मतदान का समय स्थानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया है। चुनाव आयोग की निगरानी में होने वाला यह मतदान हाल के उन चुनावों से अलग है, जिनमें राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए थे।
दो उम्मीदवार मैदान में
राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद आमने-सामने हैं।
चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध घोषित किया था।
78 वर्षीय आलमगीर BNP के उम्मीदवार हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष ओली अहमद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
BNP को संख्यात्मक बढ़त
संसद में सीटों की संख्या के लिहाज से BNP उम्मीदवार को स्पष्ट बढ़त हासिल है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, BNP के पास 247 सांसद, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास 90 सांसद हैं। कुल 349 सांसदों के मतदान में हिस्सा लेने की उम्मीद है। बाकी सदस्य अन्य दलों या निर्दलीय श्रेणी से हैं।
बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 70 के तहत सांसदों पर पार्टी लाइन का पालन करने की बाध्यता है। खुले मतदान की व्यवस्था के साथ यह स्थिति आलमगीर को मजबूत शुरुआती बढ़त देती है।
हालांकि, अंतिम फैसला संसद में डाले गए मतों से ही होगा।
मतदान की प्रक्रिया
राष्ट्रपति चुनाव में प्रत्येक सांसद के पास एक वोट है। स्पीकर भी मतदान प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली है। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन इस चुनाव के निर्वाचन अधिकारी के रूप में भी काम कर रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा है कि चुनाव को सुचारू रूप से कराने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यदि दोनों उम्मीदवारों को बराबर वोट मिलते हैं तो विजेता का फैसला लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है।
35 साल बाद मुकाबला
बांग्लादेश में संसदीय व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुनाव की मौजूदा प्रक्रिया 1991 से जुड़ी है।
1996 से 2023 के बीच आठ राष्ट्रपति चुने गए, लेकिन इनमें से प्रत्येक निर्विरोध निर्वाचित हुआ। इस लिहाज से मौजूदा चुनाव तीन दशक से अधिक समय बाद राष्ट्रपति पद का पहला वास्तविक संसदीय मुकाबला है।
मतदान समाप्त होने के बाद परिणाम घोषित किए जाने की उम्मीद है। आधिकारिक राजपत्र भी उसी दिन जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
राष्ट्रपति पद का इतिहास
बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद की व्यवस्था स्वतंत्रता के बाद कई चरणों से गुजरी है।
10 अप्रैल 1971 को देश की पहली सरकार का गठन हुआ और शेख मुजीबुर रहमान को संस्थापक राष्ट्रपति नामित किया गया। उस समय उनके पाकिस्तान में हिरासत में होने के कारण सैयद नजरुल इस्लाम ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली।
1972 के मूल संविधान में संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने जाने की व्यवस्था थी। बाद में चौथे संशोधन के जरिए देश को राष्ट्रपति प्रणाली की ओर ले जाया गया और राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा होने लगा।
इसके बाद 1978, 1981 और 1986 में प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव हुए। बाद में बांग्लादेश फिर संसदीय प्रणाली की ओर लौट गया।
अब आगे क्या होगा
मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद होने वाला यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाहाबुद्दीन ने स्वास्थ्य कारणों से पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ा था।
फिलहाल संसद में संख्या बल के कारण BNP उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की स्थिति मजबूत दिखाई देती है। लेकिन 35 वर्षों बाद हो रहा यह मुकाबला परिणाम से अलग भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव की प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया फिर सामने आई है।
आने वाले घंटों में मतदान और परिणाम पर नजर रहेगी, क्योंकि बांग्लादेश राष्ट्रपति चुनाव 2026 के बाद देश को नया राष्ट्रपति मिलने वाला है।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
