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छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसा: 20 मौतों के बाद अनिल अग्रवाल समेत 10 पर FIR
रायपुर (छ.ग.)
सक्ती के वेदांता प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट की जांच में लापरवाही उजागर, ज्यादा फ्यूल और दबाव बना हादसे की वजह
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत प्रबंधन से जुड़े 8-10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 लोग झुलस गए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि डभरा थाने में दर्ज मामले में प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नामजद किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मशीनों के रखरखाव में लापरवाही हादसे का प्रमुख कारण रही।
औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में फ्यूल जमा हो जाने से अचानक दबाव बढ़ा, जिससे पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया। यह घटना 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2:33 बजे हुई, जब प्लांट में उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाया जा रहा था। बताया गया कि 350 मेगावाट से लोड बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया, जिससे सिस्टम पर अत्यधिक दबाव पड़ा।
जांच में यह भी सामने आया है कि तकनीकी चेतावनियों के बावजूद काम नहीं रोका गया। पीए फैन में खराबी, अनबर्न फ्यूल का जमा होना और बैकअप सिस्टम का समय पर काम न करना भी हादसे की वजह बना। FSL रिपोर्ट ने भी बॉयलर में दबाव बढ़ने और पाइपिंग सिस्टम फेल होने की पुष्टि की है।
घटना के बाद राज्य सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर मांगी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।
हादसे के बाद घायलों का इलाज रायगढ़ और रायपुर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और अन्य जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना।
वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और नौकरी देने का ऐलान किया है, जबकि घायलों को 15-15 लाख रुपए सहायता दी जाएगी। वहीं प्रधानमंत्री राहत कोष और राज्य सरकार की ओर से भी अलग-अलग मुआवजे की घोषणा की गई है।
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छत्तीसगढ़ पावर प्लांट हादसा: 20 मौतों के बाद अनिल अग्रवाल समेत 10 पर FIR
रायपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत प्रबंधन से जुड़े 8-10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 36 लोग झुलस गए, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि डभरा थाने में दर्ज मामले में प्लांट हेड देवेंद्र पटेल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को नामजद किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मशीनों के रखरखाव में लापरवाही हादसे का प्रमुख कारण रही।
औद्योगिक सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार, बॉयलर फर्नेस में अत्यधिक मात्रा में फ्यूल जमा हो जाने से अचानक दबाव बढ़ा, जिससे पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया। यह घटना 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2:33 बजे हुई, जब प्लांट में उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाया जा रहा था। बताया गया कि 350 मेगावाट से लोड बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया, जिससे सिस्टम पर अत्यधिक दबाव पड़ा।
जांच में यह भी सामने आया है कि तकनीकी चेतावनियों के बावजूद काम नहीं रोका गया। पीए फैन में खराबी, अनबर्न फ्यूल का जमा होना और बैकअप सिस्टम का समय पर काम न करना भी हादसे की वजह बना। FSL रिपोर्ट ने भी बॉयलर में दबाव बढ़ने और पाइपिंग सिस्टम फेल होने की पुष्टि की है।
घटना के बाद राज्य सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर मांगी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।
हादसे के बाद घायलों का इलाज रायगढ़ और रायपुर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और अन्य जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना।
वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए और नौकरी देने का ऐलान किया है, जबकि घायलों को 15-15 लाख रुपए सहायता दी जाएगी। वहीं प्रधानमंत्री राहत कोष और राज्य सरकार की ओर से भी अलग-अलग मुआवजे की घोषणा की गई है।
