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पाकिस्तान ने चीन को संघर्ष विराम का दिया श्रेय, भारत ने फिर नकारी तीसरे पक्ष की भूमिका
Digital Desk
भारत-पाक टकराव में मध्यस्थता के चीनी दावे को इस्लामाबाद का समर्थन, नई दिल्ली ने कहा—सेनाओं की सीधी बातचीत से हुआ था समाधान
भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य टकराव को रोकने में चीन की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छिड़ गई है। पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से चीन के उस दावे का समर्थन किया है, जिसमें बीजिंग ने भारत-पाक संघर्ष को रुकवाने में मध्यस्थता करने की बात कही थी। हालांकि, भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि संघर्षविराम किसी भी तीसरे देश के हस्तक्षेप के बिना, दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ था।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत-पाक तनाव के दौरान चीनी नेतृत्व पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संपर्क में था। उनके अनुसार, चीन ने न केवल इस्लामाबाद बल्कि नई दिल्ली से भी बातचीत की थी, जिससे हालात को शांत करने में मदद मिली।
पाकिस्तान का यह बयान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के 30 दिसंबर के बयान के बाद आया है। वांग यी ने बीजिंग में कहा था कि चीन वैश्विक संघर्षों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है और भारत-पाक टकराव के दौरान भी उसने मध्यस्थता की थी। इसके बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
भारत सरकार पहले भी ऐसे सभी दावों को खारिज कर चुकी है। आधिकारिक भारतीय पक्ष के अनुसार, संघर्षविराम भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ। भारत का कहना है कि भारी सैन्य नुकसान के बाद पाकिस्तान की ओर से संपर्क किया गया था और 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
यह विवाद मई 2025 के उस सैन्य टकराव से जुड़ा है, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। भारत के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई एयरबेस को नुकसान पहुंचा था।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान इससे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी भारत-पाक तनाव कम करने का श्रेय दे चुका है। यहां तक कि पाकिस्तान सरकार ने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात भी कही थी। अब चीन के दावे का समर्थन करने से पाकिस्तान की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं।
चीन-पाकिस्तान रिश्ते और सवाल
चीन और पाकिस्तान के बीच गहरे सैन्य और रणनीतिक संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन पाकिस्तान को J-10C लड़ाकू विमान, ड्रोन और नौसैनिक उपकरण उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या चीन इस तरह के संघर्ष में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
चीन के दावे और पाकिस्तान के समर्थन के बाद भारत-पाक संबंधों में तीसरे पक्ष की भूमिका को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह द्विपक्षीय मुद्दों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
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