- Hindi News
- देश विदेश
- NFHS-6 रिपोर्ट: घरेलू हिंसा घटी, महिलाओं में मोटापा बढ़ा
NFHS-6 रिपोर्ट: घरेलू हिंसा घटी, महिलाओं में मोटापा बढ़ा
नेशनल डेस्क
देश में साफ पानी और इंटरनेट पहुंच में सुधार, लेकिन बच्चों के पोषण और स्तनपान को लेकर चिंता बरकरार
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी कर दी गई। देश के 715 जिलों और करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल करने वाले इस बड़े सर्वे ने भारत की सामाजिक, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी तस्वीर को सामने रखा है। रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े हैं जो राहत देने वाले हैं, वहीं कुछ संकेत चिंता बढ़ाने वाले भी हैं। घरेलू हिंसा, बाल विवाह और कुपोषण के मामलों में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन महिलाओं में तेजी से बढ़ता मोटापा और शिशुओं में स्तनपान की घटती दर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनकर उभरी है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में घरेलू हिंसा की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। पिछले सर्वे में जहां 29.2 प्रतिशत महिलाओं ने घरेलू हिंसा का सामना करने की बात कही थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 22.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसी तरह बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। पहले यह दर 23.3 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 20.1 प्रतिशत रह गई है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। कामकाजी महिलाओं की संख्या 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 30.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से इन क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।
हालांकि रिपोर्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा संकेत भी सामने आया है। देश में महिलाओं में मोटापे की दर पिछले सर्वे की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम और केरल में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों में बदलाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। दूसरी ओर मेघालय और झारखंड जैसे राज्यों में मोटापे की दर अपेक्षाकृत कम पाई गई है।
देश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अब 98.3 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंच चुकी है, जबकि 96.5 प्रतिशत परिवारों को साफ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आधारभूत ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर किए गए प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाओं के बीच इंटरनेट उपयोग में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां सीमित संख्या में महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। डिजिटल पहुंच में आई यह वृद्धि शिक्षा, रोजगार और सूचना तक पहुंच के नए अवसर खोल सकती है।
रिपोर्ट में महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है। देश में अब 18.8 प्रतिशत महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक है। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की संपत्ति पर हिस्सेदारी बढ़ी है। इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
दूसरी तरफ परिवार नियोजन को लेकर कुछ चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं। आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या घट गई है। पिछले सर्वे में जहां 56.4 प्रतिशत महिलाएं आधुनिक परिवार नियोजन साधनों का उपयोग कर रही थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 52.7 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस गिरावट के कारणों को समझने और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। अच्छी खबर यह है कि कुपोषित बच्चों में नाटेपन की समस्या में कमी आई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 29.3 प्रतिशत पर आ गया है। यह सुधार बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और पोषण योजनाओं के असर को दर्शाता है। लेकिन दूसरी ओर छह महीने से दो वर्ष तक की आयु के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को ही संतुलित और पर्याप्त आहार मिल पा रहा है। इसका मतलब है कि करीब 85 प्रतिशत बच्चे अभी भी जरूरी पोषण से वंचित हैं। यह स्थिति आने वाले वर्षों में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पहले 63.7 प्रतिशत था, जो अब घटकर 55.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के शुरुआती विकास के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है और इस क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बाल विवाह के मामले में केरल सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां केवल 2.9 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल और बिहार में बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा है। वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे सुरक्षित राज्य के रूप में सामने आया है, जबकि बिहार में महिलाओं को सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
NFHS-6 रिपोर्ट: घरेलू हिंसा घटी, महिलाओं में मोटापा बढ़ा
नेशनल डेस्क
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट शुक्रवार को जारी कर दी गई। देश के 715 जिलों और करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल करने वाले इस बड़े सर्वे ने भारत की सामाजिक, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी तस्वीर को सामने रखा है। रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े हैं जो राहत देने वाले हैं, वहीं कुछ संकेत चिंता बढ़ाने वाले भी हैं। घरेलू हिंसा, बाल विवाह और कुपोषण के मामलों में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन महिलाओं में तेजी से बढ़ता मोटापा और शिशुओं में स्तनपान की घटती दर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनकर उभरी है।
रिपोर्ट के अनुसार देश में घरेलू हिंसा की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। पिछले सर्वे में जहां 29.2 प्रतिशत महिलाओं ने घरेलू हिंसा का सामना करने की बात कही थी, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर 22.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इसी तरह बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है। पहले यह दर 23.3 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 20.1 प्रतिशत रह गई है। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। कामकाजी महिलाओं की संख्या 25.4 प्रतिशत से बढ़कर 30.8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से इन क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है।
हालांकि रिपोर्ट में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा संकेत भी सामने आया है। देश में महिलाओं में मोटापे की दर पिछले सर्वे की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम और केरल में यह समस्या सबसे अधिक देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों में बदलाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। दूसरी ओर मेघालय और झारखंड जैसे राज्यों में मोटापे की दर अपेक्षाकृत कम पाई गई है।
देश में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अब 98.3 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंच चुकी है, जबकि 96.5 प्रतिशत परिवारों को साफ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में आधारभूत ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार पर किए गए प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाओं के बीच इंटरनेट उपयोग में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां सीमित संख्या में महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। डिजिटल पहुंच में आई यह वृद्धि शिक्षा, रोजगार और सूचना तक पहुंच के नए अवसर खोल सकती है।
रिपोर्ट में महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर भी सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया है। देश में अब 18.8 प्रतिशत महिलाओं के पास मकान या जमीन का मालिकाना हक है। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 14 प्रतिशत था। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की संपत्ति पर हिस्सेदारी बढ़ी है। इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
दूसरी तरफ परिवार नियोजन को लेकर कुछ चिंताजनक आंकड़े भी सामने आए हैं। आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या घट गई है। पिछले सर्वे में जहां 56.4 प्रतिशत महिलाएं आधुनिक परिवार नियोजन साधनों का उपयोग कर रही थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 52.7 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस गिरावट के कारणों को समझने और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। अच्छी खबर यह है कि कुपोषित बच्चों में नाटेपन की समस्या में कमी आई है। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत था, जो अब घटकर 29.3 प्रतिशत पर आ गया है। यह सुधार बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों और पोषण योजनाओं के असर को दर्शाता है। लेकिन दूसरी ओर छह महीने से दो वर्ष तक की आयु के केवल 15.3 प्रतिशत बच्चों को ही संतुलित और पर्याप्त आहार मिल पा रहा है। इसका मतलब है कि करीब 85 प्रतिशत बच्चे अभी भी जरूरी पोषण से वंचित हैं। यह स्थिति आने वाले वर्षों में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
शिशुओं को जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने की दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पहले 63.7 प्रतिशत था, जो अब घटकर 55.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के शुरुआती विकास के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है और इस क्षेत्र में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बाल विवाह के मामले में केरल सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां केवल 2.9 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल और बिहार में बाल विवाह की दर सबसे ज्यादा है। वैवाहिक हिंसा के मामले में हिमाचल प्रदेश सबसे सुरक्षित राज्य के रूप में सामने आया है, जबकि बिहार में महिलाओं को सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है।
