जीवनशैली संबंधी बीमारियों में न्यूट्रास्यूटिकल्स की अहम भूमिका – डॉ. संजय अग्रवाल

Lifestyle

आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ जैसे मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग और तनावजनित समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals) स्वास्थ्य और वेलनेस का नया आधार बनकर उभर रहे हैं। यह उद्योग पोषण (Nutrition) और औषधि विज्ञान (Pharmaceutical Science) का संगम है, जो न सिर्फ बीमारियों की रोकथाम में मदद करता है बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है।

न्यूट्रास्यूटिकल्स क्या होते हैं?

“न्यूट्रास्यूटिकल” शब्द Nutrition + Pharmaceutical का मेल है। ये प्राकृतिक खाद्य स्रोतों से तैयार उत्पाद हैं, जो सामान्य पोषण से कहीं अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ देते हैं। हेल्थ कनाडा के अनुसार, ये ऐसे शुद्ध उत्पाद हैं जिन्हें औषधीय रूपों में उपयोग किया जा सकता है, ताकि स्वास्थ्य सुधार, रोग-निवारण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।


न्यूट्रास्यूटिकल्स की मुख्य श्रेणियाँ

1️⃣ आहार पूरक (Dietary Supplements):
विटामिन, खनिज, ओमेगा-3, प्रोटीन पाउडर और हर्बल कैप्सूल।

2️⃣ फ़ंक्शनल फूड्स (Functional Foods):
पारंपरिक भोजन को विशेष पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है, जैसे – प्रोबायोटिक दही, कैल्शियम युक्त दूध।

3️⃣ चिकित्सीय खाद्य पदार्थ (Medical Foods):
विशेष रोगों (कैंसर, किडनी रोग आदि) के इलाज में सहायक पोषण।


क्यों बढ़ रही है न्यूट्रास्यूटिकल्स की मांग?

  • निवारक स्वास्थ्य देखभाल का चलन: लोग अब इलाज की बजाय बीमारी से बचाव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • लाइफस्टाइल बीमारियों में वृद्धि: मधुमेह, हृदय रोग जैसे मामलों ने लोगों को सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प चुनने पर मजबूर किया है।

  • नवाचार और अनुसंधान: करक्यूमिन (हल्दी), ग्रीन टी, प्रोबायोटिक्स जैसे प्राकृतिक तत्व और नैनोटेक्नोलॉजी आधारित डिलीवरी सिस्टम इस उद्योग को मज़बूत बना रहे हैं।


न्यूट्रास्यूटिकल्स के प्रमुख फायदे

✔️ इन्हें कैप्सूल, पाउडर या ड्रिंक के रूप में आसानी से अपनाया जा सकता है।
✔️ मधुमेह, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में सहायक।
✔️ प्राकृतिक होने के कारण उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद लगते हैं।
✔️ पाचन, मानसिक स्वास्थ्य और इम्युनिटी बढ़ाने में अहम।


सामने आने वाली चुनौतियाँ

  • हर देश में अलग-अलग नियम, जिससे वैश्विक विस्तार कठिन

  • उपभोक्ता के बीच वैज्ञानिक प्रमाणों को लेकर अभी भी संशय

  • उच्च लागत और प्रीमियम प्राइसिंग।

  • कुछ डॉक्टर अभी भी इन्हें सुझाने में झिझकते हैं।


वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

 वैश्विक न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट 2024 में लगभग 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। अनुमान है कि यह 2030 तक 650 बिलियन डॉलर से भी अधिक हो जाएगा।
🇮🇳 भारत में यह उद्योग अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन तेज़ी से बढ़ रहा है। बढ़ती स्वास्थ्य-जागरूकता और सरकारी प्रोत्साहन (FSSAI, AYUSH) से आने वाले समय में यह सेक्टर कई गुना आगे बढ़ सकता है।


मिथाइलकोबालामिन की अहमियत

न्यूट्रास्यूटिकल्स में मिथाइलकोबालामिन (Vitamin B12 का सक्रिय रूप) विशेष महत्व रखता है। यह ऊर्जा उत्पादन, नसों के स्वास्थ्य, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और न्यूरोपैथी जैसी समस्याओं में बेहद लाभकारी है।

न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग न सिर्फ स्वास्थ्य की नई परिभाषा गढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास का भी बड़ा स्रोत बन रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह क्षेत्र स्वास्थ्य सुरक्षा, अनुसंधान और रोजगार सृजन—तीनों ही क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ प्रदान करता है।

“आने वाले वर्षों में न्यूट्रास्यूटिकल्स स्वास्थ्य देखभाल का नया स्तंभ बन सकते हैं, बशर्ते अनुसंधान, स्पष्ट नियम और उपभोक्ता जागरूकता साथ-साथ बढ़ें।” – डॉ. संजय अग्रवाल

अस्वीकरण (Disclaimer):
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। न्यूट्रास्यूटिकल्स या अन्य स्वास्थ्य उत्पादों का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। dainikjagranmpcg.com प्रकाशक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।


 #DrSanjayAgrawal

वैज्ञानिक सलाहकार, एल्कोमैक्स जीबीएन फार्मा ग्रुप, यूएसए

#Nutraceuticals

#PreventiveHealthcare #HealthAndWellness

#LifestyleDiseases

#NutritionScience

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www.dainikjagranmpcg.com
22 Aug 2025 By दैनिक जागरण

जीवनशैली संबंधी बीमारियों में न्यूट्रास्यूटिकल्स की अहम भूमिका – डॉ. संजय अग्रवाल

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न्यूट्रास्यूटिकल्स क्या होते हैं?

“न्यूट्रास्यूटिकल” शब्द Nutrition + Pharmaceutical का मेल है। ये प्राकृतिक खाद्य स्रोतों से तैयार उत्पाद हैं, जो सामान्य पोषण से कहीं अधिक अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ देते हैं। हेल्थ कनाडा के अनुसार, ये ऐसे शुद्ध उत्पाद हैं जिन्हें औषधीय रूपों में उपयोग किया जा सकता है, ताकि स्वास्थ्य सुधार, रोग-निवारण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो।


न्यूट्रास्यूटिकल्स की मुख्य श्रेणियाँ

1️⃣ आहार पूरक (Dietary Supplements):
विटामिन, खनिज, ओमेगा-3, प्रोटीन पाउडर और हर्बल कैप्सूल।

2️⃣ फ़ंक्शनल फूड्स (Functional Foods):
पारंपरिक भोजन को विशेष पोषक तत्वों से समृद्ध किया जाता है, जैसे – प्रोबायोटिक दही, कैल्शियम युक्त दूध।

3️⃣ चिकित्सीय खाद्य पदार्थ (Medical Foods):
विशेष रोगों (कैंसर, किडनी रोग आदि) के इलाज में सहायक पोषण।


क्यों बढ़ रही है न्यूट्रास्यूटिकल्स की मांग?

  • निवारक स्वास्थ्य देखभाल का चलन: लोग अब इलाज की बजाय बीमारी से बचाव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • लाइफस्टाइल बीमारियों में वृद्धि: मधुमेह, हृदय रोग जैसे मामलों ने लोगों को सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प चुनने पर मजबूर किया है।

  • नवाचार और अनुसंधान: करक्यूमिन (हल्दी), ग्रीन टी, प्रोबायोटिक्स जैसे प्राकृतिक तत्व और नैनोटेक्नोलॉजी आधारित डिलीवरी सिस्टम इस उद्योग को मज़बूत बना रहे हैं।


न्यूट्रास्यूटिकल्स के प्रमुख फायदे

✔️ इन्हें कैप्सूल, पाउडर या ड्रिंक के रूप में आसानी से अपनाया जा सकता है।
✔️ मधुमेह, गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में सहायक।
✔️ प्राकृतिक होने के कारण उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद लगते हैं।
✔️ पाचन, मानसिक स्वास्थ्य और इम्युनिटी बढ़ाने में अहम।


सामने आने वाली चुनौतियाँ

  • हर देश में अलग-अलग नियम, जिससे वैश्विक विस्तार कठिन

  • उपभोक्ता के बीच वैज्ञानिक प्रमाणों को लेकर अभी भी संशय

  • उच्च लागत और प्रीमियम प्राइसिंग।

  • कुछ डॉक्टर अभी भी इन्हें सुझाने में झिझकते हैं।


वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

 वैश्विक न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट 2024 में लगभग 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। अनुमान है कि यह 2030 तक 650 बिलियन डॉलर से भी अधिक हो जाएगा।
🇮🇳 भारत में यह उद्योग अभी शुरुआती स्तर पर है, लेकिन तेज़ी से बढ़ रहा है। बढ़ती स्वास्थ्य-जागरूकता और सरकारी प्रोत्साहन (FSSAI, AYUSH) से आने वाले समय में यह सेक्टर कई गुना आगे बढ़ सकता है।


मिथाइलकोबालामिन की अहमियत

न्यूट्रास्यूटिकल्स में मिथाइलकोबालामिन (Vitamin B12 का सक्रिय रूप) विशेष महत्व रखता है। यह ऊर्जा उत्पादन, नसों के स्वास्थ्य, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और न्यूरोपैथी जैसी समस्याओं में बेहद लाभकारी है।

न्यूट्रास्यूटिकल उद्योग न सिर्फ स्वास्थ्य की नई परिभाषा गढ़ रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास का भी बड़ा स्रोत बन रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह क्षेत्र स्वास्थ्य सुरक्षा, अनुसंधान और रोजगार सृजन—तीनों ही क्षेत्रों में अपार संभावनाएँ प्रदान करता है।

“आने वाले वर्षों में न्यूट्रास्यूटिकल्स स्वास्थ्य देखभाल का नया स्तंभ बन सकते हैं, बशर्ते अनुसंधान, स्पष्ट नियम और उपभोक्ता जागरूकता साथ-साथ बढ़ें।” – डॉ. संजय अग्रवाल

अस्वीकरण (Disclaimer):
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) नहीं है। न्यूट्रास्यूटिकल्स या अन्य स्वास्थ्य उत्पादों का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। dainikjagranmpcg.com प्रकाशक इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।


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वैज्ञानिक सलाहकार, एल्कोमैक्स जीबीएन फार्मा ग्रुप, यूएसए

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