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ओवैसी बोले- अजान और नमाज के मुद्दे जानबूझकर उठाए जाते, सभी धार्मिक जुलूसों पर भी हो समान नियम
नेशनल डेस्क
हैदराबाद के ईद मिलाप कार्यक्रम में AIMIM प्रमुख ने मीडिया, UCC, NEET और महंगाई जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा
हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कई राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने नमाज, अजान, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), NEET पेपर लीक, महंगाई और मीडिया की भूमिका जैसे विषयों को उठाते हुए सरकार और कुछ मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि नमाज और अजान से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर इस तरह पेश किया जाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा सके।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि सड़क पर नमाज पढ़ने का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऐसा रोजाना नहीं होता। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में केवल जुमे या ईद के अवसर पर ही सीमित समय के लिए सड़क पर नमाज अदा की जाती है। इसके बावजूद इसे बड़ा मुद्दा बना दिया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान भी सड़कें बंद होती हैं, अस्थायी ढांचे लगाए जाते हैं और यातायात प्रभावित होता है, लेकिन उन परिस्थितियों पर उतना विवाद नहीं होता जितना नमाज को लेकर किया जाता है।
ओवैसी ने कहा कि यदि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम बनाया जाता है तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अजान से कम और राजनीतिक भाषणों से अधिक समस्या होनी चाहिए, क्योंकि आम जनता की असली चिंताएं रोजगार, शिक्षा और महंगाई से जुड़ी हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी समर्थन में प्रतिक्रिया दी।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दे से लाखों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन उस विषय पर उतनी गंभीर चर्चा नहीं हुई जितनी धार्मिक विवादों पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश के करीब 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों ने परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता का सामना किया, लेकिन कई टीवी चैनलों ने उस मुद्दे को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इसके बजाय धार्मिक पहचान, खानपान और अजान जैसे विषयों को लगातार बहस का हिस्सा बनाया गया।
CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर सामने आए विवाद का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि कोई छात्र या नागरिक सरकार से सवाल पूछता है तो उसे देशविरोधी या पाकिस्तानी बताना गलत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है और सरकारों को जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि कुछ मामलों में आलोचना को राष्ट्रविरोध से जोड़ दिया जाता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर भी ओवैसी ने अपनी पुरानी आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि असम में लागू किए जा रहे प्रावधानों में मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि कुछ अन्य समुदायों को छूट दी गई है। उनके अनुसार यदि कोई कानून समानता के नाम पर लाया जाता है तो उसका स्वरूप वास्तव में सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चयनात्मक तरीके से नियम लागू करने से विवाद और असंतोष पैदा हो सकता है।
हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडे की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि यदि किसी धार्मिक अवसर पर कुछ दुकानों को बंद कराया जाता है तो फिर समान सिद्धांत अन्य समुदायों के धार्मिक अवसरों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रमजान के दौरान शराब की दुकानों को भी बंद करने पर चर्चा होनी चाहिए, यदि धार्मिक भावनाओं का सम्मान ही आधार बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध करना नहीं बल्कि समान व्यवहार की मांग करना है।
महंगाई और बढ़ती तेल कीमतों का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि आम लोगों की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विषयों पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस नहीं होती। उनके मुताबिक आम परिवार आज रोजमर्रा के खर्चों को लेकर परेशान हैं, लेकिन राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा दूसरे मुद्दों में उलझा रहता है।
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ओवैसी बोले- अजान और नमाज के मुद्दे जानबूझकर उठाए जाते, सभी धार्मिक जुलूसों पर भी हो समान नियम
नेशनल डेस्क
हैदराबाद में आयोजित ईद मिलाप कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर कई राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने नमाज, अजान, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), NEET पेपर लीक, महंगाई और मीडिया की भूमिका जैसे विषयों को उठाते हुए सरकार और कुछ मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि नमाज और अजान से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर इस तरह पेश किया जाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा सके।
अपने भाषण में उन्होंने कहा कि सड़क पर नमाज पढ़ने का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऐसा रोजाना नहीं होता। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में केवल जुमे या ईद के अवसर पर ही सीमित समय के लिए सड़क पर नमाज अदा की जाती है। इसके बावजूद इसे बड़ा मुद्दा बना दिया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान भी सड़कें बंद होती हैं, अस्थायी ढांचे लगाए जाते हैं और यातायात प्रभावित होता है, लेकिन उन परिस्थितियों पर उतना विवाद नहीं होता जितना नमाज को लेकर किया जाता है।
ओवैसी ने कहा कि यदि सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर कोई नियम बनाया जाता है तो वह सभी धर्मों और समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अजान से कम और राजनीतिक भाषणों से अधिक समस्या होनी चाहिए, क्योंकि आम जनता की असली चिंताएं रोजगार, शिक्षा और महंगाई से जुड़ी हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी समर्थन में प्रतिक्रिया दी।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दे से लाखों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन उस विषय पर उतनी गंभीर चर्चा नहीं हुई जितनी धार्मिक विवादों पर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश के करीब 22 लाख छात्रों और उनके परिवारों ने परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता का सामना किया, लेकिन कई टीवी चैनलों ने उस मुद्दे को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। इसके बजाय धार्मिक पहचान, खानपान और अजान जैसे विषयों को लगातार बहस का हिस्सा बनाया गया।
CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर सामने आए विवाद का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि यदि कोई छात्र या नागरिक सरकार से सवाल पूछता है तो उसे देशविरोधी या पाकिस्तानी बताना गलत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है और सरकारों को जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि कुछ मामलों में आलोचना को राष्ट्रविरोध से जोड़ दिया जाता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर भी ओवैसी ने अपनी पुरानी आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि असम में लागू किए जा रहे प्रावधानों में मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि कुछ अन्य समुदायों को छूट दी गई है। उनके अनुसार यदि कोई कानून समानता के नाम पर लाया जाता है तो उसका स्वरूप वास्तव में सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चयनात्मक तरीके से नियम लागू करने से विवाद और असंतोष पैदा हो सकता है।
हिंदू त्योहारों के दौरान मांस और अंडे की बिक्री पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि यदि किसी धार्मिक अवसर पर कुछ दुकानों को बंद कराया जाता है तो फिर समान सिद्धांत अन्य समुदायों के धार्मिक अवसरों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रमजान के दौरान शराब की दुकानों को भी बंद करने पर चर्चा होनी चाहिए, यदि धार्मिक भावनाओं का सम्मान ही आधार बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध करना नहीं बल्कि समान व्यवहार की मांग करना है।
महंगाई और बढ़ती तेल कीमतों का मुद्दा उठाते हुए ओवैसी ने कहा कि आम लोगों की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विषयों पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस नहीं होती। उनके मुताबिक आम परिवार आज रोजमर्रा के खर्चों को लेकर परेशान हैं, लेकिन राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा दूसरे मुद्दों में उलझा रहता है।
