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ईरान में महंगाई के खिलाफ विरोध, पांचवे दिन हिंसा: 7 की मौत, युवा सड़कों पर
अंतराष्ट्रीय न्यूज
तेहरान और अन्य शहरों में आर्थिक संकट के खिलाफ जनता का उग्र विरोध
ईरान में महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में प्रदर्शन लगातार पांचवें दिन भी जारी रहे। राजधानी तेहरान से शुरू हुए यह आंदोलन अब देश के अन्य शहरों तक फैल चुके हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, अब तक 6 आम नागरिक और 1 सुरक्षा कर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं।
हजारों युवाओं और GenZ पीढ़ी ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की और आग लगाई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ जगहों पर फायरिंग भी की गई।
महंगाई और आर्थिक दबाव मुख्य कारण
देश में मौजूदा आर्थिक संकट सबसे बड़ी वजह बनी। ईरानी मुद्रा रियाल दिसंबर 2025 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.45 मिलियन तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा खाद्य पदार्थों में 72% और दवाओं में 50% तक की कीमतें बढ़ गई हैं।
सरकार ने 2026 के बजट में कर बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिससे आम जनता और व्यापारियों में गहरा असंतोष पैदा हुआ। व्यापारिक क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों से शुरू हुए यह आंदोलन अब मुख्य शहरों में फैल चुके हैं। कई बाजार बंद रहे और व्यापारी भी प्रदर्शन में शामिल हो गए।
राजनीतिक और सामाजिक मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मौलाना शासन के खिलाफ और राजशाही की वापसी की मांग करते हुए क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी का समर्थन किया। युवा वर्ग मानता है कि उनका नेतृत्व देश में आर्थिक स्थिरता, वैश्विक मान्यता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता ला सकता है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने प्रदर्शन के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया और जनता से एकजुट रहने का आग्रह किया।
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद मौलाना शासन की नींव रखी गई थी। अयातुल्लाह अली खामेनेई 1989 से सुप्रीम लीडर हैं। देश वर्तमान में आर्थिक मंदी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, मुद्रा गिरावट और बेरोजगारी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए देशव्यापी विरोध के बाद यह आंदोलन सबसे बड़े प्रदर्शन में गिना जा रहा है।
आर्थिक आंकड़े और व्यापार घाटा
साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर और आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर रहा। 2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंधों के चलते यह घाटा बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। चीन, तुर्की, यूएई और इराक मुख्य व्यापारिक साझेदार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्रतिबंध हटाए या परमाणु समझौता बहाल किए ईरान की मुद्रा और व्यापार स्थिर करना कठिन रहेगा।
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