- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए
गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए
Digital Desk
मोबाइल हैक कर साइबर अपराधियों ने तीन बार में निकाली रकम, पुलिस जांच में जुटी
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने ‘गूगल अपडेट’ के नाम पर एक ठेकेदार का मोबाइल फोन हैक कर उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए पार कर दिए। मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगों ने एक फर्जी अपडेट मैसेज भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर बैंक खाते से तीन बार में रकम निकाल ली।
जानकारी के अनुसार शंकर नगर दुर्ग निवासी महेंद्र कुमार देशलहरा ठेकेदारी का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 22 मई 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर गूगल अपडेट से जुड़ा एक मैसेज आया था। सामान्य सिस्टम अपडेट समझकर उन्होंने उस लिंक को खोल दिया। बताया जा रहा है कि लिंक ओपन करते ही मोबाइल की स्क्रीन कुछ देर के लिए फ्रीज हो गई। इसके बाद फोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। कई ऐप अपने आप बंद होने लगे और मोबाइल बार-बार हैंग हो रहा था।
महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद फोन में तकनीकी दिक्कत आ गई है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बैंक खाते से रकम कटने के मैसेज आने लगे। सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनके बंधन बैंक खाते से 94 हजार 999 रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके एक मिनट बाद ही 5 हजार 1 रुपए फिर खाते से निकल गए। लगातार दो ट्रांजेक्शन होने के बाद वे कुछ समझ पाते, उससे पहले अगले दिन 23 मई को शाम करीब 4 बजे फिर 99 हजार 500 रुपए खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 99 हजार 500 रुपए की ठगी हो गई।
पीड़ित का कहना है कि ठगी के दौरान उनका मोबाइल पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका था। फोन में कोई भी कमांड सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। बैंकिंग ऐप खुल नहीं रहा था और कई सिस्टम अपने आप एक्टिव और बंद हो रहे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि साइबर ठगों ने किसी रिमोट एक्सेस एप या मालवेयर के जरिए मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई।
लगातार रकम कटने के बाद महेंद्र कुमार ने सबसे पहले बैंक से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मोहन नगर थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल, साइबर कंप्लेन की कॉपी और मोबाइल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे फोन कर ठगी करने के बजाय मोबाइल हैकिंग के जरिए वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फर्जी अपडेट लिंक, APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार अगर यूजर गलती से लिंक खोल देता है तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, OTP और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन जाती है।
कई लोग फोन में आने वाले अपडेट मैसेज को असली समझकर तुरंत क्लिक कर देते हैं। यही जल्दबाजी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, एप या अपडेट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासकर बैंकिंग से जुड़े काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर फोन अचानक हैंग होने लगे, अपने आप ऐप खुलने लगें या बैंकिंग गतिविधियां संदिग्ध दिखें तो तुरंत इंटरनेट बंद कर बैंक और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।
दुर्ग पुलिस अब ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की टीम बैंकिंग ट्रेल और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच जारी है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
गूगल अपडेट के नाम पर ठगी, दुर्ग के ठेकेदार के खाते से उड़े 1.99 लाख रुपए
Digital Desk
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार साइबर अपराधियों ने ‘गूगल अपडेट’ के नाम पर एक ठेकेदार का मोबाइल फोन हैक कर उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए पार कर दिए। मामला मोहन नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगों ने एक फर्जी अपडेट मैसेज भेजकर मोबाइल का एक्सेस हासिल किया और फिर बैंक खाते से तीन बार में रकम निकाल ली।
जानकारी के अनुसार शंकर नगर दुर्ग निवासी महेंद्र कुमार देशलहरा ठेकेदारी का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 22 मई 2026 की सुबह उनके मोबाइल पर गूगल अपडेट से जुड़ा एक मैसेज आया था। सामान्य सिस्टम अपडेट समझकर उन्होंने उस लिंक को खोल दिया। बताया जा रहा है कि लिंक ओपन करते ही मोबाइल की स्क्रीन कुछ देर के लिए फ्रीज हो गई। इसके बाद फोन असामान्य तरीके से काम करने लगा। कई ऐप अपने आप बंद होने लगे और मोबाइल बार-बार हैंग हो रहा था।
महेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद फोन में तकनीकी दिक्कत आ गई है, लेकिन थोड़ी ही देर बाद बैंक खाते से रकम कटने के मैसेज आने लगे। सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनके बंधन बैंक खाते से 94 हजार 999 रुपए ट्रांसफर हो गए। इसके एक मिनट बाद ही 5 हजार 1 रुपए फिर खाते से निकल गए। लगातार दो ट्रांजेक्शन होने के बाद वे कुछ समझ पाते, उससे पहले अगले दिन 23 मई को शाम करीब 4 बजे फिर 99 हजार 500 रुपए खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 99 हजार 500 रुपए की ठगी हो गई।
पीड़ित का कहना है कि ठगी के दौरान उनका मोबाइल पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका था। फोन में कोई भी कमांड सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। बैंकिंग ऐप खुल नहीं रहा था और कई सिस्टम अपने आप एक्टिव और बंद हो रहे थे। ऐसा कहा जा रहा है कि साइबर ठगों ने किसी रिमोट एक्सेस एप या मालवेयर के जरिए मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। इसी का फायदा उठाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई।
लगातार रकम कटने के बाद महेंद्र कुमार ने सबसे पहले बैंक से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। बाद में मोहन नगर थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत दी। शिकायत के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की डिटेल, साइबर कंप्लेन की कॉपी और मोबाइल से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे फोन कर ठगी करने के बजाय मोबाइल हैकिंग के जरिए वारदात को अंजाम दे रहे हैं। फर्जी अपडेट लिंक, APK फाइल और स्क्रीन शेयरिंग ऐप इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एक बार अगर यूजर गलती से लिंक खोल देता है तो मोबाइल में मौजूद बैंकिंग ऐप, पासवर्ड, OTP और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन जाती है।
कई लोग फोन में आने वाले अपडेट मैसेज को असली समझकर तुरंत क्लिक कर देते हैं। यही जल्दबाजी भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान लिंक, एप या अपडेट को बिना जांचे-परखे डाउनलोड नहीं करना चाहिए। खासकर बैंकिंग से जुड़े काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अगर फोन अचानक हैंग होने लगे, अपने आप ऐप खुलने लगें या बैंकिंग गतिविधियां संदिग्ध दिखें तो तुरंत इंटरनेट बंद कर बैंक और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए।
दुर्ग पुलिस अब ट्रांजेक्शन डिटेल और मोबाइल डेटा के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर सेल की टीम बैंकिंग ट्रेल और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जानकारी जुटा रही है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई है ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच जारी है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
