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बिहार में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज, शपथ ग्रहण की तैयारियां जोरों पर
नेशनल न्यूज
राजभवन से सीएम हाउस तक हलचल, नीतीश कुमार के फैसले पर टिकी निगाहें; 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री की घोषणा संभव
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी पटना में रविवार से ही बैठकों और उच्चस्तरीय संपर्कों का दौर जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर राजभवन और प्रशासनिक महकमे तक शपथ ग्रहण की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संकेत हैं कि 14 अप्रैल को मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा संभव है।
सरकारी सूत्रों और नेताओं के बयानों के अनुसार, नई सरकार के गठन की रूपरेखा लगभग तय मानी जा रही है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सोमवार को कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जो भी निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर समन्वय के साथ आगे कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
उधर, प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन ने राजभवन पहुंचकर शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी। राजभवन परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जुड़े इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस बीच मुख्यमंत्री आवास पर भी राजनीतिक हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इन बैठकों को नई सरकार के गठन और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नेताओं ने इसे औपचारिक और संगठनात्मक चर्चा बताया है।
पटना एयरपोर्ट से राजभवन जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग भी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सतर्कता साफ झलकती है। बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
इसी बीच, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक के तौर पर बिहार भेजे जाने की चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, वे 14 और 15 अप्रैल को बिहार में रहेंगे और 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जा सकती है। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की यह प्रक्रिया पूरी तरह संगठनात्मक और संवैधानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका और आगामी निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
फिलहाल पटना में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है और आने वाले 48 घंटे बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। नई सरकार के गठन को लेकर जनता और प्रशासन दोनों स्तरों पर उत्सुकता बनी हुई है।
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बिहार में नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज, शपथ ग्रहण की तैयारियां जोरों पर
नेशनल न्यूज
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी पटना में रविवार से ही बैठकों और उच्चस्तरीय संपर्कों का दौर जारी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर राजभवन और प्रशासनिक महकमे तक शपथ ग्रहण की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संकेत हैं कि 14 अप्रैल को मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा संभव है।
सरकारी सूत्रों और नेताओं के बयानों के अनुसार, नई सरकार के गठन की रूपरेखा लगभग तय मानी जा रही है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सोमवार को कैबिनेट की बैठक प्रस्तावित है, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जो भी निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर समन्वय के साथ आगे कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
उधर, प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज हो गई हैं। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन ने राजभवन पहुंचकर शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों की जानकारी दी। राजभवन परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जुड़े इंतजामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस बीच मुख्यमंत्री आवास पर भी राजनीतिक हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इन बैठकों को नई सरकार के गठन और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, नेताओं ने इसे औपचारिक और संगठनात्मक चर्चा बताया है।
पटना एयरपोर्ट से राजभवन जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग भी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सतर्कता साफ झलकती है। बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
इसी बीच, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक के तौर पर बिहार भेजे जाने की चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार, वे 14 और 15 अप्रैल को बिहार में रहेंगे और 15 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की जा सकती है। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की यह प्रक्रिया पूरी तरह संगठनात्मक और संवैधानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका और आगामी निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
फिलहाल पटना में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है और आने वाले 48 घंटे बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। नई सरकार के गठन को लेकर जनता और प्रशासन दोनों स्तरों पर उत्सुकता बनी हुई है।
