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रोहित–विराट के बाद वनडे क्रिकेट का भविष्य अधर में, ICC–BCCI को दी गई कड़ी चेतावनी
स्पोर्ट्स डेस्क
अश्विन और इरफान पठान बोले—द्विपक्षीय सीरीज और ज्यादा टूर्नामेंट्स से घट रही दिलचस्पी, फॉर्मेट बचाने के लिए बड़े ढांचागत बदलाव जरूरी
वनडे क्रिकेट का भविष्य एक बार फिर बहस के केंद्र में है। भारत के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली के संभावित संन्यास को लेकर पूर्व क्रिकेटरों ने चेतावनी दी है कि 2027 विश्व कप के बाद यह फॉर्मेट अपनी प्रासंगिकता खो सकता है। पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और ऑलराउंडर इरफान पठान ने आईसीसी और बीसीसीआई को वनडे क्रिकेट को बचाने के लिए ठोस संरचनात्मक बदलाव करने की सलाह दी है।
कोविड-19 के बाद से अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में वनडे मैचों की संख्या लगातार घटती गई है। पांच मैचों की द्विपक्षीय वनडे सीरीज लगभग खत्म हो चुकी हैं और अधिकांश टीमें तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेल रही हैं। वनडे क्रिकेट अब मुख्य रूप से सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता दिख रहा है। इसी पृष्ठभूमि में अश्विन ने चिंता जताई कि रोहित और विराट जैसे स्टार खिलाड़ियों के हटते ही दर्शकों की दिलचस्पी और कम हो सकती है।
अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ में कहा कि 2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को सामान्यतः सीमित दर्शक ही फॉलो करते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भीड़ उमड़ पड़ी। अश्विन के अनुसार, यह दर्शाता है कि फिलहाल वनडे क्रिकेट काफी हद तक बड़े नामों पर निर्भर है।
अश्विन ने आईसीसी के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से ओवरडोज जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि आईसीसी को फुटबॉल की तर्ज पर चार साल में एक बार ही वनडे विश्व कप कराना चाहिए, ताकि इस इवेंट की अहमियत बनी रहे और दर्शकों में उत्सुकता कायम रहे।
पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जताई है। उन्होंने सुझाव दिया कि द्विपक्षीय सीरीज की जगह ट्राई और क्वाड्रेंगुलर सीरीज को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इरफान के मुताबिक, ज्यादा टीमों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और दर्शकों की रुचि भी लौट सकती है।
बीसीसीआई और आईसीसी फिलहाल इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कैलेंडर, फॉर्मेट और मार्केटिंग रणनीति में बदलाव नहीं किए गए, तो वनडे क्रिकेट टेस्ट और टी-20 के बीच दबता चला जाएगा। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि क्रिकेट की शीर्ष संस्थाएं इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती हैं।
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