स्पेस में बढ़ता खतरा: 2025 में 18 बार टकराव से बचे भारतीय सैटेलाइट, इसरो ने बदला रास्ता

अंतराष्ट्रीय न्यूज

On

1.5 लाख अलर्ट के बीच इसरो की सतर्कता, अंतरिक्ष मलबे से बढ़ा जोखिम; चंद्रयान-2 को भी कई बार बदलनी पड़ी कक्षा

अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे के खतरे के बीच भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ‘इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस रिपोर्ट-2025’ के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीय सैटेलाइट्स को संभावित टकराव से बचाने के लिए 18 बार उनकी कक्षा में बदलाव करना पड़ा। यह स्थिति अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ और मलबे के खतरे को स्पष्ट करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो को साल भर में करीब 1.5 लाख से अधिक अलर्ट मिले। ये अलर्ट मुख्य रूप से अमेरिकी स्पेस कमांड से प्राप्त हुए, जिनका भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्लेषण कर सटीक ऑर्बिटल डेटा के साथ मिलान किया। इन अलर्ट्स ने संकेत दिया कि लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) अब बेहद संवेदनशील और जोखिमपूर्ण क्षेत्र बन चुका है।

संभावित टकराव से बचने के लिए इसरो ने 18 बार ‘कोलिजन अवॉइडेंस मैन्यूवर’ किया। इनमें से 14 बार LEO में स्थित उपग्रहों के लिए और 4 बार जियो स्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) में मौजूद सैटेलाइट्स के लिए कक्षा बदली गई। इस प्रक्रिया में उपग्रह की गति और ऊंचाई में बदलाव कर उसे मलबे से दूर किया जाता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अंतरिक्ष में मलबा 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। ऐसे में एक छोटा सा टुकड़ा भी सैटेलाइट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। वर्तमान में अंतरिक्ष में 10 सेंटीमीटर से बड़े लगभग 40,000 और 1 सेंटीमीटर से बड़े करीब 12 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं।

गहरे अंतरिक्ष मिशनों पर भी इसका असर पड़ा है। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर को 2025 में 16 बार अपनी कक्षा बदलनी पड़ी। इसके अलावा, नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से संभावित टकराव से बचने के लिए दो बार मिशन प्लानिंग में बदलाव किया गया।

इसरो ने अपने सभी पांच लॉन्च मिशनों के दौरान भी सतर्कता बरती। एक मामले में एलवीएम3-एम6 मिशन की लॉन्चिंग को 41 सेकंड तक टालना पड़ा, ताकि मलबे से सुरक्षित दूरी सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में वैश्विक स्तर पर 328 लॉन्च प्रयास हुए, जिनमें 4,198 सैटेलाइट्स स्थापित किए गए। इससे अंतरिक्ष में कुल 4,651 नए ऑब्जेक्ट्स जुड़ गए, जिससे भीड़ और खतरा दोनों बढ़े हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस समस्या से निपटने के प्रयास जारी हैं। अमेरिका उन्नत रडार और सेंसर से मलबे की ट्रैकिंग कर रहा है, जबकि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है। जापान और चीन भी मलबा हटाने की नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

-----------------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए

www.dainikjagranmpcg.com
17 Apr 2026 By ANKITA

स्पेस में बढ़ता खतरा: 2025 में 18 बार टकराव से बचे भारतीय सैटेलाइट, इसरो ने बदला रास्ता

अंतराष्ट्रीय न्यूज

अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे के खतरे के बीच भारतीय उपग्रहों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ‘इंडियन स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस रिपोर्ट-2025’ के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीय सैटेलाइट्स को संभावित टकराव से बचाने के लिए 18 बार उनकी कक्षा में बदलाव करना पड़ा। यह स्थिति अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ और मलबे के खतरे को स्पष्ट करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो को साल भर में करीब 1.5 लाख से अधिक अलर्ट मिले। ये अलर्ट मुख्य रूप से अमेरिकी स्पेस कमांड से प्राप्त हुए, जिनका भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्लेषण कर सटीक ऑर्बिटल डेटा के साथ मिलान किया। इन अलर्ट्स ने संकेत दिया कि लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) अब बेहद संवेदनशील और जोखिमपूर्ण क्षेत्र बन चुका है।

संभावित टकराव से बचने के लिए इसरो ने 18 बार ‘कोलिजन अवॉइडेंस मैन्यूवर’ किया। इनमें से 14 बार LEO में स्थित उपग्रहों के लिए और 4 बार जियो स्टेशनरी ऑर्बिट (GEO) में मौजूद सैटेलाइट्स के लिए कक्षा बदली गई। इस प्रक्रिया में उपग्रह की गति और ऊंचाई में बदलाव कर उसे मलबे से दूर किया जाता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अंतरिक्ष में मलबा 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। ऐसे में एक छोटा सा टुकड़ा भी सैटेलाइट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। वर्तमान में अंतरिक्ष में 10 सेंटीमीटर से बड़े लगभग 40,000 और 1 सेंटीमीटर से बड़े करीब 12 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं।

गहरे अंतरिक्ष मिशनों पर भी इसका असर पड़ा है। चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर को 2025 में 16 बार अपनी कक्षा बदलनी पड़ी। इसके अलावा, नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर से संभावित टकराव से बचने के लिए दो बार मिशन प्लानिंग में बदलाव किया गया।

इसरो ने अपने सभी पांच लॉन्च मिशनों के दौरान भी सतर्कता बरती। एक मामले में एलवीएम3-एम6 मिशन की लॉन्चिंग को 41 सेकंड तक टालना पड़ा, ताकि मलबे से सुरक्षित दूरी सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 में वैश्विक स्तर पर 328 लॉन्च प्रयास हुए, जिनमें 4,198 सैटेलाइट्स स्थापित किए गए। इससे अंतरिक्ष में कुल 4,651 नए ऑब्जेक्ट्स जुड़ गए, जिससे भीड़ और खतरा दोनों बढ़े हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस समस्या से निपटने के प्रयास जारी हैं। अमेरिका उन्नत रडार और सेंसर से मलबे की ट्रैकिंग कर रहा है, जबकि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है। जापान और चीन भी मलबा हटाने की नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/increasing-danger-in-space-indian-satellite-saved-from-collision-18/article-51424

खबरें और भी हैं

नेपाल में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई: 7 पूर्व PM, 3 राष्ट्रपति और पूर्व राजा जांच के दायरे में

टाप न्यूज

नेपाल में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई: 7 पूर्व PM, 3 राष्ट्रपति और पूर्व राजा जांच के दायरे में

2006 के बाद की पूरी राजनीतिक व्यवस्था की संपत्ति जांच, 100 से ज्यादा मंत्री-अधिकारी भी रडार पर
देश विदेश  टॉप न्यूज़ 
नेपाल में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई: 7 पूर्व PM, 3 राष्ट्रपति और पूर्व राजा जांच के दायरे में

IPL 2026: गुजरात टाइटंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स आज, जीत की तलाश में KKR

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मुकाबला, गुजरात का पलड़ा भारी; कोलकाता की पहली जीत पर नजर
स्पोर्ट्स 
IPL 2026: गुजरात टाइटंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स आज, जीत की तलाश में KKR

डी कॉक का तूफानी शतक, धोनी का रिकॉर्ड टूटा; पंजाब ने मुंबई को 7 विकेट से हराया

IPL 2026 में क्विंटन डी कॉक की 112 रन की नाबाद पारी, श्रेयस अय्यर के कैच ने मैच पलटा
स्पोर्ट्स 
डी कॉक का तूफानी शतक, धोनी का रिकॉर्ड टूटा; पंजाब ने मुंबई को 7 विकेट से हराया

प्रेम विवाह में आ रही बाधाएं? ज्योतिष के इन उपायों से आसान हो सकती है शादी की राह

शुक्र ग्रह की मजबूती, पूजा और मंत्र जाप से मिल सकती है राहत; जानिए सरल उपाय
राशिफल  धर्म 
प्रेम विवाह में आ रही बाधाएं? ज्योतिष के इन उपायों से आसान हो सकती है शादी की राह

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.