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भागीरथपुरा हादसे पर सियासी टकराव तेज, मंत्री सिलावट और महिला कांग्रेस अध्यक्ष आमने-सामने
इंदौर (म.प्र.)
राहुल गांधी के दौरे पर सवाल, जवाब में सरकार की भूमिका पर हमला
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब यह मामला केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि सियासी संघर्ष का केंद्र बन गया है। भाजपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे पर संवेदनहीनता और राजनीति करने के आरोप लगा रहे हैं। बयानबाज़ी इतनी तेज हो गई है कि मुद्दा राहत और जिम्मेदारी से ज्यादा आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटता दिख रहा है।
सरकारी पक्ष का कहना है कि जैसे ही स्थिति गंभीर हुई, प्रशासन और सरकार ने मोर्चा संभाल लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद प्रभावित इलाके का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अधिकारियों को साफ पानी, मुफ्त इलाज और सफाई व्यवस्था तत्काल मजबूत करने के निर्देश दिए। सरकार का दावा है कि समय रहते उठाए गए कदमों से हालात काबू में आए।
भाजपा का आरोप: देर से दौरा, संवेदना नहीं राजनीति
जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब हालात सबसे भयावह थे, तब कांग्रेस का कोई बड़ा नेता नजर नहीं आया। अब जब स्थिति स्थिर हो चुकी है, तब दौरा करना संवेदना नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। सिलावट ने कहा कि संकट के वक्त सरकार मैदान में थी और अब कांग्रेस मौके की तलाश कर रही है।
कांग्रेस का जवाब: सरकार 20 दिन तक कहां थी?
भाजपा के आरोपों पर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के दौरे पर सवाल उठाने से पहले भाजपा यह बताए कि हादसे के बाद बीते 20 दिनों तक सरकार के कई मंत्री और जनप्रतिनिधि कहां थे।
रीना बोरासी ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार लंबे समय तक मदद के लिए भटकते रहे, जबकि सरकार अब अपनी कार्रवाई को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिन का दौरा और तस्वीरें खिंचवाना संवेदनशीलता नहीं होती। सवाल यह है कि इन 20 दिनों में सरकार ने जमीनी स्तर पर कितना काम किया?
भागीरथपुरा त्रासदी पर अब राजनीति और प्रशासन आमने-सामने हैं। एक तरफ सरकार अपनी त्वरित कार्रवाई का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे देर से जागी व्यवस्था और प्रचार का हिस्सा बता रहा है। फिलहाल, इस सियासी घमासान के बीच पीड़ित परिवार अब भी स्थायी समाधान और जवाबदेही की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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