- Hindi News
- देश विदेश
- विजय साई रेड्डी आंध्र में बनाएंगे नई पार्टी, राजनीति में फिर वापसी
विजय साई रेड्डी आंध्र में बनाएंगे नई पार्टी, राजनीति में फिर वापसी
भारत
तिरुमला में ऐलान के बाद बढ़ी सियासी हलचल, इस महीने विजयवाड़ा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का रोडमैप बताएंगे पूर्व सांसद
आंध्र प्रदेश की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल बढ़ गई, जब पूर्व राज्यसभा सांसद और YSR कांग्रेस पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता वी. विजय साई रेड्डी ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया। तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में साई रेड्डी ने कहा कि वह राज्य में राजनीति के एक नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित पार्टी आम लोगों को केंद्र में रखकर काम करेगी और जनता की समस्याओं को विधानसभा से लेकर संसद तक उठाने का मंच देगी। हालांकि अभी पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह, संगठन का ढांचा या किसी राजनीतिक दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। साई रेड्डी ने कहा कि पार्टी बनाने की प्रक्रिया इसी महीने शुरू की जाएगी और विजयवाड़ा में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह अपने राजनीतिक रोडमैप के बारे में विस्तार से बताएंगे। उनका यह ऐलान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी और राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था।
विजय साई रेड्डी ने तिरुमला में कहा कि प्रस्तावित राजनीतिक संगठन का मकसद आम लोगों को ज्यादा मजबूत राजनीतिक आवाज देना होगा। उन्होंने इसे ऐसी पार्टी के रूप में पेश किया, जो लोगों के लिए और लोगों के साथ काम करेगी। उनके मुताबिक राज्य की राजनीति में एक नए दौर की जरूरत है और वह इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया कि पार्टी किस विचारधारा पर चलेगी, उसका संगठन किस तरह तैयार होगा और आने वाले चुनावों में किन सीटों पर ध्यान दिया जाएगा। पार्टी में दूसरे नेताओं की भूमिका को लेकर भी कोई नाम सामने नहीं आया है। विजयवाड़ा में प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वहां वह अपनी आगे की रणनीति, संगठन बनाने की योजना और राजनीतिक प्राथमिकताओं को सार्वजनिक कर सकते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि साई रेड्डी ने सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता चुन लिया है।
विजय साई रेड्डी की राजनीतिक पृष्ठभूमि YS परिवार से काफी पुरानी रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर करियर शुरू करने वाले साई रेड्डी लंबे समय तक वाईएस जगन मोहन रेड्डी के करीबी सहयोगियों में रहे। YSR कांग्रेस पार्टी में उन्हें संगठन और दिल्ली की राजनीति से जुड़े अहम कामों की जिम्मेदारी मिली थी। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय दल के नेता भी रहे। 2016 में वह पहली बार आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे और करीब नौ साल तक उच्च सदन में रहे। इस दौरान संसद में YSRCP का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में उनका नाम शामिल रहा। दिल्ली में पार्टी के राजनीतिक संपर्कों और केंद्र से जुड़े मुद्दों पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। जगन मोहन रेड्डी के साथ उनकी नजदीकी सिर्फ राजनीतिक नहीं थी, बल्कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। यही वजह है कि नई पार्टी बनाने का उनका फैसला YSRCP के लिए भी राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गया है।
साई रेड्डी ने जनवरी 2025 में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह राजनीति से अलग होकर खेती और दूसरे कामों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उनकी राज्यसभा सीट की अवधि में तीन साल से ज्यादा समय बाकी था, फिर भी उन्होंने इस्तीफा दिया था। अब करीब 18 महीने बाद उनका राजनीतिक मैदान में लौटने का फैसला उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। उस समय साई रेड्डी ने राजनीति छोड़ने का फैसला निजी कारणों और खेती पर ध्यान देने की बात कहते हुए किया था, लेकिन अब वह खुद नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं।
उनकी वापसी ऐसे समय हुई है जब आंध्र प्रदेश में YSRCP विपक्ष में है और एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है। 2024 के विधानसभा चुनाव में YSRCP को बड़ा झटका लगा था और तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार बनाई थी। ऐसे माहौल में साई रेड्डी की अलग पार्टी बनाने की घोषणा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि नई पार्टी का प्रभाव किन इलाकों में होगा या वह YSRCP के वोट बैंक को कितना प्रभावित कर पाएगी। साई रेड्डी लंबे समय तक YSRCP के भीतर रणनीतिक भूमिका में रहे हैं, इसलिए उन्हें पार्टी के संगठन और उसके समर्थक वर्ग की अच्छी जानकारी है। दूसरी तरफ, डेढ़ साल से सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद नई पार्टी के लिए जमीनी संगठन खड़ा करना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी। अभी उन्होंने चुनाव लड़ने की समयसीमा या उम्मीदवारों को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी है।
साई रेड्डी की राजनीतिक वापसी के साथ उनके पुराने विवाद और कानूनी मामले भी चर्चा में हैं। वह जगन मोहन रेड्डी के साथ कई पुराने CBI मामलों में आरोपी बनाए गए थे। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोप दर्ज किए गए थे। ये आरोप और अदालत में चल रही कार्यवाही हैं, किसी दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं। इसके अलावा काकीनाडा पोर्ट से जुड़े मामले और YSRCP शासन के दौरान कथित शराब घोटाले की जांच में भी उनका नाम सामने आया है। ऐसे मामलों की पृष्ठभूमि के बीच उनका नई पार्टी बनाना राजनीतिक तौर पर और ज्यादा ध्यान खींच रहा है। साई रेड्डी ने अभी अपनी नई पार्टी के नाम या उसके चुनावी एजेंडे की घोषणा नहीं की है।
नई पार्टी के ऐलान से पहले भी साई रेड्डी के दोबारा राजनीति में आने को लेकर अटकलें चलती रही थीं। अप्रैल 2026 में उनके बयानों के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उस समय उनके फिर से सक्रिय राजनीति में लौटने और नई पार्टी की संभावना को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं। अब तिरुमला में उनके बयान के बाद यह बात पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आई है कि वह खुद एक राजनीतिक संगठन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल पार्टी के नाम और औपचारिक घोषणा की तारीख का इंतजार है। साई रेड्डी ने कहा है कि इस महीने विजयवाड़ा में वह अपनी आगे की रणनीति सामने रखेंगे, जहां यह भी पता चल सकता है कि पार्टी किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और संगठन को किस तरह खड़ा किया जाएगा।
विजय साई रेड्डी आंध्र में बनाएंगे नई पार्टी, राजनीति में फिर वापसी
भारत
आंध्र प्रदेश की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल बढ़ गई, जब पूर्व राज्यसभा सांसद और YSR कांग्रेस पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता वी. विजय साई रेड्डी ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया। तिरुमला में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में साई रेड्डी ने कहा कि वह राज्य में राजनीति के एक नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित पार्टी आम लोगों को केंद्र में रखकर काम करेगी और जनता की समस्याओं को विधानसभा से लेकर संसद तक उठाने का मंच देगी। हालांकि अभी पार्टी का नाम, चुनाव चिन्ह, संगठन का ढांचा या किसी राजनीतिक दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है। साई रेड्डी ने कहा कि पार्टी बनाने की प्रक्रिया इसी महीने शुरू की जाएगी और विजयवाड़ा में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह अपने राजनीतिक रोडमैप के बारे में विस्तार से बताएंगे। उनका यह ऐलान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी और राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था।
विजय साई रेड्डी ने तिरुमला में कहा कि प्रस्तावित राजनीतिक संगठन का मकसद आम लोगों को ज्यादा मजबूत राजनीतिक आवाज देना होगा। उन्होंने इसे ऐसी पार्टी के रूप में पेश किया, जो लोगों के लिए और लोगों के साथ काम करेगी। उनके मुताबिक राज्य की राजनीति में एक नए दौर की जरूरत है और वह इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने अभी यह नहीं बताया कि पार्टी किस विचारधारा पर चलेगी, उसका संगठन किस तरह तैयार होगा और आने वाले चुनावों में किन सीटों पर ध्यान दिया जाएगा। पार्टी में दूसरे नेताओं की भूमिका को लेकर भी कोई नाम सामने नहीं आया है। विजयवाड़ा में प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वहां वह अपनी आगे की रणनीति, संगठन बनाने की योजना और राजनीतिक प्राथमिकताओं को सार्वजनिक कर सकते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि साई रेड्डी ने सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता चुन लिया है।
विजय साई रेड्डी की राजनीतिक पृष्ठभूमि YS परिवार से काफी पुरानी रही है। चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर करियर शुरू करने वाले साई रेड्डी लंबे समय तक वाईएस जगन मोहन रेड्डी के करीबी सहयोगियों में रहे। YSR कांग्रेस पार्टी में उन्हें संगठन और दिल्ली की राजनीति से जुड़े अहम कामों की जिम्मेदारी मिली थी। वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय दल के नेता भी रहे। 2016 में वह पहली बार आंध्र प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे और करीब नौ साल तक उच्च सदन में रहे। इस दौरान संसद में YSRCP का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में उनका नाम शामिल रहा। दिल्ली में पार्टी के राजनीतिक संपर्कों और केंद्र से जुड़े मुद्दों पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। जगन मोहन रेड्डी के साथ उनकी नजदीकी सिर्फ राजनीतिक नहीं थी, बल्कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं। यही वजह है कि नई पार्टी बनाने का उनका फैसला YSRCP के लिए भी राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गया है।
साई रेड्डी ने जनवरी 2025 में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि वह राजनीति से अलग होकर खेती और दूसरे कामों पर ध्यान देना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगे। उनकी राज्यसभा सीट की अवधि में तीन साल से ज्यादा समय बाकी था, फिर भी उन्होंने इस्तीफा दिया था। अब करीब 18 महीने बाद उनका राजनीतिक मैदान में लौटने का फैसला उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है। उस समय साई रेड्डी ने राजनीति छोड़ने का फैसला निजी कारणों और खेती पर ध्यान देने की बात कहते हुए किया था, लेकिन अब वह खुद नई पार्टी बनाने की तैयारी में हैं।
उनकी वापसी ऐसे समय हुई है जब आंध्र प्रदेश में YSRCP विपक्ष में है और एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में है। 2024 के विधानसभा चुनाव में YSRCP को बड़ा झटका लगा था और तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार बनाई थी। ऐसे माहौल में साई रेड्डी की अलग पार्टी बनाने की घोषणा को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि नई पार्टी का प्रभाव किन इलाकों में होगा या वह YSRCP के वोट बैंक को कितना प्रभावित कर पाएगी। साई रेड्डी लंबे समय तक YSRCP के भीतर रणनीतिक भूमिका में रहे हैं, इसलिए उन्हें पार्टी के संगठन और उसके समर्थक वर्ग की अच्छी जानकारी है। दूसरी तरफ, डेढ़ साल से सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद नई पार्टी के लिए जमीनी संगठन खड़ा करना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी। अभी उन्होंने चुनाव लड़ने की समयसीमा या उम्मीदवारों को लेकर भी कोई जानकारी नहीं दी है।
साई रेड्डी की राजनीतिक वापसी के साथ उनके पुराने विवाद और कानूनी मामले भी चर्चा में हैं। वह जगन मोहन रेड्डी के साथ कई पुराने CBI मामलों में आरोपी बनाए गए थे। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोप दर्ज किए गए थे। ये आरोप और अदालत में चल रही कार्यवाही हैं, किसी दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं। इसके अलावा काकीनाडा पोर्ट से जुड़े मामले और YSRCP शासन के दौरान कथित शराब घोटाले की जांच में भी उनका नाम सामने आया है। ऐसे मामलों की पृष्ठभूमि के बीच उनका नई पार्टी बनाना राजनीतिक तौर पर और ज्यादा ध्यान खींच रहा है। साई रेड्डी ने अभी अपनी नई पार्टी के नाम या उसके चुनावी एजेंडे की घोषणा नहीं की है।
नई पार्टी के ऐलान से पहले भी साई रेड्डी के दोबारा राजनीति में आने को लेकर अटकलें चलती रही थीं। अप्रैल 2026 में उनके बयानों के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उस समय उनके फिर से सक्रिय राजनीति में लौटने और नई पार्टी की संभावना को लेकर रिपोर्टें सामने आई थीं। अब तिरुमला में उनके बयान के बाद यह बात पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आई है कि वह खुद एक राजनीतिक संगठन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल पार्टी के नाम और औपचारिक घोषणा की तारीख का इंतजार है। साई रेड्डी ने कहा है कि इस महीने विजयवाड़ा में वह अपनी आगे की रणनीति सामने रखेंगे, जहां यह भी पता चल सकता है कि पार्टी किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और संगठन को किस तरह खड़ा किया जाएगा।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
