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भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी, एआई प्रदर्शन में भी चौथा स्थान
नेशनल डेस्क
डिजिटल कनेक्टिविटी, फिनटेक और नवाचार के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ा
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी बन गया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने डिजिटल प्रदर्शन के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब देश में डिजिटल सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की ओर से जारी ‘इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत डिजिटलाइजेशन के मामले में आठवें स्थान पर था, लेकिन एक वर्ष के भीतर तीन स्थान की छलांग लगाकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, इंटरनेट पहुंच, मोबाइल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार ने इस प्रगति में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में दुनिया की जीडीपी के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाले 71 देशों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि भारत की डिजिटल क्षमता और तकनीकी विस्तार कई स्थापित अर्थव्यवस्थाओं से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल क्षेत्र में देश की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया है। यह आंकड़ा देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चिप्स-एआई इंडेक्स में भारत अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह रैंकिंग देश की तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और एआई अपनाने की गति को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में एआई आधारित स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाएं और डिजिटल सेवाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है।
एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि दुनिया के अधिकांश एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 72 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों से आते हैं। भारत और चीन मिलकर दुनिया के करीब 40 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें भारत अकेले लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का हिस्सा रखता है। यह दर्शाता है कि देश में नई तकनीकों को अपनाने की गति काफी तेज है और आम लोगों के बीच भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई टैलेंट हब भी माना जा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ वैश्विक कंपनियों और स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देश के विभिन्न तकनीकी संस्थान और विश्वविद्यालय भी एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े पाठ्यक्रमों पर लगातार जोर दे रहे हैं। इसके कारण आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। एआई उपयोग और प्रतिभा के मामले में भारत मजबूत स्थिति में है, लेकिन निवेश के क्षेत्र में अभी भी काफी अंतर दिखाई देता है। वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा ही भारत को प्राप्त हो रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद निवेश आकर्षित करने के लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है। एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन और बड़े एआई मॉडल अभी भी दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हैं। ऐसे में भारत को अपने डिजिटल विस्तार को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक निवेश करना होगा। साथ ही स्टार्टअप, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि नई तकनीकों का विकास देश के भीतर ही हो सके।
डिजिटल इंडिया अभियान, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), तेज इंटरनेट विस्तार और सरकारी डिजिटल सेवाओं ने भारत को वैश्विक डिजिटल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाई है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने से भी डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। यही वजह है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि डिजिटल नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
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भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी, एआई प्रदर्शन में भी चौथा स्थान
नेशनल डेस्क
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी डिजिटल इकॉनोमी बन गया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ने डिजिटल प्रदर्शन के मामले में जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब देश में डिजिटल सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस की ओर से जारी ‘इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत डिजिटलाइजेशन के मामले में आठवें स्थान पर था, लेकिन एक वर्ष के भीतर तीन स्थान की छलांग लगाकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, इंटरनेट पहुंच, मोबाइल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार ने इस प्रगति में अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में दुनिया की जीडीपी के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाले 71 देशों का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि भारत की डिजिटल क्षमता और तकनीकी विस्तार कई स्थापित अर्थव्यवस्थाओं से अधिक तेजी से बढ़ रहा है। डिजिटल क्षेत्र में देश की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ने डिजिटल माध्यमों से करीब 31 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया है। यह आंकड़ा देश में बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। चिप्स-एआई इंडेक्स में भारत अमेरिका, चीन और सिंगापुर के बाद चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह रैंकिंग देश की तकनीकी क्षमता, प्रतिभा और एआई अपनाने की गति को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में एआई आधारित स्टार्टअप, अनुसंधान परियोजनाएं और डिजिटल सेवाओं में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है।
एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि दुनिया के अधिकांश एआई उपयोगकर्ता अब विकासशील देशों में मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 72 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता विकासशील देशों से आते हैं। भारत और चीन मिलकर दुनिया के करीब 40 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें भारत अकेले लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक एआई उपयोगकर्ताओं का हिस्सा रखता है। यह दर्शाता है कि देश में नई तकनीकों को अपनाने की गति काफी तेज है और आम लोगों के बीच भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग तेजी से बढ़ा है।
भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआई टैलेंट हब भी माना जा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ वैश्विक कंपनियों और स्टार्टअप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। देश के विभिन्न तकनीकी संस्थान और विश्वविद्यालय भी एआई और मशीन लर्निंग से जुड़े पाठ्यक्रमों पर लगातार जोर दे रहे हैं। इसके कारण आने वाले वर्षों में भारत की तकनीकी क्षमता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। एआई उपयोग और प्रतिभा के मामले में भारत मजबूत स्थिति में है, लेकिन निवेश के क्षेत्र में अभी भी काफी अंतर दिखाई देता है। वैश्विक निजी एआई निवेश का केवल लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा ही भारत को प्राप्त हो रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि तकनीकी क्षमता होने के बावजूद निवेश आकर्षित करने के लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है। एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स, उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग संसाधन और बड़े एआई मॉडल अभी भी दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित हैं। ऐसे में भारत को अपने डिजिटल विस्तार को मजबूत करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक निवेश करना होगा। साथ ही स्टार्टअप, उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि नई तकनीकों का विकास देश के भीतर ही हो सके।
डिजिटल इंडिया अभियान, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), तेज इंटरनेट विस्तार और सरकारी डिजिटल सेवाओं ने भारत को वैश्विक डिजिटल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाई है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ने से भी डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। यही वजह है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि डिजिटल नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
