अजित पवार का निधन: बारामती एयरपोर्ट पर प्लेन क्रैश में डिप्टी सीएम सहित सभी 5 की मौत

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अजित पवार का निधन महाराष्ट्र और भारतीय राजनीति में एक बड़ा झटका है। उनके राजनीतिक फैसले, परिवार के साथ रिश्ते और विवादित कदम उन्हें एक जटिल लेकिन प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करते हैं।

महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान प्लेन क्रैश में निधन हो गया। इस हादसे में उनके साथ विमान में सवार सभी 5 लोग मारे गए।

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ। वे NCP प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं और राजनीतिक करियर की शुरुआत अपने चाचा के पर्सनल सेक्रेटरी के रूप में की थी। अजित ने महाराष्ट्र के बारामती से पढ़ाई की और शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर से स्नातक की डिग्री हासिल की।

राजनीतिक करियर
अजित पवार ने 1982 में को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री बोर्ड से राजनीति शुरू की। 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक पद संभाला। 1991 में पहली बार बारामती से सांसद बने, लेकिन उपचुनाव में शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। 1995 से 2014 तक बारामती विधानसभा से लगातार विधायक रहे।

डिप्टी सीएम और बगावत
अजित पवार ने महाराष्ट्र में छह बार डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। उनकी राजनीतिक छवि में कई विवाद भी रहे। 2019 में उन्होंने अचानक बैठक के दौरान पाला बदल कर विपक्षी दल में जाने की कोशिश की, जिससे सत्ता समीकरण बदल गया। कुछ समय बाद उन्होंने वापसी की और NCP में लौट आए।

पारिवारिक और विवादित पहलू
अजित पवार की बहन सुप्रिया सुले और पत्नी सुनेत्रा पवार के बीच चुनावी टकराव की खबरें भी सामने आईं। 2024 में लोकसभा चुनाव में उन्होंने पत्नी को बहन के खिलाफ मैदान में उतारा, लेकिन सुनेत्रा हार गईं। अजित पवार पर 1999–2009 तक सिंचाई परियोजनाओं में 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप भी लगा।

राजनीतिक शैली और विवाद
अजित पवार को कभी भी बोलने से नहीं रोकते थे। उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए, जैसे 2013 में कहा था कि “अगर बांध में पानी नहीं है तो पेशाब करके भर दें।” बाद में उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी।

अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर में परिवार और पार्टी दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा। 2023–24 में उन्होंने एनसीपी में पूरी तरह पकड़ मजबूत की और पार्टी पर प्रभाव बनाए रखा।

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