ब्रेन ट्यूमर: समय पर पहचान और आधुनिक इलाज से बढ़ती उम्मीदें

Digital Desk

डॉक्टर प्रोफेसर राहुल गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन, विभाग अध्यक्ष, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा

प्रश्न: आजकल ब्रेन ट्यूमर के मामले ज्यादा क्यों दिखाई दे रहे हैं?

ब्रेन ट्यूमर के केस पहले भी होते थे, लेकिन अब जागरूकता, बेहतर जांच तकनीक और एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाओं के कारण अधिक मामलों का पता चल रहा है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, बढ़ता तनाव, कुछ जेनेटिक कारण और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई एक निश्चित कारण नहीं मिला है जिसे सीधे ब्रेन ट्यूमर का मुख्य कारण कहा जा सके।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर मस्तिष्क के किस हिस्से में है। आमतौर पर मरीजों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • लगातार सिरदर्द रहना

  • सुबह के समय ज्यादा उल्टी या मतली होना

  • दौरे पड़ना

  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवे जैसी शिकायत

  • नजर कमजोर होना या धुंधला दिखना

  • सुनाई देने में दिक्कत

  • बोलने या समझने में परेशानी

  • व्यवहार में बदलाव या भूलने की समस्या

हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर का सही डायग्नोसिस कैसे होता है?

सबसे महत्वपूर्ण जांच एमआरआई (MRI) है। अच्छी गुणवत्ता वाली एमआरआई लगभग 99 प्रतिशत मामलों में ब्रेन ट्यूमर की पहचान कर सकती है। आधुनिक एमआरआई मशीनों में विशेष सीक्वेंस होते हैं जिनसे यह पता चलता है कि—

  • ट्यूमर का आकार कितना है

  • वह कितनी गहराई तक फैला है

  • उसका प्रकार क्या हो सकता है

  • सर्जरी किस तरह की जानी चाहिए

समय पर एमआरआई कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर से पहचान होने पर इलाज जटिल हो सकता है।

प्रश्न: क्या हर ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन जरूरी होता है?

नहीं, हर केस अलग होता है। कुछ ट्यूमर छोटे होते हैं और केवल निगरानी या दवाइयों से नियंत्रित किए जा सकते हैं। लेकिन कई मामलों में सर्जरी जरूरी होती है ताकि ट्यूमर को हटाया जा सके और मरीज की जान बचाई जा सके। निर्णय मरीज की उम्र, ट्यूमर की स्थिति और उसकी प्रकृति को देखकर लिया जाता है।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में अनुभवी न्यूरोसर्जन का कितना महत्व है?

ब्रेन शरीर का सबसे संवेदनशील अंग है। सर्जरी के दौरान यदि मस्तिष्क का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हो जाए तो मरीज को बोलने, चलने या देखने में स्थायी दिक्कत हो सकती है। इसलिए ब्रेन ट्यूमर सर्जरी हमेशा अनुभवी न्यूरोसर्जन और आधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल में ही करानी चाहिए।

प्रश्न: आधुनिक तकनीकें ब्रेन ट्यूमर सर्जरी को कैसे सुरक्षित बना रही हैं?

पिछले दो दशकों में ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में काफी प्रगति हुई है। आज कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं जो सर्जरी को ज्यादा सुरक्षित और सफल बनाती हैं।

1. ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप

यह माइक्रोस्कोप मस्तिष्क के बेहद छोटे हिस्सों को भी स्पष्ट दिखाता है। इससे डॉक्टर केवल ट्यूमर को हटाते हैं और सामान्य ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं।

2. ट्यूमर फ्लोरोसेंस तकनीक

इस तकनीक में मरीज को एक विशेष डाई दी जाती है जो ट्यूमर सेल्स में जमा हो जाती है। ऑपरेशन के दौरान विशेष लेंस से ट्यूमर चमकता हुआ दिखाई देता है, जिससे केवल खराब कोशिकाओं को निकालना आसान हो जाता है।

3. न्यूरोनेविगेशन सिस्टम

यह तकनीक ब्रेन सर्जरी में जीपीएस की तरह काम करती है। इससे ट्यूमर की सटीक लोकेशन पता चलती है और छोटे चीरे के जरिए सर्जरी संभव हो पाती है। इससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी रिकवर करता है।

4. न्यूरोमॉनिटरिंग और अवेक क्रैनियोटॉमी

कुछ जटिल मामलों में मरीज को हल्की जागी हुई अवस्था में रखकर सर्जरी की जाती है। इससे डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान यह सुनिश्चित करते हैं कि मरीज की बोलने, समझने या शरीर चलाने की क्षमता सुरक्षित रहे।

प्रश्न: एनेस्थीसिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है?

ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका बेहद अहम होती है। आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों के कारण अब ऑपरेशन के दौरान ब्रेन स्वेलिंग जैसी समस्याएं काफी कम हो गई हैं। इससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और सफल होती है।

प्रश्न: क्या छोटे चीरे से भी बड़े ट्यूमर निकाले जा सकते हैं?

जी हां। आधुनिक न्यूरोनेविगेशन और माइक्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से अब छोटे चीरे और कम हड्डी हटाकर भी बड़े ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाले जा सकते हैं। इसे मिनिमली इनवेसिव ब्रेन सर्जरी कहा जाता है।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए लोगों को क्या सलाह देंगे?

  • लगातार सिरदर्द या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज न करें

  • समय पर न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से सलाह लें

  • जरूरत पड़ने पर एमआरआई अवश्य कराएं

  • इंटरनेट या घरेलू इलाज पर निर्भर न रहें

  • इलाज हमेशा अनुभवी विशेषज्ञ और आधुनिक अस्पताल में कराएं

ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं, लेकिन आज आधुनिक तकनीक, बेहतर एमआरआई, माइक्रोस्कोपिक सर्जरी, न्यूरोनेविगेशन और अनुभवी न्यूरोसर्जनों की मदद से इसका इलाज पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और सफल हो चुका है। सबसे जरूरी है — समय पर पहचान और सही इलाज।

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08 Jun 2026 By दैनिक जागरण

ब्रेन ट्यूमर: समय पर पहचान और आधुनिक इलाज से बढ़ती उम्मीदें

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प्रश्न: आजकल ब्रेन ट्यूमर के मामले ज्यादा क्यों दिखाई दे रहे हैं?

ब्रेन ट्यूमर के केस पहले भी होते थे, लेकिन अब जागरूकता, बेहतर जांच तकनीक और एमआरआई जैसी आधुनिक सुविधाओं के कारण अधिक मामलों का पता चल रहा है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, बढ़ता तनाव, कुछ जेनेटिक कारण और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भी इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई एक निश्चित कारण नहीं मिला है जिसे सीधे ब्रेन ट्यूमर का मुख्य कारण कहा जा सके।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर मस्तिष्क के किस हिस्से में है। आमतौर पर मरीजों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • लगातार सिरदर्द रहना

  • सुबह के समय ज्यादा उल्टी या मतली होना

  • दौरे पड़ना

  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवे जैसी शिकायत

  • नजर कमजोर होना या धुंधला दिखना

  • सुनाई देने में दिक्कत

  • बोलने या समझने में परेशानी

  • व्यवहार में बदलाव या भूलने की समस्या

हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर नहीं होता, लेकिन यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर का सही डायग्नोसिस कैसे होता है?

सबसे महत्वपूर्ण जांच एमआरआई (MRI) है। अच्छी गुणवत्ता वाली एमआरआई लगभग 99 प्रतिशत मामलों में ब्रेन ट्यूमर की पहचान कर सकती है। आधुनिक एमआरआई मशीनों में विशेष सीक्वेंस होते हैं जिनसे यह पता चलता है कि—

  • ट्यूमर का आकार कितना है

  • वह कितनी गहराई तक फैला है

  • उसका प्रकार क्या हो सकता है

  • सर्जरी किस तरह की जानी चाहिए

समय पर एमआरआई कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर से पहचान होने पर इलाज जटिल हो सकता है।

प्रश्न: क्या हर ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन जरूरी होता है?

नहीं, हर केस अलग होता है। कुछ ट्यूमर छोटे होते हैं और केवल निगरानी या दवाइयों से नियंत्रित किए जा सकते हैं। लेकिन कई मामलों में सर्जरी जरूरी होती है ताकि ट्यूमर को हटाया जा सके और मरीज की जान बचाई जा सके। निर्णय मरीज की उम्र, ट्यूमर की स्थिति और उसकी प्रकृति को देखकर लिया जाता है।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में अनुभवी न्यूरोसर्जन का कितना महत्व है?

ब्रेन शरीर का सबसे संवेदनशील अंग है। सर्जरी के दौरान यदि मस्तिष्क का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हो जाए तो मरीज को बोलने, चलने या देखने में स्थायी दिक्कत हो सकती है। इसलिए ब्रेन ट्यूमर सर्जरी हमेशा अनुभवी न्यूरोसर्जन और आधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल में ही करानी चाहिए।

प्रश्न: आधुनिक तकनीकें ब्रेन ट्यूमर सर्जरी को कैसे सुरक्षित बना रही हैं?

पिछले दो दशकों में ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में काफी प्रगति हुई है। आज कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं जो सर्जरी को ज्यादा सुरक्षित और सफल बनाती हैं।

1. ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप

यह माइक्रोस्कोप मस्तिष्क के बेहद छोटे हिस्सों को भी स्पष्ट दिखाता है। इससे डॉक्टर केवल ट्यूमर को हटाते हैं और सामान्य ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुंचने से बचाते हैं।

2. ट्यूमर फ्लोरोसेंस तकनीक

इस तकनीक में मरीज को एक विशेष डाई दी जाती है जो ट्यूमर सेल्स में जमा हो जाती है। ऑपरेशन के दौरान विशेष लेंस से ट्यूमर चमकता हुआ दिखाई देता है, जिससे केवल खराब कोशिकाओं को निकालना आसान हो जाता है।

3. न्यूरोनेविगेशन सिस्टम

यह तकनीक ब्रेन सर्जरी में जीपीएस की तरह काम करती है। इससे ट्यूमर की सटीक लोकेशन पता चलती है और छोटे चीरे के जरिए सर्जरी संभव हो पाती है। इससे दर्द कम होता है और मरीज जल्दी रिकवर करता है।

4. न्यूरोमॉनिटरिंग और अवेक क्रैनियोटॉमी

कुछ जटिल मामलों में मरीज को हल्की जागी हुई अवस्था में रखकर सर्जरी की जाती है। इससे डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान यह सुनिश्चित करते हैं कि मरीज की बोलने, समझने या शरीर चलाने की क्षमता सुरक्षित रहे।

प्रश्न: एनेस्थीसिया की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है?

ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम की भूमिका बेहद अहम होती है। आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीकों के कारण अब ऑपरेशन के दौरान ब्रेन स्वेलिंग जैसी समस्याएं काफी कम हो गई हैं। इससे सर्जरी अधिक सुरक्षित और सफल होती है।

प्रश्न: क्या छोटे चीरे से भी बड़े ट्यूमर निकाले जा सकते हैं?

जी हां। आधुनिक न्यूरोनेविगेशन और माइक्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से अब छोटे चीरे और कम हड्डी हटाकर भी बड़े ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाले जा सकते हैं। इसे मिनिमली इनवेसिव ब्रेन सर्जरी कहा जाता है।

प्रश्न: ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए लोगों को क्या सलाह देंगे?

  • लगातार सिरदर्द या न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज न करें

  • समय पर न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन से सलाह लें

  • जरूरत पड़ने पर एमआरआई अवश्य कराएं

  • इंटरनेट या घरेलू इलाज पर निर्भर न रहें

  • इलाज हमेशा अनुभवी विशेषज्ञ और आधुनिक अस्पताल में कराएं

ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं, लेकिन आज आधुनिक तकनीक, बेहतर एमआरआई, माइक्रोस्कोपिक सर्जरी, न्यूरोनेविगेशन और अनुभवी न्यूरोसर्जनों की मदद से इसका इलाज पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और सफल हो चुका है। सबसे जरूरी है — समय पर पहचान और सही इलाज।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/growing-expectations-from-timely-detection-and-modern-treatment-of-brain/article-55310

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