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बच्चे को ले जाने के विवाद में साले की हत्या, जीजा को उम्रकैद
रायगढ़,(छ.ग.)
रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद ने लिया खूनी मोड़, अदालत ने हत्या के दोषी जीजा को सुनाई आजीवन कारावास की सजा
रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हत्या का मामला करीब तीन साल बाद अदालत के फैसले के साथ अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया। बच्चे को जबरन अपने साथ ले जाने के दौरान हुए विवाद में बड़े साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है और मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा की है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था क्योंकि घटना परिवार के सदस्यों के सामने हुई थी और विवाद की वजह एक साल का मासूम बच्चा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की शुरुआत पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक मतभेदों से हुई थी। ग्राम मुनुंद निवासी दाताराम सारथी की शादी उर्मिला सारथी से हुई थी, लेकिन दोनों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ था। बताया गया कि आपसी विवाद के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया और वह अपने बच्चे के साथ मायके में ही रह रही थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं थे और कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। घटना 1 मई 2022 की शाम की है। बताया जाता है कि दाताराम सारथी अपने ससुराल पहुंचा और वहां मौजूद अपने एक साल के बेटे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। आरोप है कि उसने बच्चे को जबरन अपनी पत्नी से छीन लिया और उसे लेकर जाने लगा। उस समय उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने उसे रोकने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बच्चे को लेकर वह मुख्य सड़क की ओर बढ़ गया। इसी बीच परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बात की जानकारी मिली और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब दाताराम बच्चे को लेकर जा रहा था, तभी उसका बड़ा साला महेश सारथी वहां पहुंचा। महेश ने उसे रोकने का प्रयास किया और बच्चे को जबरन ले जाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि गुस्से में आकर दाताराम ने अपने पास मौजूद चाकू निकाल लिया और महेश सारथी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू के वार महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महेश जमीन पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी, बहन और बेटी के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। परिवार के सदस्यों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा और घर में मातम का माहौल बन गया।
घटना के बाद मृतक की पत्नी कुसुम सारथी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी दाताराम सारथी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर अदालत ने दाताराम सारथी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।
फैसले के साथ ही न्यायालय ने मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है। यह राशि परिवार को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दी जाती है, हालांकि किसी परिजन की मृत्यु से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि पारिवारिक विवाद और रिश्तों में बढ़ता तनाव कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम लेकर आ सकता है। एक बच्चे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल गया और अंततः एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि दूसरे परिवार का व्यक्ति आजीवन कारावास की सजा तक पहुंच गया।
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बच्चे को ले जाने के विवाद में साले की हत्या, जीजा को उम्रकैद
रायगढ़,(छ.ग.)
रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र में पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हत्या का मामला करीब तीन साल बाद अदालत के फैसले के साथ अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया। बच्चे को जबरन अपने साथ ले जाने के दौरान हुए विवाद में बड़े साले की चाकू मारकर हत्या करने वाले आरोपी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है और मृतक के परिवार को क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की अनुशंसा की है। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था क्योंकि घटना परिवार के सदस्यों के सामने हुई थी और विवाद की वजह एक साल का मासूम बच्चा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना की शुरुआत पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक मतभेदों से हुई थी। ग्राम मुनुंद निवासी दाताराम सारथी की शादी उर्मिला सारथी से हुई थी, लेकिन दोनों के रिश्तों में लगातार तनाव बना हुआ था। बताया गया कि आपसी विवाद के कारण उर्मिला अक्सर अपने मायके ग्राम पत्थलगांव खुर्द में रहती थी। इसी दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया और वह अपने बच्चे के साथ मायके में ही रह रही थी। परिवार के लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच संबंध सामान्य नहीं थे और कई बार समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। घटना 1 मई 2022 की शाम की है। बताया जाता है कि दाताराम सारथी अपने ससुराल पहुंचा और वहां मौजूद अपने एक साल के बेटे को अपने साथ ले जाने की कोशिश करने लगा। आरोप है कि उसने बच्चे को जबरन अपनी पत्नी से छीन लिया और उसे लेकर जाने लगा। उस समय उर्मिला सारथी, उसकी भाभी और भतीजी ने उसे रोकने की कोशिश की। परिवार की महिलाओं ने काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बच्चे को लेकर वह मुख्य सड़क की ओर बढ़ गया। इसी बीच परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बात की जानकारी मिली और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जब दाताराम बच्चे को लेकर जा रहा था, तभी उसका बड़ा साला महेश सारथी वहां पहुंचा। महेश ने उसे रोकने का प्रयास किया और बच्चे को जबरन ले जाने का विरोध किया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि मामला हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि गुस्से में आकर दाताराम ने अपने पास मौजूद चाकू निकाल लिया और महेश सारथी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। चाकू के वार महेश के पेट, पीठ और गर्दन पर किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना इतनी अचानक हुई कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही महेश जमीन पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी, बहन और बेटी के सामने यह पूरा घटनाक्रम हुआ। परिवार के सदस्यों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा और घर में मातम का माहौल बन गया।
घटना के बाद मृतक की पत्नी कुसुम सारथी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण साबित हुए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी दाताराम सारथी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को हत्या का दोषी पाया। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपी की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर अदालत ने दाताराम सारथी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर एक हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया।
फैसले के साथ ही न्यायालय ने मृतक के परिवार की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने मृतक के आश्रितों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायगढ़ के माध्यम से एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने की अनुशंसा की है। यह राशि परिवार को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से दी जाती है, हालांकि किसी परिजन की मृत्यु से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया कि पारिवारिक विवाद और रिश्तों में बढ़ता तनाव कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम लेकर आ सकता है। एक बच्चे को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हत्या जैसे गंभीर अपराध में बदल गया और अंततः एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया, जबकि दूसरे परिवार का व्यक्ति आजीवन कारावास की सजा तक पहुंच गया।
