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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर शिवलिंग पर अर्पित करें ये 5 पवित्र पत्ते, धन और सौभाग्य के लिए विशेष योग
धर्म डेस्क
माघ मास की अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व, ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सही विधि से पूजन करने पर आर्थिक तंगी से मिल सकती है राहत
माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 18 जनवरी 2026 को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान और मौन व्रत के साथ भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्रों में बताया गया है कि मौनी अमावस्या पर शिवलिंग पर कुछ विशेष पत्ते अर्पित करने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन में धन, स्थिरता और समृद्धि आती है।
क्यों खास है मौनी अमावस्या
मौनी अमावस्या को आत्मशुद्धि और संयम का पर्व माना जाता है। देशभर में गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों पर श्रद्धालु स्नान और तर्पण के लिए एकत्र होते हैं। यह पर्व पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रशासन द्वारा तीर्थ स्थलों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारियां की जाती हैं।
शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले विशेष पत्ते
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर आक के पत्ते अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। आक का पौधा शिव को प्रिय है और इसे चढ़ाने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा अपामार्ग के पत्ते भी शिव पूजा में विशेष स्थान रखते हैं। मान्यता है कि इन्हें अर्पित करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
शमी के पत्ते भी इस दिन शिवलिंग पर चढ़ाए जाते हैं। शमी को पवित्र माना गया है और इसे अर्पित करने से जीवन के कष्टों में कमी आने की बात कही जाती है।
बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। मौनी अमावस्या पर बेलपत्र और जल अर्पित करने से आर्थिक समस्याओं से राहत मिलने की मान्यता है।
धतूरे के पत्ते और फल भी शिव पूजा का अहम हिस्सा हैं। इन्हें चढ़ाने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की बात कही जाती है।
कैसे करें शिव पूजा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर या गुड़ और गंगाजल का प्रयोग किया जाता है। अंत में बेलपत्र और उपरोक्त पत्ते अर्पित कर शिव मंत्रों का जाप किया जाता है।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य व्यक्ति को संयम, आस्था और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करना है। हालांकि, यह मान्यताएं परंपरा और विश्वास पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।
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