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खाद्य निगम की परामर्शदात्री समिति में डॉ. अनिल जैन नामित
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प्रख्यात योग गुरु, समाजसेवी और जन स्वास्थ्य प्रवर्तक डॉ. अनिल जैन को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) की परामर्शदात्री समिति का सदस्य नामित किया गया है। खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। उनका कार्यकाल दो वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
डॉ. अनिल जैन लंबे समय से सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, कृषि और विभिन्न संस्थागत गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे जैन आरोग्य नेचुरोकेयर वेलफेयर सोसायटी (JANWS) के अध्यक्ष हैं। संस्था के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, योग कार्यक्रम, प्राकृतिक चिकित्सा जागरूकता अभियान तथा जरूरतमंद वर्गों के लिए विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।
सरकारी एवं संस्थागत स्तर पर भी डॉ. जैन को व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के बोर्ड सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति, गुवाहाटी एयरपोर्ट की एयरपोर्ट सलाहकार समिति, रेल मंत्रालय की जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी, ग्रामीण विकास मंत्रालय की दिशा मॉनिटरिंग कमेटी और संचार मंत्रालय की टेलीकॉम सलाहकार समिति में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
कृषि उत्पादों, खाद्य तेल, उर्वरक, रसायन, पैकेजिंग और कृषि संबंधी व्यापार के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक के अनुभव के चलते डॉ. जैन को कृषि बाजार, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और किसानों तथा उपभोक्ताओं से जुड़े विषयों की अच्छी समझ है।

योग और प्राकृतिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान करीब 22 हजार फीट की ऊंचाई पर 88 से अधिक योगासनों का प्रदर्शन कर उन्होंने योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
सामाजिक क्षेत्र में डॉ. जैन महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण, वृक्षारोपण, गंगा-यमुना स्वच्छता, शिक्षा और आपदा राहत जैसे कार्यों से जुड़े रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने राहत एवं मानवीय गतिविधियों में योगदान दिया।
स्वास्थ्य, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित ‘दूध विष या अमृत’ और ‘Healing with Nature’ सहित कई पुस्तकों के लेखक डॉ. जैन को सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, हिंदी भाषा के प्रचार और जनकल्याण के क्षेत्र में विभिन्न सम्मान भी मिल चुके हैं।
FCI की परामर्शदात्री समिति में उनका नामांकन उनके कृषि, खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के लंबे अनुभव के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति में उनकी भूमिका से खाद्यान्न प्रबंधन, कृषि हितों, खाद्य वितरण व्यवस्था तथा किसानों और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं को उपयोगी दिशा मिलने की उम्मीद है। उनके नामांकन पर सामाजिक, व्यावसायिक और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी है।
खाद्य निगम की परामर्शदात्री समिति में डॉ. अनिल जैन नामित
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डॉ. अनिल जैन लंबे समय से सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, कृषि और विभिन्न संस्थागत गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे जैन आरोग्य नेचुरोकेयर वेलफेयर सोसायटी (JANWS) के अध्यक्ष हैं। संस्था के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, योग कार्यक्रम, प्राकृतिक चिकित्सा जागरूकता अभियान तथा जरूरतमंद वर्गों के लिए विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियां संचालित की जाती हैं।
सरकारी एवं संस्थागत स्तर पर भी डॉ. जैन को व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के बोर्ड सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति, गुवाहाटी एयरपोर्ट की एयरपोर्ट सलाहकार समिति, रेल मंत्रालय की जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी, ग्रामीण विकास मंत्रालय की दिशा मॉनिटरिंग कमेटी और संचार मंत्रालय की टेलीकॉम सलाहकार समिति में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
कृषि उत्पादों, खाद्य तेल, उर्वरक, रसायन, पैकेजिंग और कृषि संबंधी व्यापार के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक के अनुभव के चलते डॉ. जैन को कृषि बाजार, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और किसानों तथा उपभोक्ताओं से जुड़े विषयों की अच्छी समझ है।

योग और प्राकृतिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान करीब 22 हजार फीट की ऊंचाई पर 88 से अधिक योगासनों का प्रदर्शन कर उन्होंने योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
सामाजिक क्षेत्र में डॉ. जैन महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण, वृक्षारोपण, गंगा-यमुना स्वच्छता, शिक्षा और आपदा राहत जैसे कार्यों से जुड़े रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने राहत एवं मानवीय गतिविधियों में योगदान दिया।
स्वास्थ्य, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित ‘दूध विष या अमृत’ और ‘Healing with Nature’ सहित कई पुस्तकों के लेखक डॉ. जैन को सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, हिंदी भाषा के प्रचार और जनकल्याण के क्षेत्र में विभिन्न सम्मान भी मिल चुके हैं।
FCI की परामर्शदात्री समिति में उनका नामांकन उनके कृषि, खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के लंबे अनुभव के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति में उनकी भूमिका से खाद्यान्न प्रबंधन, कृषि हितों, खाद्य वितरण व्यवस्था तथा किसानों और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं को उपयोगी दिशा मिलने की उम्मीद है। उनके नामांकन पर सामाजिक, व्यावसायिक और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी है।
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