US Visa Rule 2026: 3 सितंबर की सुनवाई भारतीय छात्रों के लिए क्यों अहम?

Sandeep Patel

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अमेरिका के F-1 और J-1 वीजा के नए नियम पर 3 सितंबर को अदालत में सुनवाई होगी। जानें 15 सितंबर से लागू होने वाले नए नियम का भारतीय छात्रों पर असर।

F-1 और J-1 वीजा धारकों के लिए अमेरिका के नए तय अवधि वाले नियम को 15 सितंबर से लागू किया जाना है। इससे पहले 3 सितंबर को संघीय अदालत में अहम सुनवाई होगी। अमेरिका में पढ़ाई कर रहे और पढ़ाई के लिए जाने की तैयारी कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए 3 सितंबर 2026 बेहद महत्वपूर्ण तारीख बन गई है। अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के नए नियम को अदालत में चुनौती दी गई है और इस मामले में संघीय अदालत 3 सितंबर को सुनवाई करेगी। नया नियम 15 सितंबर 2026 से लागू होने वाला है।

नए नियम के तहत F-1 छात्र वीजा और J-1 एक्सचेंज विजिटर के लिए लंबे समय से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (D/S) व्यवस्था खत्म होगी। इसके स्थान पर अमेरिका में रहने की एक निश्चित अवधि तय की जाएगी।

3 सितंबर को होगी सुनवाई

नए नियम को लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों, संगठनों और श्रमिक समूहों ने अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विश्वविद्यालयों के लिए अनिश्चितता बढ़ा सकती है। उनका तर्क है कि मौजूदा D/S व्यवस्था छात्रों को तब तक अमेरिका में रहने की अनुमति देती है, जब तक वे अपने कार्यक्रम और इमिग्रेशन नियमों का पालन करते हैं।

3 सितंबर की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि नियम को अस्थायी रूप से रोका जाए या नहीं। हालांकि अंतिम प्रभाव अदालत के आदेश और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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15 सितंबर से नया नियम

DHS ने 17 जुलाई 2026 को अंतिम नियम प्रकाशित किया था। संघीय रजिस्टर के अनुसार इसकी प्रभावी तारीख 15 सितंबर 2026 है। नए नियम में F-1 छात्रों और J-1 एक्सचेंज विजिटर्स को अमेरिका में प्रवेश के समय एक निश्चित अवधि दी जाएगी। यह अवधि आम तौर पर उनके शैक्षणिक या एक्सचेंज कार्यक्रम की अवधि के अनुरूप होगी और चार साल से अधिक नहीं होगी। छात्रों को अपने I-94 रिकॉर्ड में ‘Admit Until Date’ दिखाई देगी। यह तारीख अमेरिका में उनके अधिकृत प्रवास की अंतिम तारीख होगी।

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D/S व्यवस्था में क्या था?

अब तक F-1 छात्रों को सामान्यतः ‘Duration of Status’ के आधार पर अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती थी।इसका मतलब था कि यदि छात्र अपने कोर्स में नामांकित रहता है, इमिग्रेशन नियमों का पालन करता है और अपने कार्यक्रम में सामान्य प्रगति करता है, तो उसे हर बार अलग से निश्चित समाप्ति तारीख के आधार पर रहने की अनुमति नहीं लेनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में यह लचीलापन कम होगा और छात्रों को निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले आवश्यक कार्रवाई करनी होगी।

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अतिरिक्त समय के लिए आवेदन

यदि किसी छात्र को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए निर्धारित अवधि से ज्यादा समय चाहिए, तो उसे USCIS के पास Extension of Stay के लिए आवेदन करना पड़ सकता है। यह स्थिति उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण होगी जिनका कोर्स निर्धारित समय से लंबा हो जाता है या जिन्हें OPT अथवा STEM OPT जैसी आगे की गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय चाहिए। इससे आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और इमिग्रेशन योजना पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

भारतीय छात्रों पर असर

अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र उच्च शिक्षा, शोध और STEM कार्यक्रमों में पढ़ रहे हैं। इसलिए नए नियम का भारतीय छात्रों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से लंबे शैक्षणिक कार्यक्रम, शोध, OPT, STEM OPT, विश्वविद्यालय बदलने या कार्यक्रम में बदलाव करने वाले छात्रों को अपने अधिकृत प्रवास की अवधि पर ज्यादा ध्यान देना होगा। भारतीय छात्रों को अपने पासपोर्ट, वीजा, Form I-20, I-94 और संबंधित इमिग्रेशन रिकॉर्ड की जानकारी अद्यतन रखनी चाहिए।

यात्रा करने वाले छात्र सावधान

नए नियम का एक महत्वपूर्ण पहलू अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी है। विश्वविद्यालयों की ओर से जारी मार्गदर्शन के अनुसार, 15 सितंबर के बाद अमेरिका में दोबारा प्रवेश करने वाले मौजूदा F-1 और J-1 छात्रों को नई निश्चित अवधि के आधार पर प्रवेश दिया जा सकता है। इसलिए भारत आने या किसी अन्य देश की यात्रा करने वाले छात्रों को टिकट बुक करने से पहले अपने विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय से सलाह लेना चाहिए।

F-1 ग्रेस पीरियड भी बदलेगा

नए नियम में F-1 छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाला ग्रेस पीरियड भी 60 दिन से घटाकर 30 दिन किया गया है। इसका असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो पढ़ाई पूरी होने के बाद OPT, नौकरी, ट्रांसफर या अमेरिका से बाहर जाने की योजना बना रहे हैं। इसलिए छात्रों को डिग्री पूरी होने की तारीख और इमिग्रेशन प्रक्रिया के बीच पर्याप्त योजना बनानी होगी।

मौजूदा छात्रों के लिए राहत

नए नियम में मौजूदा छात्रों के लिए कुछ संक्रमण संबंधी प्रावधान भी हैं। 15 सितंबर 2026 से पहले अमेरिका में D/S के तहत मौजूद F-1 और J-1 छात्रों को कुछ परिस्थितियों में अपने मौजूदा कार्यक्रम की समाप्ति तक रहने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तें लागू होंगी। इसलिए सभी मौजूदा छात्रों पर एक जैसा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अदालत के फैसले पर नजर

3 सितंबर की सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है कि 15 सितंबर से लागू होने वाला नया नियम अपनी निर्धारित तारीख पर प्रभावी होगा या अदालत से अस्थायी रोक का सामना करेगा। 18 अगस्त को उच्च शिक्षा और श्रम संगठनों के गठबंधन ने नियम को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था छात्रों और अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए नुकसानदायक हो सकती है। DHS ने चुनौती को खारिज करते हुए नियम का बचाव किया है।

छात्रों को क्या करना चाहिए?

भारतीय और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों को फिलहाल किसी अनौपचारिक सोशल मीडिया जानकारी के आधार पर यात्रा या इमिग्रेशन संबंधी फैसला नहीं लेना चाहिए।

उन्हें अपने विश्वविद्यालय के International Student Office/Designated School Official से संपर्क कर अपनी व्यक्तिगत स्थिति समझनी चाहिए। खासकर जिन छात्रों की यात्रा 15 सितंबर के आसपास है, जिन्हें कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए या जो OPT/STEM OPT की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए नियम और अदालत के आदेश पर नजर रखनी चाहिए। 3 सितंबर की अदालत की सुनवाई और 15 सितंबर की प्रस्तावित प्रभावी तारीख सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। अदालत के आदेश के बाद नियम की स्थिति में बदलाव संभव है।

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