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अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी बनाने वाला बिल पारित
नेशनल न्यूज
लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 वॉयस वोट से पास किया; FCRA संशोधन बिल पर विपक्ष ने किया हंगामा
लोकसभा ने बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को वॉयस वोट से पारित कर दिया। इस बिल के जरिए अमरावती को राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा मिलेगा। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिल पेश किया और एक घंटे से अधिक बहस के बाद इसे मंजूरी दी गई।
विरोध और हंगामा
बिल पेश होने से पहले, विपक्षी सांसदों ने विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन बिल को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने "FCRA बिल वापस लो" के नारे लगाए। स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा जारी रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि आज FCRA बिल पर बहस नहीं होगी।
विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह बिल अल्पसंख्यकों और NGO के खिलाफ टारगेटेड है, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार से PM CARES और चुनावी बॉन्ड से मिले फंड पर जवाब देने की मांग की।
FCRA संशोधन बिल: क्या है मुख्य प्रावधान?
FCRA संशोधन बिल विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को सख्त और स्पष्ट करता है। इसमें यह प्रावधान है कि जिन NGO का पंजीकरण समाप्त होता है, उनके विदेशी फंड और संपत्ति के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे NGO की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जबकि विपक्ष इसे संविधान विरोधी और मनमाना कानून मानता है।
अमरावती बिल पर बहस
अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने वाले बिल पर अधिकांश दलों ने समर्थन जताया, लेकिन YSR कांग्रेस पार्टी ने वॉकआउट किया। पार्टी का कहना था कि किसानों से किए गए वादों की समयसीमा बिल में स्पष्ट नहीं है। BJP ने YSRCP पर दोहरे रुख का आरोप लगाया। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि किसानों ने उत्साहपूर्वक अपनी जमीन अमरावती के लिए दी, जिसमें महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरावती बिल पास होने से राज्य प्रशासन में स्थिरता आएगी और राजधानी की पहचान कानूनी रूप से सुनिश्चित होगी। वहीं, FCRA बिल पर जारी विरोध से यह स्पष्ट है कि NGO और अल्पसंख्यक मुद्दों पर संसद में व्यापक बहस की आवश्यकता है।
लोकसभा की कार्यवाही में विपक्ष के हंगामे और FCRA बिल विरोध के बीच, सरकार ने अपने प्रस्तावित बदलावों को लागू करने का रास्ता साफ किया है। अब दोनों बिल राज्य और केंद्र के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं।
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अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी बनाने वाला बिल पारित
नेशनल न्यूज
लोकसभा ने बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल, 2026 को वॉयस वोट से पारित कर दिया। इस बिल के जरिए अमरावती को राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी का कानूनी दर्जा मिलेगा। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिल पेश किया और एक घंटे से अधिक बहस के बाद इसे मंजूरी दी गई।
विरोध और हंगामा
बिल पेश होने से पहले, विपक्षी सांसदों ने विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन बिल को लेकर हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने "FCRA बिल वापस लो" के नारे लगाए। स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से शांत रहने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा जारी रहा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि आज FCRA बिल पर बहस नहीं होगी।
विपक्षी सांसदों ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह बिल अल्पसंख्यकों और NGO के खिलाफ टारगेटेड है, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार से PM CARES और चुनावी बॉन्ड से मिले फंड पर जवाब देने की मांग की।
FCRA संशोधन बिल: क्या है मुख्य प्रावधान?
FCRA संशोधन बिल विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को सख्त और स्पष्ट करता है। इसमें यह प्रावधान है कि जिन NGO का पंजीकरण समाप्त होता है, उनके विदेशी फंड और संपत्ति के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इससे NGO की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, जबकि विपक्ष इसे संविधान विरोधी और मनमाना कानून मानता है।
अमरावती बिल पर बहस
अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने वाले बिल पर अधिकांश दलों ने समर्थन जताया, लेकिन YSR कांग्रेस पार्टी ने वॉकआउट किया। पार्टी का कहना था कि किसानों से किए गए वादों की समयसीमा बिल में स्पष्ट नहीं है। BJP ने YSRCP पर दोहरे रुख का आरोप लगाया। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री चंद्र शेखर पेम्मासानी ने कहा कि किसानों ने उत्साहपूर्वक अपनी जमीन अमरावती के लिए दी, जिसमें महिलाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरावती बिल पास होने से राज्य प्रशासन में स्थिरता आएगी और राजधानी की पहचान कानूनी रूप से सुनिश्चित होगी। वहीं, FCRA बिल पर जारी विरोध से यह स्पष्ट है कि NGO और अल्पसंख्यक मुद्दों पर संसद में व्यापक बहस की आवश्यकता है।
लोकसभा की कार्यवाही में विपक्ष के हंगामे और FCRA बिल विरोध के बीच, सरकार ने अपने प्रस्तावित बदलावों को लागू करने का रास्ता साफ किया है। अब दोनों बिल राज्य और केंद्र के प्रशासनिक और सामाजिक ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं।
