दुर्ग रेंज में पुलिसिंग को लेकर सख्त तेवर: IG शांडिल्य ने पहली बैठक में दिए कड़े निर्देश

दुर्ग (छ.ग.)

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चार्ज संभालते ही नए आईजी ने थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की, गंभीर अपराधों में टीआई को खुद एफआईआर दर्ज करने और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के आदेश

दुर्ग रेंज के नवपदस्थ पुलिस महानिरीक्षक (IG) अभिषेक शांडिल्य ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद पुलिस व्यवस्था को कसने के संकेत दे दिए हैं। मंगलवार को उन्होंने पुलिस नियंत्रण कक्ष, दुर्ग में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों, थाना और चौकी प्रभारियों की पहली समीक्षा बैठक ली। बैठक में अपराध नियंत्रण, लंबित प्रकरणों, वित्तीय धोखाधड़ी और थानों की जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए।

आईजी शांडिल्य ने कहा कि थानों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसिंग अनुशासन, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ होनी चाहिए। आम जनता का भरोसा पुलिस की कार्यशैली से जुड़ा होता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही से विभाग की छवि प्रभावित होती है।

बैठक में आईजी ने सभी अधिकारियों से परिचय लेते हुए जिले की मौजूदा कानून-व्यवस्था और अपराध की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों की गतिविधियों, आचरण और कार्यप्रणाली पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि थानों की कार्यसंस्कृति में सुधार लाना प्राथमिकता है।

वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को लेकर आईजी ने विशेष चिंता जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि लुभावने विज्ञापनों, निवेश योजनाओं और संदिग्ध कंपनियों के माध्यम से ठगी करने वालों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाए। थाना स्तर पर ऐसे मामलों की सक्रिय निगरानी करते हुए समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

गंभीर अपराधों में एफआईआर को लेकर आईजी शांडिल्य ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संपत्ति और शरीर से जुड़े गंभीर अपराधों, विशेषकर आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में थाना प्रभारी स्वयं एफआईआर दर्ज करेंगे। किसी भी प्रकार की देरी, टालमटोल या जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लंबित मामलों को लेकर भी बैठक में स्पष्ट समय-सीमा तय की गई। आईजी ने निर्देश दिए कि थानों में दर्ज पुराने प्रकरणों, खासकर एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाए। नए प्रावधानों के तहत दर्ज मामलों को 60 से 90 दिनों की निर्धारित अवधि में निपटाने पर जोर दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान पुलिस की जवाबदेही को दर्शाता है और इससे जनता का विश्वास मजबूत होता है। बैठक में यह संदेश भी दिया गया कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी है।

बैठक में उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मणीशंकर चंद्रा सहित जिले के सभी राजपत्रित अधिकारी, थाना एवं चौकी प्रभारी उपस्थित रहे। अधिकारियों का कहना है कि नए आईजी के निर्देशों से आने वाले दिनों में पुलिसिंग की कार्यशैली में सख्ती और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

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