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मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते के दाह संस्कार पर विवाद, निगम कर्मचारी पर कार्रवाई
बिलासपुर (छ.ग.)
बिलासपुर में ₹2 हजार लेकर अनुमति देने का आरोप; कर्मचारी को हटाया गया, कमिश्नर ने पैसे लेने की शिकायत की जांच के निर्देश दिए
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए टास्क कर्मचारी रेखा सिंह को पद से हटा दिया। आरोप है कि कर्मचारी की ओर से कथित तौर पर 2 हजार रुपए लेकर पालतू कुत्ते के शव के दाह संस्कार की अनुमति दी गई थी। घटना के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया।
मामला तोरवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हुई और नगर निगम के अधिकारियों तक शिकायत पहुंची। इसके बाद निगम की ओर से संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई। महापौर पूजा विधानी ने बताया कि मामले की जानकारी पार्षद मोतीलाल गंगवानी के माध्यम से उन्हें मिली थी। इसके बाद अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विवाद का मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किया गया, वह इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाला मुक्तिधाम है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी को उसके पद से हटा दिया।
₹2 हजार लेने का लगाया गया आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप नगर निगम कर्मचारी पर पैसे लेने को लेकर है। शिकायत के मुताबिक, कथित तौर पर ₹2 हजार लेकर पालतू कुत्ते के अंतिम संस्कार की अनुमति दी गई थी। हालांकि, पैसे लेने का आरोप अभी जांच के दायरे में है और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। नगर निगम कमिश्नर ने भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारी या केयरटेकर द्वारा पैसे लिए जाने के आरोप की जांच कराई जाएगी। प्रशासन यह पता लगाएगा कि क्या वास्तव में किसी कर्मचारी ने रकम लेकर वहां अंतिम संस्कार की अनुमति दी थी और इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
महापौर को पार्षद ने दी थी जानकारी
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पार्षद मोतीलाल गंगवानी ने इसे महापौर पूजा विधानी के संज्ञान में लाया। महापौर ने अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद निगम की ओर से संबंधित टास्क कर्मचारी रेखा सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई की गई। नगर निगम की ओर से अब मामले के दूसरे पहलुओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पालतू पशु के अंतिम संस्कार के लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई और वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका क्या थी।
निगम के पास पशुओं के अंतिम संस्कार की अलग व्यवस्था नहीं
नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि शहर में मृत पालतू पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए निगम की ओर से कोई अलग मुक्तिधाम या दाह संस्कार की व्यवस्था नहीं है। निगम के स्वच्छता विभाग के कर्मचारी आमतौर पर मृत पशुओं को निर्धारित डंपिंग यार्ड तक ले जाते हैं और वहां उन्हें दफनाया जाता है। ऐसे में मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किस परिस्थिति में कराया गया, इसकी जानकारी भी जांच में जुटाई जा रही है। निगम प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित कर्मचारी को इस तरह की अनुमति देने का अधिकार था या नहीं।
कार्रवाई के बाद जांच पर नजर
कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई के साथ अब पैसे लेने के आरोप की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। निगम प्रशासन की ओर से यह भी देखा जाएगा कि इस मामले में केवल कर्मचारी की भूमिका थी या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें संलिप्तता रही। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। मामले के सामने आने के बाद मुक्तिधाम के इस्तेमाल और मृत पशुओं के निपटारे की नगर निगम व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है।
मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते के दाह संस्कार पर विवाद, निगम कर्मचारी पर कार्रवाई
बिलासपुर (छ.ग.)
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए टास्क कर्मचारी रेखा सिंह को पद से हटा दिया। आरोप है कि कर्मचारी की ओर से कथित तौर पर 2 हजार रुपए लेकर पालतू कुत्ते के शव के दाह संस्कार की अनुमति दी गई थी। घटना के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया।
मामला तोरवा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा शुरू हुई और नगर निगम के अधिकारियों तक शिकायत पहुंची। इसके बाद निगम की ओर से संबंधित कर्मचारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई। महापौर पूजा विधानी ने बताया कि मामले की जानकारी पार्षद मोतीलाल गंगवानी के माध्यम से उन्हें मिली थी। इसके बाद अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विवाद का मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किया गया, वह इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाला मुक्तिधाम है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी को उसके पद से हटा दिया।
₹2 हजार लेने का लगाया गया आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप नगर निगम कर्मचारी पर पैसे लेने को लेकर है। शिकायत के मुताबिक, कथित तौर पर ₹2 हजार लेकर पालतू कुत्ते के अंतिम संस्कार की अनुमति दी गई थी। हालांकि, पैसे लेने का आरोप अभी जांच के दायरे में है और इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। नगर निगम कमिश्नर ने भी स्पष्ट किया है कि कर्मचारी या केयरटेकर द्वारा पैसे लिए जाने के आरोप की जांच कराई जाएगी। प्रशासन यह पता लगाएगा कि क्या वास्तव में किसी कर्मचारी ने रकम लेकर वहां अंतिम संस्कार की अनुमति दी थी और इस पूरी प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
महापौर को पार्षद ने दी थी जानकारी
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पार्षद मोतीलाल गंगवानी ने इसे महापौर पूजा विधानी के संज्ञान में लाया। महापौर ने अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद निगम की ओर से संबंधित टास्क कर्मचारी रेखा सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई की गई। नगर निगम की ओर से अब मामले के दूसरे पहलुओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें यह देखा जा रहा है कि पालतू पशु के अंतिम संस्कार के लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई और वहां मौजूद कर्मचारियों की भूमिका क्या थी।
निगम के पास पशुओं के अंतिम संस्कार की अलग व्यवस्था नहीं
नगर निगम कमिश्नर ने बताया कि शहर में मृत पालतू पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए निगम की ओर से कोई अलग मुक्तिधाम या दाह संस्कार की व्यवस्था नहीं है। निगम के स्वच्छता विभाग के कर्मचारी आमतौर पर मृत पशुओं को निर्धारित डंपिंग यार्ड तक ले जाते हैं और वहां उन्हें दफनाया जाता है। ऐसे में मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते का अंतिम संस्कार किस परिस्थिति में कराया गया, इसकी जानकारी भी जांच में जुटाई जा रही है। निगम प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित कर्मचारी को इस तरह की अनुमति देने का अधिकार था या नहीं।
कार्रवाई के बाद जांच पर नजर
कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई के साथ अब पैसे लेने के आरोप की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। निगम प्रशासन की ओर से यह भी देखा जाएगा कि इस मामले में केवल कर्मचारी की भूमिका थी या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें संलिप्तता रही। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। मामले के सामने आने के बाद मुक्तिधाम के इस्तेमाल और मृत पशुओं के निपटारे की नगर निगम व्यवस्था भी चर्चा में आ गई है।
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