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Mahakal Darshan: सावन में दिव्य रूप में सजे बाबा महाकाल, दद्योदक आरती में भक्तों ने किए मनोहारी दर्शन
धर्म डेस्क
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 19 जुलाई 2026 की सुबह श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रही, प्रातःकालीन दद्योदक आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष पूजन और श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए
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ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः... भगवान शिव की नगरी उज्जैन में रविवार, 19 जुलाई 2026 की सुबह एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति के रंग में रंगी दिखाई दी। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकालीन दद्योदक आरती के अवसर पर भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन और आकर्षक श्रृंगार किया गया। सावन के पवित्र माह में ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। सुबह मंदिर परिसर में भगवान शिव के जयकारों और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
बारह ज्योतिर्लिंगों में श्री महाकालेश्वर का विशेष स्थान माना जाता है। यहां भगवान शिव दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी वजह से उज्जैन का महाकाल मंदिर देशभर के शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां की धार्मिक गतिविधियां और अधिक बढ़ जाती हैं। रविवार की सुबह भी मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। अलग-अलग शहरों और राज्यों से पहुंचे भक्त बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए मंदिर पहुंचे।
प्रातःकालीन पूजा परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल की विधि-विधान से आराधना की गई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का पूजन किया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग का मनोहारी श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक दिखाई दिया। आरती के दौरान मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा।
दद्योदक आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर की नियमित धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह होने वाली अलग-अलग पूजा और आरती के क्रम में श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन का अवसर मिलता है। विशेष रूप से सावन के दिनों में बाबा महाकाल के प्रतिदिन होने वाले श्रृंगार को लेकर भक्तों में खास उत्सुकता रहती है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी देश-दुनिया में मौजूद श्रद्धालु महाकाल के दैनिक दर्शन से जुड़ते हैं।
सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान उज्जैन में धार्मिक माहौल अपने चरम पर रहता है। महाकाल मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव को जल अर्पित करने, दर्शन करने और अपनी मनोकामनाओं के साथ प्रार्थना करने आते हैं। रविवार होने के कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के दर्शन को व्यवस्थित रखने के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रवेश कराया जाता है।
भगवान महाकाल के दर्शन के साथ उज्जैन में सावन की अपनी अलग ही छटा दिखाई देती है। सुबह से ही मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। कोई परिवार के साथ बाबा के दर्शन के लिए पहुंचता है तो कोई लंबी दूरी तय करके पहली बार ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आता है। कई श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का उद्घोष करते हुए मंदिर की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां होने वाली दैनिक पूजा-पद्धति और अलग-अलग समय पर भगवान के स्वरूप में होने वाला परिवर्तन है। प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक बाबा महाकाल की सेवा का क्रम चलता रहता है। विभिन्न आरतियों के दौरान भगवान का पूजन और श्रृंगार अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है। इसी कारण प्रतिदिन होने वाले महाकाल दर्शन की तस्वीरें और वीडियो शिवभक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
19 जुलाई की सुबह दद्योदक आरती के समय भी भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। भगवान महाकाल के सजे हुए स्वरूप के सामने श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। मंदिर के गर्भगृह और आसपास के क्षेत्र में मंत्रोच्चार की ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। आरती के दौरान दीपों की रोशनी और भगवान के श्रृंगार ने दर्शन को और भव्य बना दिया।
उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां वर्षभर पहुंचते हैं, लेकिन सावन, महाशिवरात्रि और नागपंचमी जैसे अवसरों पर भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। सावन में सोमवार का विशेष महत्व होने के कारण मंदिर में अतिरिक्त धार्मिक आयोजन भी होते हैं और भगवान महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का प्रमुख आकर्षण बनती है।
मान्यता है कि उज्जैन के राजा के रूप में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी परंपरा के कारण सावन-भादो में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से निकलकर भगवान की पालकी जब शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती है तो पूरा उज्जैन ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठता है।
महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह का समय विशेष धार्मिक अनुभव लेकर आता है। प्रातःकालीन वातावरण, मंदिर की घंटियां, वैदिक मंत्र और बाबा महाकाल के श्रृंगार दर्शन मिलकर एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति देते हैं। कई श्रद्धालु सुबह-सुबह शिप्रा स्नान के बाद महाकाल मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव के दर्शन के साथ अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते हैं।
सावन के कारण उज्जैन में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहने की संभावना है। महाकाल लोक भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद बड़ी संख्या में लोग महाकाल लोक परिसर पहुंचते हैं, जहां भगवान शिव से जुड़ी कथाओं और स्वरूपों को मूर्तियों तथा कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
19 जुलाई के प्रातःकालीन दद्योदक आरती श्रृंगार में बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के साथ मंदिर में शिव आराधना का क्रम जारी रहा। सुबह से श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते रहे और मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा।
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Mahakal Darshan: सावन में दिव्य रूप में सजे बाबा महाकाल, दद्योदक आरती में भक्तों ने किए मनोहारी दर्शन
धर्म डेस्क
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ॐ श्री महाकालेश्वराय नमः... भगवान शिव की नगरी उज्जैन में रविवार, 19 जुलाई 2026 की सुबह एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति के रंग में रंगी दिखाई दी। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकालीन दद्योदक आरती के अवसर पर भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन और आकर्षक श्रृंगार किया गया। सावन के पवित्र माह में ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। सुबह मंदिर परिसर में भगवान शिव के जयकारों और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।
बारह ज्योतिर्लिंगों में श्री महाकालेश्वर का विशेष स्थान माना जाता है। यहां भगवान शिव दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी वजह से उज्जैन का महाकाल मंदिर देशभर के शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां की धार्मिक गतिविधियां और अधिक बढ़ जाती हैं। रविवार की सुबह भी मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। अलग-अलग शहरों और राज्यों से पहुंचे भक्त बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए मंदिर पहुंचे।
प्रातःकालीन पूजा परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल की विधि-विधान से आराधना की गई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का पूजन किया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग का मनोहारी श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत आकर्षक दिखाई दिया। आरती के दौरान मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा।
दद्योदक आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर की नियमित धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह होने वाली अलग-अलग पूजा और आरती के क्रम में श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन का अवसर मिलता है। विशेष रूप से सावन के दिनों में बाबा महाकाल के प्रतिदिन होने वाले श्रृंगार को लेकर भक्तों में खास उत्सुकता रहती है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी देश-दुनिया में मौजूद श्रद्धालु महाकाल के दैनिक दर्शन से जुड़ते हैं।
सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान उज्जैन में धार्मिक माहौल अपने चरम पर रहता है। महाकाल मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव को जल अर्पित करने, दर्शन करने और अपनी मनोकामनाओं के साथ प्रार्थना करने आते हैं। रविवार होने के कारण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं के दर्शन को व्यवस्थित रखने के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रवेश कराया जाता है।
भगवान महाकाल के दर्शन के साथ उज्जैन में सावन की अपनी अलग ही छटा दिखाई देती है। सुबह से ही मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। कोई परिवार के साथ बाबा के दर्शन के लिए पहुंचता है तो कोई लंबी दूरी तय करके पहली बार ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने आता है। कई श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का उद्घोष करते हुए मंदिर की ओर बढ़ते दिखाई देते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां होने वाली दैनिक पूजा-पद्धति और अलग-अलग समय पर भगवान के स्वरूप में होने वाला परिवर्तन है। प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक बाबा महाकाल की सेवा का क्रम चलता रहता है। विभिन्न आरतियों के दौरान भगवान का पूजन और श्रृंगार अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के अनुसार किया जाता है। इसी कारण प्रतिदिन होने वाले महाकाल दर्शन की तस्वीरें और वीडियो शिवभक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं।
19 जुलाई की सुबह दद्योदक आरती के समय भी भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। भगवान महाकाल के सजे हुए स्वरूप के सामने श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की। मंदिर के गर्भगृह और आसपास के क्षेत्र में मंत्रोच्चार की ध्वनि ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। आरती के दौरान दीपों की रोशनी और भगवान के श्रृंगार ने दर्शन को और भव्य बना दिया।
उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर केवल मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां वर्षभर पहुंचते हैं, लेकिन सावन, महाशिवरात्रि और नागपंचमी जैसे अवसरों पर भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। सावन में सोमवार का विशेष महत्व होने के कारण मंदिर में अतिरिक्त धार्मिक आयोजन भी होते हैं और भगवान महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का प्रमुख आकर्षण बनती है।
मान्यता है कि उज्जैन के राजा के रूप में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी परंपरा के कारण सावन-भादो में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से निकलकर भगवान की पालकी जब शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती है तो पूरा उज्जैन ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठता है।
महाकाल मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुबह का समय विशेष धार्मिक अनुभव लेकर आता है। प्रातःकालीन वातावरण, मंदिर की घंटियां, वैदिक मंत्र और बाबा महाकाल के श्रृंगार दर्शन मिलकर एक अलग आध्यात्मिक अनुभूति देते हैं। कई श्रद्धालु सुबह-सुबह शिप्रा स्नान के बाद महाकाल मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव के दर्शन के साथ अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते हैं।
सावन के कारण उज्जैन में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी रहने की संभावना है। महाकाल लोक भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। महाकाल मंदिर में दर्शन के बाद बड़ी संख्या में लोग महाकाल लोक परिसर पहुंचते हैं, जहां भगवान शिव से जुड़ी कथाओं और स्वरूपों को मूर्तियों तथा कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
19 जुलाई के प्रातःकालीन दद्योदक आरती श्रृंगार में बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के साथ मंदिर में शिव आराधना का क्रम जारी रहा। सुबह से श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते रहे और मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा।
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