उज्जैन: महाकाल मंदिर के पास स्थित 65 साल पुरानी जर्जर परचुरे बिल्डिंग को 60 मिनट में ढहाया गया

Digital desk

उज्जैन महाकाल मंदिर के सामने स्थित 65 साल पुराने जर्जर परचुरे भवन को हाईकोर्ट के आदेश और MANIT रिपोर्ट के बाद शयन आरती के बाद ढहा दिया गया।

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के सामने स्थित लगभग 65 साल पुरानी जर्जर इमारत को बुधवार देर रात शयन आरती के बाद ढहा दिया गया। नगर निगम की टीम ने रात करीब 11 बजे ध्वस्तीकरण (डेमोलिशन) की कार्रवाई शुरू की और उच्च न्यायालय (High Court) के आदेश का पालन करते हुए महज 60 मिनट के भीतर पूरी इमारत को जमींदोज कर दिया।

'परचुरे भवन' के नाम से जानी जाने वाली यह इमारत ढांचागत रूप से काफी जर्जर और असुरक्षित हो चुकी थी। प्रशासन ने इससे पहले मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल की तकनीकी टीम से इमारत की स्थिति का आकलन कराया था।

इमारत असुरक्षित घोषित

उज्जैन नगर निगम के कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय ने बताया कि यह भवन लगभग 60 से 65 वर्ष पुराना था और यह आरसीसी (RCC) संरचना पर आधारित नहीं था। यह बिना पक्की नींव की खुली संरचना पर टिका था और समय के साथ इसकी स्थिति बहुत खराब हो गई थी।

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कार्रवाई से पहले भवन को पूरी तरह खाली करा लिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीमों ने जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर ढाँचे को गिराया। श्रद्धालुओं की आवाजाही में कोई बाधा न आए और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसलिए यह कार्रवाई रात में शयन आरती संपन्न होने के बाद की गई।

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MANIT की रिपोर्ट में सामने आईं कमियाँ

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MANIT की तकनीकी रिपोर्ट में भवन में कई गंभीर कमियों को उजागर किया गया था:

  • भार उठाने वाली दीवारों का बाहर की ओर झुकना।

  • दीवारों में बड़े और गहरे क्रैक्स (दरारें) होना।

  • लोहे के सहायक गर्डरों में जंग लगना।

  • छत और पुरानी पारंपरिक छत प्रणाली का पूरी तरह जर्जर होना।

  • सीढ़ियों का क्षतिग्रस्त होना और जगह-जगह भारी सीलन।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वाले इलाके में इस असुरक्षित इमारत का बने रहना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

भीड़ के दबाव से था हादसे का खतरा

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह स्थान धार्मिक आयोजनों और महाकाल की सवारी के दौरान अत्यधिक भीड़भाड़ वाला हो जाता है। ऐसे मौकों पर लोग अक्सर पुरानी इमारतों की छतों या ऊपरी मंजिलों पर चढ़ जाते हैं। पहले से कमजोर हो चुके इस भवन पर अतिरिक्त भार पड़ने से गंभीर दुर्घटना का जोखिम था, जिसे देखते हुए इसे हटाना बेहद जरूरी हो गया था।

महाकाल मंदिर विस्तार से जुड़ा कदम

यह G+1 (भूखंड + एक मंजिल) इमारत लगभग 1,200 से 1,500 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैली हुई थी। इस ध्वस्तीकरण को महाकाल मंदिर परिसर के द्वितीय चरण के विस्तार और सौंदर्यीकरण कार्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बुनियादी ढाँचे और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने का काम लगातार जारी है। मंदिर के आस-पास की जर्जर इमारतों को हटाना सार्वजनिक सुरक्षा और सुचारू दर्शन व्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

 

www.dainikjagranmpcg.com
20 Aug 2026 By दैनिक जागरण

उज्जैन: महाकाल मंदिर के पास स्थित 65 साल पुरानी जर्जर परचुरे बिल्डिंग को 60 मिनट में ढहाया गया

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उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के सामने स्थित लगभग 65 साल पुरानी जर्जर इमारत को बुधवार देर रात शयन आरती के बाद ढहा दिया गया। नगर निगम की टीम ने रात करीब 11 बजे ध्वस्तीकरण (डेमोलिशन) की कार्रवाई शुरू की और उच्च न्यायालय (High Court) के आदेश का पालन करते हुए महज 60 मिनट के भीतर पूरी इमारत को जमींदोज कर दिया।

'परचुरे भवन' के नाम से जानी जाने वाली यह इमारत ढांचागत रूप से काफी जर्जर और असुरक्षित हो चुकी थी। प्रशासन ने इससे पहले मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT), भोपाल की तकनीकी टीम से इमारत की स्थिति का आकलन कराया था।

इमारत असुरक्षित घोषित

उज्जैन नगर निगम के कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय ने बताया कि यह भवन लगभग 60 से 65 वर्ष पुराना था और यह आरसीसी (RCC) संरचना पर आधारित नहीं था। यह बिना पक्की नींव की खुली संरचना पर टिका था और समय के साथ इसकी स्थिति बहुत खराब हो गई थी।

कार्रवाई से पहले भवन को पूरी तरह खाली करा लिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीमों ने जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर ढाँचे को गिराया। श्रद्धालुओं की आवाजाही में कोई बाधा न आए और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसलिए यह कार्रवाई रात में शयन आरती संपन्न होने के बाद की गई।

MANIT की रिपोर्ट में सामने आईं कमियाँ

MANIT की तकनीकी रिपोर्ट में भवन में कई गंभीर कमियों को उजागर किया गया था:

  • भार उठाने वाली दीवारों का बाहर की ओर झुकना।

  • दीवारों में बड़े और गहरे क्रैक्स (दरारें) होना।

  • लोहे के सहायक गर्डरों में जंग लगना।

  • छत और पुरानी पारंपरिक छत प्रणाली का पूरी तरह जर्जर होना।

  • सीढ़ियों का क्षतिग्रस्त होना और जगह-जगह भारी सीलन।

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ वाले इलाके में इस असुरक्षित इमारत का बने रहना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

भीड़ के दबाव से था हादसे का खतरा

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह स्थान धार्मिक आयोजनों और महाकाल की सवारी के दौरान अत्यधिक भीड़भाड़ वाला हो जाता है। ऐसे मौकों पर लोग अक्सर पुरानी इमारतों की छतों या ऊपरी मंजिलों पर चढ़ जाते हैं। पहले से कमजोर हो चुके इस भवन पर अतिरिक्त भार पड़ने से गंभीर दुर्घटना का जोखिम था, जिसे देखते हुए इसे हटाना बेहद जरूरी हो गया था।

महाकाल मंदिर विस्तार से जुड़ा कदम

यह G+1 (भूखंड + एक मंजिल) इमारत लगभग 1,200 से 1,500 वर्ग फीट के क्षेत्र में फैली हुई थी। इस ध्वस्तीकरण को महाकाल मंदिर परिसर के द्वितीय चरण के विस्तार और सौंदर्यीकरण कार्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बुनियादी ढाँचे और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने का काम लगातार जारी है। मंदिर के आस-पास की जर्जर इमारतों को हटाना सार्वजनिक सुरक्षा और सुचारू दर्शन व्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

 

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