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जेफ बेजोस की कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट
Digital Desk
फ्लोरिडा लॉन्चपैड पर बड़ा हादसा, बोले बेजोस- फिर उड़ान भरेंगे
अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट गुरुवार रात फ्लोरिडा के केप कैनावेरल लॉन्चपैड पर टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट हो गया। हादसे का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हो रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि लॉन्चपैड पर खड़ा विशाल रॉकेट अचानक तेज धमाके के साथ आग के बड़े गोले में बदल गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ।
ब्लू ओरिजिन की तरफ से बताया गया कि न्यू ग्लेन रॉकेट का ‘हॉट फायर टेस्ट’ किया जा रहा था। यह टेस्ट किसी भी रॉकेट को लॉन्च करने से पहले बेहद अहम माना जाता है। इसमें रॉकेट को लॉन्चपैड पर मजबूत क्लैम्प्स से बांधकर उसके इंजनों को पूरी ताकत से कुछ समय के लिए चालू किया जाता है। इसी दौरान रॉकेट में तकनीकी गड़बड़ी आ गई और बड़ा विस्फोट हो गया। हादसा रात करीब 9 बजे हुआ। धमाका इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोगों ने दूर तक आग की लपटें और धुआं उठते देखा।
घटना के बाद लॉन्चपैड के आसपास इमरजेंसी टीमों को तुरंत सक्रिय किया गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में कहा गया है कि आम लोगों को इस हादसे से कोई खतरा नहीं हुआ। फिलहाल पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और विशेषज्ञ टीम हादसे की असली वजह पता लगाने में जुटी है।
ब्लू ओरिजिन के फाउंडर जेफ बेजोस ने हादसे के बाद बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि “आज का दिन कठिन रहा, लेकिन हमारे सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हम यह पता लगा रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। जो भी दोबारा बनाना पड़ेगा, हम बनाएंगे और फिर से उड़ान भरेंगे।” बेजोस का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। स्पेस इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने भी टीम का हौसला बढ़ाया है।
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्पेसफ्लाइट आसान नहीं होती और हैवी-लिफ्ट रॉकेट तैयार करना दुनिया के सबसे कठिन तकनीकी कामों में शामिल है। उन्होंने कहा कि नासा इस पूरे मामले की जांच में सहयोग करेगा और आगे के मिशनों पर इसके असर का आकलन किया जाएगा।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब ब्लू ओरिजिन अपने स्पेस प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल नवंबर में कंपनी ने न्यू ग्लेन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उसी मिशन में कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर को सफलतापूर्वक लैंड कराया था। इसे ब्लू ओरिजिन के लिए बड़ी तकनीकी सफलता माना गया था।
करीब 29 मंजिला इमारत जितने ऊंचे इस न्यू ग्लेन रॉकेट को तैयार करने में कंपनी ने लगभग एक दशक का समय और अरबों डॉलर खर्च किए हैं। यह रॉकेट दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले सिस्टम पर आधारित है। इसे खासतौर पर इलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स के फॉल्कन और स्टारशिप रॉकेट्स को चुनौती देने के लिए डिजाइन किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि हादसे से एक दिन पहले ही ब्लू ओरिजिन ने अमेजन के इंटरनेट प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए जल्द ही 48 ‘लियो’ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इन सैटेलाइट्स की मदद से अमेजन दुनिया भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहता है। इसे सीधे तौर पर इलॉन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को चुनौती देने की तैयारी माना जा रहा था।
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर इलॉन मस्क की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट बनाना और उन्हें ऑपरेट करना बेहद कठिन काम है।” मस्क का यह बयान काफी चर्चा में है क्योंकि स्पेसएक्स खुद भी कई बार टेस्टिंग के दौरान ऐसे विस्फोटों का सामना कर चुकी है।
पिछले कुछ महीनों में ब्लू ओरिजिन को दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। इससे पहले फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एक असफल सैटेलाइट लॉन्चिंग की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद कंपनी के न्यू ग्लेन प्रोग्राम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। अब इस नए हादसे ने कंपनी की आगामी लॉन्चिंग योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रॉकेट साइंस में असफलताएं नई बात नहीं हैं। कई बार टेस्टिंग के दौरान हुई विफलताएं ही आगे की सफलता का रास्ता तैयार करती हैं।
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जेफ बेजोस की कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट
Digital Desk
अमेजन के मालिक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन को बड़ा झटका लगा है। कंपनी का न्यू ग्लेन रॉकेट गुरुवार रात फ्लोरिडा के केप कैनावेरल लॉन्चपैड पर टेस्टिंग के दौरान ब्लास्ट हो गया। हादसे का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हो रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि लॉन्चपैड पर खड़ा विशाल रॉकेट अचानक तेज धमाके के साथ आग के बड़े गोले में बदल गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई कर्मचारी घायल नहीं हुआ।
ब्लू ओरिजिन की तरफ से बताया गया कि न्यू ग्लेन रॉकेट का ‘हॉट फायर टेस्ट’ किया जा रहा था। यह टेस्ट किसी भी रॉकेट को लॉन्च करने से पहले बेहद अहम माना जाता है। इसमें रॉकेट को लॉन्चपैड पर मजबूत क्लैम्प्स से बांधकर उसके इंजनों को पूरी ताकत से कुछ समय के लिए चालू किया जाता है। इसी दौरान रॉकेट में तकनीकी गड़बड़ी आ गई और बड़ा विस्फोट हो गया। हादसा रात करीब 9 बजे हुआ। धमाका इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोगों ने दूर तक आग की लपटें और धुआं उठते देखा।
घटना के बाद लॉन्चपैड के आसपास इमरजेंसी टीमों को तुरंत सक्रिय किया गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में कहा गया है कि आम लोगों को इस हादसे से कोई खतरा नहीं हुआ। फिलहाल पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और विशेषज्ञ टीम हादसे की असली वजह पता लगाने में जुटी है।
ब्लू ओरिजिन के फाउंडर जेफ बेजोस ने हादसे के बाद बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि “आज का दिन कठिन रहा, लेकिन हमारे सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं। हम यह पता लगा रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। जो भी दोबारा बनाना पड़ेगा, हम बनाएंगे और फिर से उड़ान भरेंगे।” बेजोस का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। स्पेस इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने भी टीम का हौसला बढ़ाया है।
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जैरेड इसाकमैन ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्पेसफ्लाइट आसान नहीं होती और हैवी-लिफ्ट रॉकेट तैयार करना दुनिया के सबसे कठिन तकनीकी कामों में शामिल है। उन्होंने कहा कि नासा इस पूरे मामले की जांच में सहयोग करेगा और आगे के मिशनों पर इसके असर का आकलन किया जाएगा।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब ब्लू ओरिजिन अपने स्पेस प्रोग्राम को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पिछले साल नवंबर में कंपनी ने न्यू ग्लेन रॉकेट की सफल लॉन्चिंग कर बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। उसी मिशन में कंपनी ने पहली बार अपने रीयूजेबल बूस्टर को सफलतापूर्वक लैंड कराया था। इसे ब्लू ओरिजिन के लिए बड़ी तकनीकी सफलता माना गया था।
करीब 29 मंजिला इमारत जितने ऊंचे इस न्यू ग्लेन रॉकेट को तैयार करने में कंपनी ने लगभग एक दशक का समय और अरबों डॉलर खर्च किए हैं। यह रॉकेट दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले सिस्टम पर आधारित है। इसे खासतौर पर इलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स के फॉल्कन और स्टारशिप रॉकेट्स को चुनौती देने के लिए डिजाइन किया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि हादसे से एक दिन पहले ही ब्लू ओरिजिन ने अमेजन के इंटरनेट प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी घोषणा की थी। कंपनी ने कहा था कि न्यू ग्लेन रॉकेट के जरिए जल्द ही 48 ‘लियो’ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इन सैटेलाइट्स की मदद से अमेजन दुनिया भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहता है। इसे सीधे तौर पर इलॉन मस्क के स्टारलिंक नेटवर्क को चुनौती देने की तैयारी माना जा रहा था।
हादसे के बाद सोशल मीडिया पर इलॉन मस्क की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण। रॉकेट बनाना और उन्हें ऑपरेट करना बेहद कठिन काम है।” मस्क का यह बयान काफी चर्चा में है क्योंकि स्पेसएक्स खुद भी कई बार टेस्टिंग के दौरान ऐसे विस्फोटों का सामना कर चुकी है।
पिछले कुछ महीनों में ब्लू ओरिजिन को दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। इससे पहले फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने एक असफल सैटेलाइट लॉन्चिंग की जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद कंपनी के न्यू ग्लेन प्रोग्राम को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। अब इस नए हादसे ने कंपनी की आगामी लॉन्चिंग योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रॉकेट साइंस में असफलताएं नई बात नहीं हैं। कई बार टेस्टिंग के दौरान हुई विफलताएं ही आगे की सफलता का रास्ता तैयार करती हैं।
