अष्टधातु का छल्ला क्यों माना जाता है खास, ग्रह दोष और फिजूलखर्ची से राहत की मान्यता

धर्म डेस्क

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ज्योतिष और आस्था में अष्टधातु के छल्ले का महत्व, धारण करने के नियम और इससे जुड़े लाभ

ज्योतिष और वैदिक परंपराओं में अष्टधातु से बने छल्ले को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि यह छल्ला आठ अलग-अलग धातुओं के संयोजन से तैयार किया जाता है, जिनका संबंध विभिन्न ग्रहों से जोड़ा जाता है। आस्था रखने वाले लोगों का विश्वास है कि इसे सही विधि और नियमों के साथ धारण करने से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में संतुलन आता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अष्टधातु में सोना, चांदी, तांबा, लोहा, पीतल, कांसा, सीसा और जस्ता शामिल होते हैं। इन धातुओं को सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु जैसे ग्रहों से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब ये सभी धातुएं एक साथ धारण की जाती हैं, तो यह ग्रहों के असंतुलन को संतुलित करने में सहायक हो सकती हैं।

कब और कैसे पहनने की परंपरा
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार अष्टधातु का छल्ला मंगलवार या शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। कुछ लोग इसे शुक्ल पक्ष या पूर्णिमा के दिन पहनना अधिक फलदायी मानते हैं। परंपरा के अनुसार छल्ला पहनने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा-पाठ के बाद मंत्रोच्चारण के साथ इसे धारण किया जाता है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके छल्ला पहनने की भी परंपरा बताई जाती है।

उंगली को लेकर भी अलग-अलग मत हैं। ज्योतिष शास्त्र में अनामिका उंगली को सूर्य से और तर्जनी को गुरु से जोड़ा जाता है। इसलिए इन्हीं उंगलियों में अष्टधातु का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी रत्न या धातु को धारण करने से पहले कुंडली का अध्ययन जरूरी है।

आर्थिक संतुलन से जुड़ी मान्यताएं
अष्टधातु के छल्ले को लेकर यह धारणा भी प्रचलित है कि यह व्यक्ति की आर्थिक आदतों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। माना जाता है कि इसे धारण करने से अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण आता है और धन प्रबंधन बेहतर होता है। करियर, नौकरी या व्यापार में आ रही रुकावटों को कम करने से भी इसे जोड़ा जाता है।

कुछ ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि विशेष रूप से मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है। वहीं, जिनकी कुंडली में राहु या शनि की स्थिति कमजोर हो, वे भी इसे धारण करने पर विचार करते हैं।

विशेषज्ञों की सावधानी की सलाह
हालांकि, विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि अष्टधातु का छल्ला कोई चमत्कारी समाधान नहीं है। इसे आस्था और परंपरा के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। किसी भी धातु या रत्न को पहनने से पहले योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि इसका विपरीत असर न पड़े।

कुल मिलाकर, अष्टधातु का छल्ला भारतीय ज्योतिष और आस्था में एक प्रतीकात्मक महत्व रखता है। इसे लेकर विश्वास है कि सही नियमों के साथ धारण करने पर व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है।

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www.dainikjagranmpcg.com
30 Dec 2025 By Nitin Trivedi

अष्टधातु का छल्ला क्यों माना जाता है खास, ग्रह दोष और फिजूलखर्ची से राहत की मान्यता

धर्म डेस्क

ज्योतिष और वैदिक परंपराओं में अष्टधातु से बने छल्ले को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि यह छल्ला आठ अलग-अलग धातुओं के संयोजन से तैयार किया जाता है, जिनका संबंध विभिन्न ग्रहों से जोड़ा जाता है। आस्था रखने वाले लोगों का विश्वास है कि इसे सही विधि और नियमों के साथ धारण करने से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में संतुलन आता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अष्टधातु में सोना, चांदी, तांबा, लोहा, पीतल, कांसा, सीसा और जस्ता शामिल होते हैं। इन धातुओं को सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु जैसे ग्रहों से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब ये सभी धातुएं एक साथ धारण की जाती हैं, तो यह ग्रहों के असंतुलन को संतुलित करने में सहायक हो सकती हैं।

कब और कैसे पहनने की परंपरा
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार अष्टधातु का छल्ला मंगलवार या शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। कुछ लोग इसे शुक्ल पक्ष या पूर्णिमा के दिन पहनना अधिक फलदायी मानते हैं। परंपरा के अनुसार छल्ला पहनने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा-पाठ के बाद मंत्रोच्चारण के साथ इसे धारण किया जाता है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके छल्ला पहनने की भी परंपरा बताई जाती है।

उंगली को लेकर भी अलग-अलग मत हैं। ज्योतिष शास्त्र में अनामिका उंगली को सूर्य से और तर्जनी को गुरु से जोड़ा जाता है। इसलिए इन्हीं उंगलियों में अष्टधातु का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी रत्न या धातु को धारण करने से पहले कुंडली का अध्ययन जरूरी है।

आर्थिक संतुलन से जुड़ी मान्यताएं
अष्टधातु के छल्ले को लेकर यह धारणा भी प्रचलित है कि यह व्यक्ति की आर्थिक आदतों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। माना जाता है कि इसे धारण करने से अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण आता है और धन प्रबंधन बेहतर होता है। करियर, नौकरी या व्यापार में आ रही रुकावटों को कम करने से भी इसे जोड़ा जाता है।

कुछ ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि विशेष रूप से मेष, वृश्चिक, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है। वहीं, जिनकी कुंडली में राहु या शनि की स्थिति कमजोर हो, वे भी इसे धारण करने पर विचार करते हैं।

विशेषज्ञों की सावधानी की सलाह
हालांकि, विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि अष्टधातु का छल्ला कोई चमत्कारी समाधान नहीं है। इसे आस्था और परंपरा के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। किसी भी धातु या रत्न को पहनने से पहले योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि इसका विपरीत असर न पड़े।

कुल मिलाकर, अष्टधातु का छल्ला भारतीय ज्योतिष और आस्था में एक प्रतीकात्मक महत्व रखता है। इसे लेकर विश्वास है कि सही नियमों के साथ धारण करने पर व्यक्ति को मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का अनुभव हो सकता है।

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