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शनिवार के पावन उपायों से शनिदेव को करें प्रसन्न, कष्टों से मुक्ति के लिए उमड़ी श्रद्धा
धर्म डेस्क
पीपल पूजन, दीपदान, हनुमान आराधना और दान-पुण्य का विशेष महत्व; शनि कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग
शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। आज देशभर में श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से शनिदेव की पूजा-अर्चना की और जीवन के कष्टों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की कामना की। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत पाने के लिए मंदिरों, पीपल वृक्षों और हनुमान मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
सुबह से ही भक्तजन शनि मंदिरों और हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने लगे। दिनभर पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा, जबकि संध्या समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर श्रद्धालुओं ने शनिदेव का आह्वान किया। मान्यता है कि पीपल वृक्ष में देवताओं का वास होता है और यहां दीपदान करने से शनि की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
धार्मिक आस्थाओं के अनुसार, शनिवार के दिन हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ कर प्रभु से रक्षा और शक्ति की प्रार्थना की। मान्यता है कि जो भक्त हनुमान जी की शरण में रहते हैं, उन्हें शनिदेव के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
आज के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व देखा गया। भक्तों ने जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल, काले वस्त्र, जूते और लोहे की वस्तुएं दान कीं। शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे मन से किया गया दान न केवल पापों का क्षय करता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का संचार करता है।
मंत्र जाप भी आज के उपायों का प्रमुख हिस्सा रहा। श्रद्धालुओं ने ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ और ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ मंत्रों का जाप कर शनिदेव से कृपा की कामना की। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन मंत्रों के नियमित जाप से मानसिक शांति, धैर्य और आत्मबल में वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि शनिवार के दिन संयम और सदाचार का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। किसी का अपमान न करना, असत्य से दूर रहना और सेवा भाव रखना ही शनिदेव को प्रसन्न करने का सच्चा मार्ग है। वहीं लोहा, तेल और काले वस्त्र खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
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शनिवार के पावन उपायों से शनिदेव को करें प्रसन्न, कष्टों से मुक्ति के लिए उमड़ी श्रद्धा
धर्म डेस्क
शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। आज देशभर में श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से शनिदेव की पूजा-अर्चना की और जीवन के कष्टों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की कामना की। शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत पाने के लिए मंदिरों, पीपल वृक्षों और हनुमान मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
सुबह से ही भक्तजन शनि मंदिरों और हनुमान मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने लगे। दिनभर पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहा, जबकि संध्या समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर श्रद्धालुओं ने शनिदेव का आह्वान किया। मान्यता है कि पीपल वृक्ष में देवताओं का वास होता है और यहां दीपदान करने से शनि की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
धार्मिक आस्थाओं के अनुसार, शनिवार के दिन हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं ने हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ कर प्रभु से रक्षा और शक्ति की प्रार्थना की। मान्यता है कि जो भक्त हनुमान जी की शरण में रहते हैं, उन्हें शनिदेव के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
आज के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व देखा गया। भक्तों ने जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल, काले वस्त्र, जूते और लोहे की वस्तुएं दान कीं। शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे मन से किया गया दान न केवल पापों का क्षय करता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का संचार करता है।
मंत्र जाप भी आज के उपायों का प्रमुख हिस्सा रहा। श्रद्धालुओं ने ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ और ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ मंत्रों का जाप कर शनिदेव से कृपा की कामना की। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन मंत्रों के नियमित जाप से मानसिक शांति, धैर्य और आत्मबल में वृद्धि होती है।
धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि शनिवार के दिन संयम और सदाचार का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। किसी का अपमान न करना, असत्य से दूर रहना और सेवा भाव रखना ही शनिदेव को प्रसन्न करने का सच्चा मार्ग है। वहीं लोहा, तेल और काले वस्त्र खरीदने से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
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