242 अवैध ऑनलाइन गेमिंग लिंक ब्लॉक: सरकार की बड़ी कार्रवाई, अब तक 7,800 से ज्यादा वेबसाइट्स बंद

बिजनेस डेस्क

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ऑनलाइन गेमिंग कानून लागू होने के बाद सख्ती तेज, युवाओं को सट्टेबाजी की लत से बचाने पर फोकस; ई-स्पोर्ट्स को मिलेगा प्रोत्साहन

केंद्र सरकार ने देश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए शुक्रवार को 242 ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट्स और ऐप्स के लिंक्स ब्लॉक करने के आदेश जारी किए। यह कदम प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 लागू होने के बाद अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य युवाओं को त्वरित धन के लालच, वित्तीय नुकसान और सामाजिक दुष्प्रभावों से बचाना है।

क्या हुआ और क्यों जरूरी माना गया
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म रियल-मनी गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे, जो नए कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद से अब तक 7,800 से अधिक अवैध ऑनलाइन गेमिंग और जुआ वेबसाइट्स को ब्लॉक किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म कमजोर वर्गों और युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें कर्ज और मानसिक तनाव की ओर धकेलते हैं।

कब और कैसे बना कानून
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से संबंधित विधेयक पारित कराया था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून लागू हुआ। इसके तहत स्किल बेस्ड और चांस बेस्ड, दोनों तरह के रियल-मनी गेम्स पर रोक लगा दी गई है।

कानून में क्या प्रावधान हैं
नए नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति या कंपनी रियल-मनी गेम्स का संचालन, प्रचार या विज्ञापन नहीं कर सकती। उल्लंघन की स्थिति में तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। विज्ञापन देने वालों पर भी सख्त दंड तय किया गया है। हालांकि, गेम खेलने वाले आम यूजर्स को सजा के दायरे में नहीं रखा गया है।

युवाओं और समाज पर असर
सरकारी प्रेस नोट में कहा गया है कि अवैध ऑनलाइन मनी गेमिंग के कारण कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की बचत गंवाई है। कुछ मामलों में अत्यधिक कर्ज और मानसिक दबाव के चलते आत्मघाती घटनाएं भी सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही गेमिंग डिसऑर्डर को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता दे चुका है।

ई-स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और जिम्मेदार बनाना है। नए कानून के तहत ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक और नॉन-मनी सोशल गेम्स को बढ़ावा दिया जाएगा। पबजी, फ्री फायर जैसे प्रतिस्पर्धी ई-स्पोर्ट्स गेम्स को क्रिएटिव इकोनॉमी और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

आने वाले महीनों में एक विशेष रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित की जाएगी, जो गेम्स के रजिस्ट्रेशन, निगरानी और वर्गीकरण का काम करेगी। सरकार का दावा है कि इससे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और यूजर्स का शोषण रुकेगा।

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www.dainikjagranmpcg.com
17 Jan 2026 By Nitin Trivedi

242 अवैध ऑनलाइन गेमिंग लिंक ब्लॉक: सरकार की बड़ी कार्रवाई, अब तक 7,800 से ज्यादा वेबसाइट्स बंद

बिजनेस डेस्क

केंद्र सरकार ने देश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए शुक्रवार को 242 ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट्स और ऐप्स के लिंक्स ब्लॉक करने के आदेश जारी किए। यह कदम प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 लागू होने के बाद अब तक की सबसे बड़ी एकल कार्रवाई मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य युवाओं को त्वरित धन के लालच, वित्तीय नुकसान और सामाजिक दुष्प्रभावों से बचाना है।

क्या हुआ और क्यों जरूरी माना गया
सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म रियल-मनी गेमिंग, सट्टेबाजी और जुए से जुड़े थे, जो नए कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद से अब तक 7,800 से अधिक अवैध ऑनलाइन गेमिंग और जुआ वेबसाइट्स को ब्लॉक किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म कमजोर वर्गों और युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें कर्ज और मानसिक तनाव की ओर धकेलते हैं।

कब और कैसे बना कानून
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सरकार ने 20 अगस्त 2025 को लोकसभा और 21 अगस्त को राज्यसभा से संबंधित विधेयक पारित कराया था। 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून लागू हुआ। इसके तहत स्किल बेस्ड और चांस बेस्ड, दोनों तरह के रियल-मनी गेम्स पर रोक लगा दी गई है।

कानून में क्या प्रावधान हैं
नए नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति या कंपनी रियल-मनी गेम्स का संचालन, प्रचार या विज्ञापन नहीं कर सकती। उल्लंघन की स्थिति में तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। विज्ञापन देने वालों पर भी सख्त दंड तय किया गया है। हालांकि, गेम खेलने वाले आम यूजर्स को सजा के दायरे में नहीं रखा गया है।

युवाओं और समाज पर असर
सरकारी प्रेस नोट में कहा गया है कि अवैध ऑनलाइन मनी गेमिंग के कारण कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की बचत गंवाई है। कुछ मामलों में अत्यधिक कर्ज और मानसिक दबाव के चलते आत्मघाती घटनाएं भी सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही गेमिंग डिसऑर्डर को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में मान्यता दे चुका है।

ई-स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य ऑनलाइन गेमिंग को खत्म करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और जिम्मेदार बनाना है। नए कानून के तहत ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक और नॉन-मनी सोशल गेम्स को बढ़ावा दिया जाएगा। पबजी, फ्री फायर जैसे प्रतिस्पर्धी ई-स्पोर्ट्स गेम्स को क्रिएटिव इकोनॉमी और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

आने वाले महीनों में एक विशेष रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित की जाएगी, जो गेम्स के रजिस्ट्रेशन, निगरानी और वर्गीकरण का काम करेगी। सरकार का दावा है कि इससे ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और यूजर्स का शोषण रुकेगा।

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