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पिशाच योग बनने पर बढ़ सकती हैं मानसिक और आर्थिक परेशानियां, समाधान के लिए अपनाएं ये उपाय
धर्म डेस्क
पिशाच योग बनने पर मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। जानें ज्योतिष में बताए गए इसके प्रभाव और आसान उपाय।
ज्योतिष शास्त्र में पिशाच योग को अशुभ योगों में गिना जाता है। माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बन जाए तो उसके जीवन में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगती हैं। मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावट, पारिवारिक विवाद और डर जैसी स्थितियां लगातार बनी रह सकती हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जिस भाव में पिशाच योग बनता है, उस भाव से जुड़े शुभ फल कमजोर पड़ने लगते हैं। यही वजह है कि कई लोग मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलने की शिकायत करते हैं। बताया जा रहा है कि इस योग का असर व्यक्ति की सोच और व्यवहार पर भी दिखाई देता है। कई बार बिना कारण बेचैनी, डर या नकारात्मक विचार बने रहते हैं। ऐसे में लोग ज्योतिषीय उपायों की मदद लेते हैं ताकि जीवन की परेशानियां कुछ कम हो सकें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पाप ग्रह माने जाने वाले शनि, राहु और केतु विशेष स्थिति में आ जाते हैं तो पिशाच योग का निर्माण होता है। कहा जाता है कि अगर कुंडली के केंद्र भाव यानी प्रथम, चतुर्थ या सप्तम भाव में शनि के साथ राहु या केतु की युति हो जाए तो यह योग बन सकता है। इसके अलावा अष्टम और द्वादश भाव में भी इसकी स्थिति को अशुभ माना गया है। कुछ ज्योतिष विशेषज्ञ गुरु-केतु और राहु-गुरु की युति को भी पिशाच योग जैसा प्रभाव देने वाला बताते हैं। जानकारी के मुताबिक इस योग का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है। किसी को मानसिक दबाव ज्यादा महसूस होता है तो किसी को आर्थिक मामलों में रुकावटें आने लगती हैं। पारिवारिक संबंधों में तनाव और आत्मविश्वास में कमी भी इसके प्रभावों में शामिल मानी जाती है। कई बार व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर डर या घबराहट बनी रहती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पिशाच योग के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ आसान उपाय बताए जाते हैं। नियमित रूप से हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना शुभ माना गया है, खासकर मंगलवार और शनिवार को। शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करने और शनि चालीसा पढ़ने की सलाह भी दी जाती है। राहु के लिए ‘ओम रां राहवे नमः’ और केतु के लिए ‘ओम कें केतवे नमः’ मंत्र का जाप लाभकारी माना जाता है। कई लोग पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और जरूरतमंदों को काले तिल, काला छाता या अन्य वस्तुओं का दान करते हैं। भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी मानसिक शांति देने वाला माना गया है। गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान और केले के पेड़ में जल चढ़ाने की परंपरा भी बताई जाती है। हालांकि ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि किसी भी उपाय को करने से पहले कुंडली का सही विश्लेषण जरूर कराना चाहिए ताकि ग्रहों की स्थिति को ठीक से समझा जा सके।
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पिशाच योग बनने पर बढ़ सकती हैं मानसिक और आर्थिक परेशानियां, समाधान के लिए अपनाएं ये उपाय
धर्म डेस्क
ज्योतिष शास्त्र में पिशाच योग को अशुभ योगों में गिना जाता है। माना जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बन जाए तो उसके जीवन में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगती हैं। मानसिक तनाव, आर्थिक रुकावट, पारिवारिक विवाद और डर जैसी स्थितियां लगातार बनी रह सकती हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जिस भाव में पिशाच योग बनता है, उस भाव से जुड़े शुभ फल कमजोर पड़ने लगते हैं। यही वजह है कि कई लोग मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलने की शिकायत करते हैं। बताया जा रहा है कि इस योग का असर व्यक्ति की सोच और व्यवहार पर भी दिखाई देता है। कई बार बिना कारण बेचैनी, डर या नकारात्मक विचार बने रहते हैं। ऐसे में लोग ज्योतिषीय उपायों की मदद लेते हैं ताकि जीवन की परेशानियां कुछ कम हो सकें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पाप ग्रह माने जाने वाले शनि, राहु और केतु विशेष स्थिति में आ जाते हैं तो पिशाच योग का निर्माण होता है। कहा जाता है कि अगर कुंडली के केंद्र भाव यानी प्रथम, चतुर्थ या सप्तम भाव में शनि के साथ राहु या केतु की युति हो जाए तो यह योग बन सकता है। इसके अलावा अष्टम और द्वादश भाव में भी इसकी स्थिति को अशुभ माना गया है। कुछ ज्योतिष विशेषज्ञ गुरु-केतु और राहु-गुरु की युति को भी पिशाच योग जैसा प्रभाव देने वाला बताते हैं। जानकारी के मुताबिक इस योग का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है। किसी को मानसिक दबाव ज्यादा महसूस होता है तो किसी को आर्थिक मामलों में रुकावटें आने लगती हैं। पारिवारिक संबंधों में तनाव और आत्मविश्वास में कमी भी इसके प्रभावों में शामिल मानी जाती है। कई बार व्यक्ति खुद को अकेला महसूस करने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर डर या घबराहट बनी रहती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पिशाच योग के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ आसान उपाय बताए जाते हैं। नियमित रूप से हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करना शुभ माना गया है, खासकर मंगलवार और शनिवार को। शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करने और शनि चालीसा पढ़ने की सलाह भी दी जाती है। राहु के लिए ‘ओम रां राहवे नमः’ और केतु के लिए ‘ओम कें केतवे नमः’ मंत्र का जाप लाभकारी माना जाता है। कई लोग पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और जरूरतमंदों को काले तिल, काला छाता या अन्य वस्तुओं का दान करते हैं। भगवान शिव की पूजा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी मानसिक शांति देने वाला माना गया है। गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान और केले के पेड़ में जल चढ़ाने की परंपरा भी बताई जाती है। हालांकि ज्योतिषाचार्य सलाह देते हैं कि किसी भी उपाय को करने से पहले कुंडली का सही विश्लेषण जरूर कराना चाहिए ताकि ग्रहों की स्थिति को ठीक से समझा जा सके।
