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नशे में धुत शिक्षक स्कूल पहुंचा, बच्चों के सामने किया हंगामा; वीडियो वायरल, शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दिए
Digital Desk
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड स्थित वंदना प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षक के नशे की हालत में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। वीडियो में शिक्षक शराब पीने की बात स्वीकार करते हुए स्कूल परिसर में उठक-बैठक करता नजर आ रहा है। मामले को गंभीर मानते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, प्राइमरी स्कूल बालक वंदना में पदस्थ शिक्षक राज प्रताप सिंह शुक्रवार को नशे की हालत में स्कूल पहुंचे। उस दिन स्कूल की हेडमास्टर अवकाश पर थीं, जबकि एक अन्य शिक्षक अनुपस्थित था। ऐसे में प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों की जिम्मेदारी उसी शिक्षक पर थी।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक की हालत सामान्य नहीं थी और वह ठीक से बातचीत भी नहीं कर पा रहा था। बच्चों की स्थिति को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने स्थानीय पत्रकारों को सूचना दी। पत्रकारों के स्कूल पहुंचने पर शिक्षक ने शराब पीने की बात स्वीकार की।
वीडियो में शिक्षक यह कहते हुए दिखाई देता है कि उसने “20 रुपए में आधा गिलास देसी शराब” पी थी। इसके बाद वह अपनी गलती मानते हुए स्वयं को दंड देने के नाम पर उठक-बैठक करने लगा। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

स्कूल में 60 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं, हालांकि उस दिन उपस्थिति अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। इसके बावजूद, स्कूल समय में शिक्षक का नशे की हालत में होना गंभीर अनुशासनहीनता माना जा रहा है।
मैनपाट खंड शिक्षा अधिकारी योगेश शाही ने कहा कि वीडियो में शिक्षक द्वारा शराब सेवन की पुष्टि हो रही है। उन्होंने बताया कि मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है और नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। “इस तरह की घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की साख को प्रभावित करती हैं,” उन्होंने कहा।
बीईओ ने यह भी बताया कि संबंधित शिक्षक के खिलाफ पहले भी शराब सेवन की शिकायत मिल चुकी थी, जिस पर नोटिस जारी किया गया था। उस समय शिक्षक ने सुधार का भरोसा दिया था, लेकिन ताजा घटना से उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। वीडियो फुटेज, ग्रामीणों के बयान और पूर्व रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला सरकारी स्कूलों में अनुशासन, निगरानी और शिक्षकों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गया है।
