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IPL 2026 में बदली तस्वीर, बल्लेबाजी में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा
स्पोर्ट्स डेस्क
विदेशी गेंदबाज अब भी असरदार, लेकिन स्ट्राइक रेट में भारतीय बल्लेबाज आगे निकले
आईपीएल को लंबे समय तक विदेशी खिलाड़ियों की लीग माना जाता रहा। जब भी टूर्नामेंट की बात होती थी तो सबसे पहले क्रिस गेल की विस्फोटक बल्लेबाजी, एबी डिविलियर्स के शॉट्स, डेविड वॉर्नर की आक्रामक शुरुआत या पोलार्ड की फिनिशिंग याद आती थी। भारतीय बल्लेबाजों को अक्सर एंकर रोल में देखा जाता था, जबकि मैच का टेम्पो विदेशी खिलाड़ी तय करते थे। लेकिन IPL 2026 में यह तस्वीर काफी बदलती नजर आई। इस सीजन भारतीय बल्लेबाजों ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि तेज स्ट्राइक रेट के मामले में भी विदेशी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।
पूरे सीजन में भारतीय बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 157.01 रहा, जो पिछले सीजन के मुकाबले काफी ज्यादा है। IPL 2025 में भारतीय बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट करीब 152 था। दूसरी तरफ विदेशी बल्लेबाजों ने इस बार 155.37 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। आंकड़े बताते हैं कि विदेशी बल्लेबाजों का खेल भी आक्रामक रहा, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उनसे एक कदम आगे निकलते दिखे। खास बात यह रही कि भारतीय बल्लेबाजों ने सिर्फ पावरप्ले में ही नहीं, बल्कि बीच के ओवरों और डेथ ओवर्स में भी तेजी से रन बनाए।
भारतीय बल्लेबाजों की मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। पहले बल्लेबाज विकेट बचाकर खेलने पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन अब युवा खिलाड़ी शुरुआत से ही अटैकिंग मोड में दिखाई दे रहे हैं। वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों ने कई मैचों में तेज बल्लेबाजी कर टीमों को मजबूत शुरुआत दी। यही वजह रही कि इस सीजन चौकों, छक्कों और बड़े स्कोरों की संख्या भी बढ़ गई।
IPL 2026 में सिर्फ स्ट्राइक रेट ही नहीं, बल्लेबाजी औसत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। आमतौर पर क्रिकेट में माना जाता है कि अगर बल्लेबाज तेजी से रन बनाएगा तो उसका औसत प्रभावित होगा, लेकिन इस सीजन यह धारणा गलत साबित होती दिखी। बल्लेबाजों ने तेजी से रन भी बनाए और लगातार बड़ी पारियां भी खेलीं। पूरे टूर्नामेंट में कई शतक और अर्धशतक देखने को मिले। दर्शकों को हाई स्कोरिंग मुकाबले देखने को मिले, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच भी बढ़ गया।
हालांकि गेंदबाजी में कहानी बिल्कुल उलट नजर आई। भारतीय गेंदबाज इस सीजन काफी दबाव में दिखे। IPL 2025 में भारतीय गेंदबाजों ने 533 विकेट लिए थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर 506 पर पहुंच गया। उनकी इकोनॉमी भी बढ़ गई। पिछले सीजन भारतीय गेंदबाजों की इकोनॉमी 9.42 थी, जो इस बार बढ़कर 9.79 हो गई। इसका मतलब साफ है कि बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ खुलकर रन बनाए।
विदेशी गेंदबाज भी इस बार महंगे जरूर साबित हुए, लेकिन फिर भी वे भारतीय गेंदबाजों की तुलना में ज्यादा प्रभावी रहे। कई विदेशी तेज गेंदबाजों ने डेथ ओवर्स में शानदार नियंत्रण दिखाया। स्पिन विभाग में भी विदेशी खिलाड़ियों ने दबाव बनाने का काम किया। यही वजह रही कि कई टीमें अहम मौकों पर विदेशी गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा करती नजर आईं।
इस सीजन गेंदबाजों के लिए हालात आसान नहीं रहे। IPL 2025 में कुल 829 विकेट गिरे थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 813 रह गई। गेंदबाजों का औसत भी बढ़ गया। यानी एक विकेट लेने के लिए पहले से ज्यादा रन खर्च करने पड़े। इकोनॉमी रेट की बात करें तो IPL 2026 इतिहास के सबसे महंगे सीजन में शामिल हो गया। ओवरऑल इकोनॉमी 9.50 से बढ़कर 9.76 तक पहुंच गई।
प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड के आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी बताते हैं। इस सीजन कुल 53 खिलाड़ियों को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इनमें 31 भारतीय और 22 विदेशी खिलाड़ी शामिल रहे। हालांकि पिछले सीजन भारतीय खिलाड़ियों की संख्या ज्यादा थी। IPL 2025 में 35 भारतीय खिलाड़ियों ने यह अवॉर्ड जीता था। इस बार भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा थोड़ा कम जरूर हुआ, लेकिन फिर भी अवॉर्ड सूची में उनका पलड़ा भारी रहा।
भारतीय खिलाड़ियों में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और संजू सैमसन को सबसे ज्यादा 3-3 बार प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं विदेशी खिलाड़ियों ने भी कई मैचों में निर्णायक भूमिका निभाई। इससे साफ है कि IPL अब सिर्फ विदेशी स्टार्स की लीग नहीं रह गई, बल्कि भारतीय खिलाड़ी भी मैच विनर की भूमिका में लगातार सामने आ रहे हैं। IPL 2026 ने यह साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट अब सिर्फ तकनीकी बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। युवा खिलाड़ी तेजी से बदलते टी-20 क्रिकेट के मुताबिक खुद को ढाल चुके हैं।
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IPL 2026 में बदली तस्वीर, बल्लेबाजी में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा
स्पोर्ट्स डेस्क
आईपीएल को लंबे समय तक विदेशी खिलाड़ियों की लीग माना जाता रहा। जब भी टूर्नामेंट की बात होती थी तो सबसे पहले क्रिस गेल की विस्फोटक बल्लेबाजी, एबी डिविलियर्स के शॉट्स, डेविड वॉर्नर की आक्रामक शुरुआत या पोलार्ड की फिनिशिंग याद आती थी। भारतीय बल्लेबाजों को अक्सर एंकर रोल में देखा जाता था, जबकि मैच का टेम्पो विदेशी खिलाड़ी तय करते थे। लेकिन IPL 2026 में यह तस्वीर काफी बदलती नजर आई। इस सीजन भारतीय बल्लेबाजों ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि तेज स्ट्राइक रेट के मामले में भी विदेशी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।
पूरे सीजन में भारतीय बल्लेबाजों का औसत स्ट्राइक रेट 157.01 रहा, जो पिछले सीजन के मुकाबले काफी ज्यादा है। IPL 2025 में भारतीय बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट करीब 152 था। दूसरी तरफ विदेशी बल्लेबाजों ने इस बार 155.37 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। आंकड़े बताते हैं कि विदेशी बल्लेबाजों का खेल भी आक्रामक रहा, लेकिन भारतीय खिलाड़ी उनसे एक कदम आगे निकलते दिखे। खास बात यह रही कि भारतीय बल्लेबाजों ने सिर्फ पावरप्ले में ही नहीं, बल्कि बीच के ओवरों और डेथ ओवर्स में भी तेजी से रन बनाए।
भारतीय बल्लेबाजों की मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। पहले बल्लेबाज विकेट बचाकर खेलने पर ज्यादा ध्यान देते थे, लेकिन अब युवा खिलाड़ी शुरुआत से ही अटैकिंग मोड में दिखाई दे रहे हैं। वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों ने कई मैचों में तेज बल्लेबाजी कर टीमों को मजबूत शुरुआत दी। यही वजह रही कि इस सीजन चौकों, छक्कों और बड़े स्कोरों की संख्या भी बढ़ गई।
IPL 2026 में सिर्फ स्ट्राइक रेट ही नहीं, बल्लेबाजी औसत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। आमतौर पर क्रिकेट में माना जाता है कि अगर बल्लेबाज तेजी से रन बनाएगा तो उसका औसत प्रभावित होगा, लेकिन इस सीजन यह धारणा गलत साबित होती दिखी। बल्लेबाजों ने तेजी से रन भी बनाए और लगातार बड़ी पारियां भी खेलीं। पूरे टूर्नामेंट में कई शतक और अर्धशतक देखने को मिले। दर्शकों को हाई स्कोरिंग मुकाबले देखने को मिले, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच भी बढ़ गया।
हालांकि गेंदबाजी में कहानी बिल्कुल उलट नजर आई। भारतीय गेंदबाज इस सीजन काफी दबाव में दिखे। IPL 2025 में भारतीय गेंदबाजों ने 533 विकेट लिए थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर 506 पर पहुंच गया। उनकी इकोनॉमी भी बढ़ गई। पिछले सीजन भारतीय गेंदबाजों की इकोनॉमी 9.42 थी, जो इस बार बढ़कर 9.79 हो गई। इसका मतलब साफ है कि बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ खुलकर रन बनाए।
विदेशी गेंदबाज भी इस बार महंगे जरूर साबित हुए, लेकिन फिर भी वे भारतीय गेंदबाजों की तुलना में ज्यादा प्रभावी रहे। कई विदेशी तेज गेंदबाजों ने डेथ ओवर्स में शानदार नियंत्रण दिखाया। स्पिन विभाग में भी विदेशी खिलाड़ियों ने दबाव बनाने का काम किया। यही वजह रही कि कई टीमें अहम मौकों पर विदेशी गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा करती नजर आईं।
इस सीजन गेंदबाजों के लिए हालात आसान नहीं रहे। IPL 2025 में कुल 829 विकेट गिरे थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 813 रह गई। गेंदबाजों का औसत भी बढ़ गया। यानी एक विकेट लेने के लिए पहले से ज्यादा रन खर्च करने पड़े। इकोनॉमी रेट की बात करें तो IPL 2026 इतिहास के सबसे महंगे सीजन में शामिल हो गया। ओवरऑल इकोनॉमी 9.50 से बढ़कर 9.76 तक पहुंच गई।
प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड के आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी बताते हैं। इस सीजन कुल 53 खिलाड़ियों को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इनमें 31 भारतीय और 22 विदेशी खिलाड़ी शामिल रहे। हालांकि पिछले सीजन भारतीय खिलाड़ियों की संख्या ज्यादा थी। IPL 2025 में 35 भारतीय खिलाड़ियों ने यह अवॉर्ड जीता था। इस बार भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा थोड़ा कम जरूर हुआ, लेकिन फिर भी अवॉर्ड सूची में उनका पलड़ा भारी रहा।
भारतीय खिलाड़ियों में वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन और संजू सैमसन को सबसे ज्यादा 3-3 बार प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं विदेशी खिलाड़ियों ने भी कई मैचों में निर्णायक भूमिका निभाई। इससे साफ है कि IPL अब सिर्फ विदेशी स्टार्स की लीग नहीं रह गई, बल्कि भारतीय खिलाड़ी भी मैच विनर की भूमिका में लगातार सामने आ रहे हैं। IPL 2026 ने यह साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट अब सिर्फ तकनीकी बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। युवा खिलाड़ी तेजी से बदलते टी-20 क्रिकेट के मुताबिक खुद को ढाल चुके हैं।
