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रायपुर में 26 साल से रह रहा बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, दस्तावेजों की जांच
रायपुर (छ.ग.)
संजय नगर में किराए के मकान से पकड़ा गया रेहान, पुलिस के मुताबिक मैकेनिक बनकर रह रहा था और भारतीय दस्तावेज भी बनवाए
रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने संजय नगर इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से रायपुर में रह रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान शेख रेहान के तौर पर हुई है और उसकी उम्र करीब 31 साल है। बताया जा रहा है कि रेहान बचपन में अपने माता-पिता के साथ रायपुर आया था और इसके बाद यहीं रहकर गाड़ी मैकेनिक का काम करने लगा। पुलिस का दावा है कि वह करीब 26 साल तक रायपुर में रहा। सोमवार को पुलिस को उसके संजय नगर में मौजूद होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने इलाके में दबिश दी और उसे पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके रहने की जगह और उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि रेहान संजय नगर में किराए के मकान में रह रहा था और टिकरापारा इलाके में उसकी एक छोटी मैकेनिक की दुकान भी थी। पुलिस के मुताबिक, वह वाहनों की मरम्मत का काम करके स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका था। आसपास के लोगों के बीच भी उसकी पहचान एक मैकेनिक के रूप में ही बताई जा रही है। मामला तब सामने आया जब पुलिस को उसके दोबारा रायपुर लौटने और यहां रहने की सूचना मिली। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल बांग्लादेशी नागरिकों और कथित अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया था।
इसी दौरान रेहान अपने माता-पिता के साथ बांग्लादेश चला गया था। कुछ समय वहां रहने के बाद वह कथित तौर पर दोबारा रायपुर पहुंचा और संजय नगर में बिना ज्यादा जानकारी दिए रहने लगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह किस रास्ते से भारत आया और रायपुर पहुंचने के बाद उसने किन लोगों के संपर्क में रहकर ठिकाना बनाया। उसके आने-जाने और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में दस्तावेजों की पड़ताल सबसे अहम है, क्योंकि आरोपी के पास भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज होने की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, उसके नाम से आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार किए गए थे।
इसके अलावा भारतीय पासपोर्ट भी बनाए जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह जांच रही है कि ये दस्तावेज कब और किस आधार पर बने, आवेदन के समय कौन-कौन से कागजात लगाए गए थे और इनमें किसी तरह की गलत जानकारी दी गई थी या नहीं। दस्तावेजों की प्रक्रिया में किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है। आरोपी के पास मौजूद दस्तावेजों को पुलिस ने जांच के दायरे में लिया है।
पुलिस के मुताबिक रेहान के माता-पिता भी पहले रायपुर में रह चुके हैं और परिवार लंबे समय तक शहर में रहा। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2000 के आसपास जब रेहान करीब पांच साल का था, तब वह अपने माता-पिता के साथ रायपुर आया था। इसके बाद उसकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी यहीं बीती। लंबे समय तक शहर में रहने के कारण उसने स्थानीय स्तर पर कामकाज भी शुरू कर दिया। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि वह बांग्लादेश में अपने पैतृक गांव पार्वतीपुर आता-जाता रहा। अधिकारियों के अनुसार, इन यात्राओं के लिए उसने वीजा का इस्तेमाल किया था।
पुलिस अब उसके पुराने यात्रा रिकॉर्ड और भारत-बांग्लादेश के बीच आने-जाने की जानकारी भी खंगाल रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह कब-कब बांग्लादेश गया और किस दस्तावेज के आधार पर वापस भारत आया। मामले में पुलिस उसके परिजनों की भी तलाश कर रही है। बताया गया है कि कार्रवाई के बाद उसके माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्यों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि परिवार के अन्य लोगों की वर्तमान स्थिति क्या है और वे कहां रह रहे हैं।
जांच टीम आरोपी के पुराने पते, किराए के मकान और मैकेनिक की दुकान से जुड़े रिकॉर्ड भी देख रही है। संजय नगर में वह कितने समय से रह रहा था, मकान किससे किराए पर लिया और किरायेदारी से संबंधित कोई दस्तावेज जमा किया गया था या नहीं, इन बिंदुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। टिकरापारा पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपी से उसकी पहचान, परिवार, रायपुर में रहने की अवधि और बांग्लादेश से जुड़े उसके संबंधों के बारे में जानकारी ली है। उसके पास मिले दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित विभागों से कराया जा रहा है। पुलिस की जांच में अगर दस्तावेजों के निर्माण में नियमों की अनदेखी या किसी तरह की धोखाधड़ी सामने आती है तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि इतने लंबे समय तक उसके रायपुर में रहने के दौरान स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान किस तरह दर्ज रही और अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड में उसका नाम किस रूप में दर्ज हुआ। पिछले साल चलाए गए अभियान के दौरान उसके बांग्लादेश जाने और हाल में रायपुर लौटने के बीच की पूरी जानकारी भी जांच में शामिल की जा रही है। इस दौरान उसके यात्रा दस्तावेज, पहचान पत्र और स्थानीय रिकॉर्ड को मिलाया जा रहा है।
रायपुर में 26 साल से रह रहा बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार, दस्तावेजों की जांच
रायपुर (छ.ग.)
रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने संजय नगर इलाके से एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से रायपुर में रह रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान शेख रेहान के तौर पर हुई है और उसकी उम्र करीब 31 साल है। बताया जा रहा है कि रेहान बचपन में अपने माता-पिता के साथ रायपुर आया था और इसके बाद यहीं रहकर गाड़ी मैकेनिक का काम करने लगा। पुलिस का दावा है कि वह करीब 26 साल तक रायपुर में रहा। सोमवार को पुलिस को उसके संजय नगर में मौजूद होने की जानकारी मिली, जिसके बाद टीम ने इलाके में दबिश दी और उसे पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके रहने की जगह और उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि रेहान संजय नगर में किराए के मकान में रह रहा था और टिकरापारा इलाके में उसकी एक छोटी मैकेनिक की दुकान भी थी। पुलिस के मुताबिक, वह वाहनों की मरम्मत का काम करके स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका था। आसपास के लोगों के बीच भी उसकी पहचान एक मैकेनिक के रूप में ही बताई जा रही है। मामला तब सामने आया जब पुलिस को उसके दोबारा रायपुर लौटने और यहां रहने की सूचना मिली। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल बांग्लादेशी नागरिकों और कथित अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान के लिए अभियान चलाया गया था।
इसी दौरान रेहान अपने माता-पिता के साथ बांग्लादेश चला गया था। कुछ समय वहां रहने के बाद वह कथित तौर पर दोबारा रायपुर पहुंचा और संजय नगर में बिना ज्यादा जानकारी दिए रहने लगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह किस रास्ते से भारत आया और रायपुर पहुंचने के बाद उसने किन लोगों के संपर्क में रहकर ठिकाना बनाया। उसके आने-जाने और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड भी जांचे जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में दस्तावेजों की पड़ताल सबसे अहम है, क्योंकि आरोपी के पास भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज होने की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, उसके नाम से आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार किए गए थे।
इसके अलावा भारतीय पासपोर्ट भी बनाए जाने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह जांच रही है कि ये दस्तावेज कब और किस आधार पर बने, आवेदन के समय कौन-कौन से कागजात लगाए गए थे और इनमें किसी तरह की गलत जानकारी दी गई थी या नहीं। दस्तावेजों की प्रक्रिया में किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका रही है या नहीं, इसकी भी जांच की जा सकती है। आरोपी के पास मौजूद दस्तावेजों को पुलिस ने जांच के दायरे में लिया है।
पुलिस के मुताबिक रेहान के माता-पिता भी पहले रायपुर में रह चुके हैं और परिवार लंबे समय तक शहर में रहा। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2000 के आसपास जब रेहान करीब पांच साल का था, तब वह अपने माता-पिता के साथ रायपुर आया था। इसके बाद उसकी पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी यहीं बीती। लंबे समय तक शहर में रहने के कारण उसने स्थानीय स्तर पर कामकाज भी शुरू कर दिया। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि वह बांग्लादेश में अपने पैतृक गांव पार्वतीपुर आता-जाता रहा। अधिकारियों के अनुसार, इन यात्राओं के लिए उसने वीजा का इस्तेमाल किया था।
पुलिस अब उसके पुराने यात्रा रिकॉर्ड और भारत-बांग्लादेश के बीच आने-जाने की जानकारी भी खंगाल रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह कब-कब बांग्लादेश गया और किस दस्तावेज के आधार पर वापस भारत आया। मामले में पुलिस उसके परिजनों की भी तलाश कर रही है। बताया गया है कि कार्रवाई के बाद उसके माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्यों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि परिवार के अन्य लोगों की वर्तमान स्थिति क्या है और वे कहां रह रहे हैं।
जांच टीम आरोपी के पुराने पते, किराए के मकान और मैकेनिक की दुकान से जुड़े रिकॉर्ड भी देख रही है। संजय नगर में वह कितने समय से रह रहा था, मकान किससे किराए पर लिया और किरायेदारी से संबंधित कोई दस्तावेज जमा किया गया था या नहीं, इन बिंदुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। टिकरापारा पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपी से उसकी पहचान, परिवार, रायपुर में रहने की अवधि और बांग्लादेश से जुड़े उसके संबंधों के बारे में जानकारी ली है। उसके पास मिले दस्तावेजों का सत्यापन संबंधित विभागों से कराया जा रहा है। पुलिस की जांच में अगर दस्तावेजों के निर्माण में नियमों की अनदेखी या किसी तरह की धोखाधड़ी सामने आती है तो उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि इतने लंबे समय तक उसके रायपुर में रहने के दौरान स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान किस तरह दर्ज रही और अलग-अलग सरकारी रिकॉर्ड में उसका नाम किस रूप में दर्ज हुआ। पिछले साल चलाए गए अभियान के दौरान उसके बांग्लादेश जाने और हाल में रायपुर लौटने के बीच की पूरी जानकारी भी जांच में शामिल की जा रही है। इस दौरान उसके यात्रा दस्तावेज, पहचान पत्र और स्थानीय रिकॉर्ड को मिलाया जा रहा है।
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