- Hindi News
- राज्य
- छत्तीसगढ़
- क्या अब बदलेगी बस्तर की तस्वीर? अरुणाचल मॉडल पर सड़कें बनाने की तैयारी, CM साय की बड़ी पहल
क्या अब बदलेगी बस्तर की तस्वीर? अरुणाचल मॉडल पर सड़कें बनाने की तैयारी, CM साय की बड़ी पहल
छत्तीसगढ़
केंद्र सरकार से PMGSY-IV में विशेष छूट की मांग, 10 किलोमीटर क्लस्टर मॉडल लागू होने पर सैकड़ों दूरस्थ गांव सड़क नेटवर्क से जुड़ सकेंगे; केंद्रीय स्तर से सकारात्मक संकेत मिले।
कभी नक्सल गतिविधियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देशभर में पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अब विकास के नए दौर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने बस्तर के दूरस्थ और जंगलों से घिरे गांवों तक सड़क पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत बस्तर को विशेष छूट देने की मांग करते हुए अरुणाचल प्रदेश में लागू मॉडल को यहां अपनाने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री की इस पहल को बस्तर के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो लंबे समय से सड़क सुविधा से वंचित सैकड़ों गांवों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल ग्रामीणों की आवाजाही बेहतर होगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां देश के सामान्य क्षेत्रों से अलग हैं। यहां घने जंगल, पहाड़ी इलाके और दूर-दूर बसे छोटे गांव सड़क निर्माण की मौजूदा शर्तों को पूरा नहीं कर पाते। यही वजह है कि अनेक गांव अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लाभ नहीं ले सके हैं। सरकार चाहती है कि इन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए बस्तर के लिए अलग व्यवस्था लागू की जाए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बस्तर में अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर सड़क निर्माण के लिए विशेष मानदंड लागू किए जाएं। प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में लागू 500 मीटर की आबादी सीमा के स्थान पर 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली बस्तियों को एक क्लस्टर मानकर सड़क निर्माण की अनुमति दी जाए। इससे छोटे-छोटे गांवों को एक साथ जोड़ते हुए सड़क परियोजनाएं तैयार की जा सकेंगी।
सरकार का मानना है कि इस मॉडल के लागू होने से ऐसे अनेक गांव, जो वर्षों से मुख्य सड़क नेटवर्क से कटे हुए हैं, पहली बार पक्की सड़क सुविधा से जुड़ पाएंगे। सड़क संपर्क बेहतर होने से ग्रामीणों को अस्पताल, स्कूल, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही कृषि उत्पादों की ढुलाई और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी बस्तर सहित प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों और आधारभूत संरचना विस्तार की जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष रूप से बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि वहां के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए मामले में त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा, लेकिन शुरुआती संकेतों को राज्य सरकार उत्साहजनक मान रही है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो बस्तर के लिए यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती बल्कि विकास की आधारशिला भी होती है। जहां सड़क पहुंचती है, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और निवेश के अवसर भी तेजी से बढ़ते हैं। बस्तर जैसे क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी आसान होगा।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में सड़क संपर्क बढ़ने से प्रशासन और सुरक्षा बलों की पहुंच आसान होगी। इससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं का प्रभाव भी बढ़ेगा। राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर आधारभूत ढांचा सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
बस्तर के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी बारिश के मौसम में संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रस्तावित क्लस्टर मॉडल लागू होता है तो इन समस्याओं में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि बस्तर को विकास, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, वन उत्पाद आधारित उद्योग और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
क्या अब बदलेगी बस्तर की तस्वीर? अरुणाचल मॉडल पर सड़कें बनाने की तैयारी, CM साय की बड़ी पहल
छत्तीसगढ़
कभी नक्सल गतिविधियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देशभर में पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अब विकास के नए दौर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने बस्तर के दूरस्थ और जंगलों से घिरे गांवों तक सड़क पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत बस्तर को विशेष छूट देने की मांग करते हुए अरुणाचल प्रदेश में लागू मॉडल को यहां अपनाने का आग्रह किया है।
मुख्यमंत्री की इस पहल को बस्तर के विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो लंबे समय से सड़क सुविधा से वंचित सैकड़ों गांवों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल ग्रामीणों की आवाजाही बेहतर होगी बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां देश के सामान्य क्षेत्रों से अलग हैं। यहां घने जंगल, पहाड़ी इलाके और दूर-दूर बसे छोटे गांव सड़क निर्माण की मौजूदा शर्तों को पूरा नहीं कर पाते। यही वजह है कि अनेक गांव अब तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लाभ नहीं ले सके हैं। सरकार चाहती है कि इन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए बस्तर के लिए अलग व्यवस्था लागू की जाए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि बस्तर में अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर सड़क निर्माण के लिए विशेष मानदंड लागू किए जाएं। प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में लागू 500 मीटर की आबादी सीमा के स्थान पर 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली बस्तियों को एक क्लस्टर मानकर सड़क निर्माण की अनुमति दी जाए। इससे छोटे-छोटे गांवों को एक साथ जोड़ते हुए सड़क परियोजनाएं तैयार की जा सकेंगी।
सरकार का मानना है कि इस मॉडल के लागू होने से ऐसे अनेक गांव, जो वर्षों से मुख्य सड़क नेटवर्क से कटे हुए हैं, पहली बार पक्की सड़क सुविधा से जुड़ पाएंगे। सड़क संपर्क बेहतर होने से ग्रामीणों को अस्पताल, स्कूल, बाजार और सरकारी सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। साथ ही कृषि उत्पादों की ढुलाई और स्थानीय व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी बस्तर सहित प्रदेश में चल रहे विकास कार्यों और आधारभूत संरचना विस्तार की जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष रूप से बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि वहां के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए मामले में त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा, लेकिन शुरुआती संकेतों को राज्य सरकार उत्साहजनक मान रही है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो बस्तर के लिए यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं होती बल्कि विकास की आधारशिला भी होती है। जहां सड़क पहुंचती है, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और निवेश के अवसर भी तेजी से बढ़ते हैं। बस्तर जैसे क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी आसान होगा।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में सड़क संपर्क बढ़ने से प्रशासन और सुरक्षा बलों की पहुंच आसान होगी। इससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं का प्रभाव भी बढ़ेगा। राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर आधारभूत ढांचा सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
बस्तर के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी बारिश के मौसम में संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि प्रस्तावित क्लस्टर मॉडल लागू होता है तो इन समस्याओं में काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि बस्तर को विकास, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना भी है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, वन उत्पाद आधारित उद्योग और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।
