नीदरलैंड के भारतवंशी मेयर 41 साल बाद जैविक मां की तलाश में भारत पहुंचे, बोले— हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार

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नागपुर के शेल्टर होम में छोड़े गए थे तीन दिन के नवजात; अब एम्स्टर्डम के पास हीमस्टेड शहर के मेयर हैं फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क

नीदरलैंड के एक शहर के भारतवंशी मेयर अपनी जैविक मां की तलाश में एक बार फिर भारत लौटने की तैयारी में हैं। यह कहानी 41 साल पहले नागपुर के एक शेल्टर होम से शुरू हुई थी और अब यूरोप की राजनीति तक पहुंच चुकी है। हीमस्टेड शहर के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अपनी मां से सिर्फ एक बार मिलना चाहते हैं, ताकि यह बता सकें कि उन्हें जीवन में कभी प्यार की कमी नहीं रही।

फाल्गुन का जन्म 10 फरवरी 1985 को नागपुर में हुआ था। जन्म के तीन दिन बाद एक अविवाहित युवती ने सामाजिक दबाव और परिस्थितियों के चलते उन्हें ‘मातृ सेवा संघ’ नामक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। वहां वे करीब एक महीने रहे। इसके बाद नीदरलैंड से भारत घूमने आए एक दंपत्ति ने उन्हें गोद लिया और अपने साथ ले गए। शेल्टर होम की एक नर्स ने उनका नाम ‘फाल्गुन’ रखा था, क्योंकि उनका जन्म हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन महीने में हुआ था।

समय बीतता गया और वही बच्चा आज नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित हीमस्टेड शहर का मेयर है। डच मीडिया के अनुसार, फाल्गुन ने 17 अप्रैल 2024 को मेयर पद की शपथ ली थी। हाल ही में दिसंबर 2025 में वे भारत आए थे, लेकिन उनकी मां की तलाश की जानकारी अब सामने आई है।

फाल्गुन ने कहा कि उन्होंने महाभारत पढ़ी है और उन्हें लगता है कि जैसे कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार था, वैसे ही हर बच्चे को अपनी मां को जानने का हक है। उनका कहना है कि वह किसी शिकायत या सवाल के साथ नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मुलाकात के लिए मां को ढूंढ रहे हैं।

नागपुर जिला प्रशासन और नगर निगम की मदद से फाल्गुन को अपने जन्म से जुड़े कुछ दस्तावेज मिले हैं। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि उनकी मां उस समय 21 साल की थीं और अविवाहित होने के कारण समाज के दबाव से जूझ रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों में मां और बच्चे दोनों का नाम दर्ज है, लेकिन फाल्गुन ने गोपनीयता का सम्मान करते हुए नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

अगस्त 2025 में फाल्गुन नागपुर आए थे और उस नर्स से भी मिले, जिसने उन्हें नाम दिया था। वह नर्स अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। फाल्गुन ने इस मुलाकात को अपनी पहचान से जुड़ा भावुक क्षण बताया। उनका कहना है कि उन्हें भारतीय संस्कृति, खानपान और परंपराओं से गहरा लगाव है और वे 2006 से अब तक कई बार भारत आ चुके हैं।

फाल्गुन का मानना है कि उनकी मां भी शायद उनसे मिलना चाहती होंगी। उन्होंने कहा कि वे 2026 में फिर नागपुर आकर एनजीओ, पुलिस और प्रशासन की मदद से अपनी मां की तलाश तेज करेंगे। उनके साथ उनकी पत्नी भी इस प्रयास में पूरी तरह सहयोग कर रही हैं। दंपत्ति के चार बच्चे हैं और उन्होंने अपनी बेटी का नाम अपनी मां के नाम पर रखा है।

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16 Jan 2026 By Nitin Trivedi

नीदरलैंड के भारतवंशी मेयर 41 साल बाद जैविक मां की तलाश में भारत पहुंचे, बोले— हर कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार

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नीदरलैंड के एक शहर के भारतवंशी मेयर अपनी जैविक मां की तलाश में एक बार फिर भारत लौटने की तैयारी में हैं। यह कहानी 41 साल पहले नागपुर के एक शेल्टर होम से शुरू हुई थी और अब यूरोप की राजनीति तक पहुंच चुकी है। हीमस्टेड शहर के मेयर फाल्गुन बिन्नेन्डिज्क ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अपनी मां से सिर्फ एक बार मिलना चाहते हैं, ताकि यह बता सकें कि उन्हें जीवन में कभी प्यार की कमी नहीं रही।

फाल्गुन का जन्म 10 फरवरी 1985 को नागपुर में हुआ था। जन्म के तीन दिन बाद एक अविवाहित युवती ने सामाजिक दबाव और परिस्थितियों के चलते उन्हें ‘मातृ सेवा संघ’ नामक शेल्टर होम में छोड़ दिया था। वहां वे करीब एक महीने रहे। इसके बाद नीदरलैंड से भारत घूमने आए एक दंपत्ति ने उन्हें गोद लिया और अपने साथ ले गए। शेल्टर होम की एक नर्स ने उनका नाम ‘फाल्गुन’ रखा था, क्योंकि उनका जन्म हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन महीने में हुआ था।

समय बीतता गया और वही बच्चा आज नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित हीमस्टेड शहर का मेयर है। डच मीडिया के अनुसार, फाल्गुन ने 17 अप्रैल 2024 को मेयर पद की शपथ ली थी। हाल ही में दिसंबर 2025 में वे भारत आए थे, लेकिन उनकी मां की तलाश की जानकारी अब सामने आई है।

फाल्गुन ने कहा कि उन्होंने महाभारत पढ़ी है और उन्हें लगता है कि जैसे कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार था, वैसे ही हर बच्चे को अपनी मां को जानने का हक है। उनका कहना है कि वह किसी शिकायत या सवाल के साथ नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मुलाकात के लिए मां को ढूंढ रहे हैं।

नागपुर जिला प्रशासन और नगर निगम की मदद से फाल्गुन को अपने जन्म से जुड़े कुछ दस्तावेज मिले हैं। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि उनकी मां उस समय 21 साल की थीं और अविवाहित होने के कारण समाज के दबाव से जूझ रही थीं। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेजों में मां और बच्चे दोनों का नाम दर्ज है, लेकिन फाल्गुन ने गोपनीयता का सम्मान करते हुए नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

अगस्त 2025 में फाल्गुन नागपुर आए थे और उस नर्स से भी मिले, जिसने उन्हें नाम दिया था। वह नर्स अब सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। फाल्गुन ने इस मुलाकात को अपनी पहचान से जुड़ा भावुक क्षण बताया। उनका कहना है कि उन्हें भारतीय संस्कृति, खानपान और परंपराओं से गहरा लगाव है और वे 2006 से अब तक कई बार भारत आ चुके हैं।

फाल्गुन का मानना है कि उनकी मां भी शायद उनसे मिलना चाहती होंगी। उन्होंने कहा कि वे 2026 में फिर नागपुर आकर एनजीओ, पुलिस और प्रशासन की मदद से अपनी मां की तलाश तेज करेंगे। उनके साथ उनकी पत्नी भी इस प्रयास में पूरी तरह सहयोग कर रही हैं। दंपत्ति के चार बच्चे हैं और उन्होंने अपनी बेटी का नाम अपनी मां के नाम पर रखा है।

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