मध्यप्रदेश SIR में 39.6 लाख वोट कटे, केवल 26% ही लौटे: CM-मंत्री भी फॉर्म भरने में नाकाम

भोपाल (म.प्र.)

On

10 सीटों पर कटे वोट ज्यादा, भाजपा को फायदा कम, महिलाओं के वोट सबसे ज्यादा प्रभावित

मध्यप्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान 39.6 लाख मतदाता सूची से नाम कटने का आंकड़ा सामने आया है, लेकिन इसमें से केवल 26% वोटर ही अपने नाम जोड़ पाए हैं। मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की सीटों पर कटे हुए वोटों के मुकाबले बेहद कम आवेदन आए, जिससे सरकार और पार्टी संगठन की चिंता बढ़ गई है।

चुनाव आयोग के फॉर्म-6, 7 और 8 के जरिए वोट जोड़ने की कवायद में ताजा आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश सीटों पर मंत्रियों का अभियान अपेक्षित सफलता नहीं ला सका। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उज्जैन दक्षिण सीट पर कटे वोटों में केवल 17% ही नए आवेदन आए। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला की रीवा सीट पर यह आंकड़ा 16.9% और नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की इंदौर-1 सीट पर 11.4% ही रहा।

भाजपा के लिए चिंता के नए संकेत

प्रदेश संगठन के अनुसार, जिन बूथों को पार्टी ‘ए’ और ‘बी’ श्रेणी में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही थी, उनके समीकरण बदल गए हैं। ‘ए’ वाले बूथ अब ‘बी’ और ‘बी’ वाले ‘सी’ या ‘डी’ में शामिल हो गए हैं, जिससे स्थानीय उम्मीदवारों की संभावित जीत पर असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से महिलाओं के वोटों का ज्यादा कटना चिंता का कारण है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के 3.77 लाख अधिक वोट एसआईआर के दौरान कटे हैं।


विपक्ष की स्थिति भी चिंताजनक

विपक्ष के नेता भी इससे प्रभावित हैं। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की राऊ सीट से 49,799 वोट कटे, जबकि भाजपा ने यहां 35,522 वोटों से जीत दर्ज की थी। नाम जुड़वाने के लिए केवल 16,072 आवेदन आए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की गंधवानी सीट से 11,915 नाम कटे, इनमें से केवल 2,278 फॉर्म जमा हुए। पूर्व सीएम कमलनाथ की छिंदवाड़ा सीट से 19,330 नाम कटे, लेकिन केवल 4,847 फॉर्म वापस आए।

भाजपा के लिए और भी चुनौतीपूर्ण स्थिति ग्वालियर पूर्व और मुरैना में रही। ग्वालियर पूर्व में 74,389 वोट कटने के बावजूद नए नाम जोड़ने के लिए केवल 4,758 आवेदन आए। मुरैना में 49,156 वोट कटने के बाद सिर्फ 1,178 फॉर्म मिले।


SIR का मकसद और पृष्ठभूमि

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। 1951 से 2004 तक का SIR पूरा हो चुका है, लेकिन पिछले 21 वर्षों में कई बदलाव आवश्यक थे। इसमें माइग्रेशन, दोहरी सूची, मृतक मतदाता, विदेशी नागरिक और अन्य सुधार शामिल हैं। लक्ष्य है कि कोई योग्य मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

------

हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुकDainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम@dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूबDainik Jagran MPCG Digital

📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए!

खबरें और भी हैं

महिला सशक्तिकरण: नीतियों से आगे की चुनौती

टाप न्यूज

महिला सशक्तिकरण: नीतियों से आगे की चुनौती

काग़ज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर सामाजिक सोच, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति तक पहुँचना ही आज के...
ओपीनियन 
महिला सशक्तिकरण: नीतियों से आगे की चुनौती

SA20 एलिमिनेटर: जोबर्ग सुपर किंग्स और पार्ल रॉयल्स आमने-सामने, जीत का मुकाबला तय करेगा क्वालिफायर-2 की राह

जोबर्ग सुपर किंग्स के कप्तान जेम्स विंस ने टीम की सामूहिक ताकत पर भरोसा जताया, पार्ल रॉयल्स ने भी एलिमिनेटर...
स्पोर्ट्स 
SA20 एलिमिनेटर: जोबर्ग सुपर किंग्स और पार्ल रॉयल्स आमने-सामने, जीत का मुकाबला तय करेगा क्वालिफायर-2 की राह

पंजाबी सिंगर प्रेम ढिल्लों पर नशे के प्रचार का आरोप, चंडीगढ़ कार शोरूम वीडियो से उठा विवाद

वायरल वीडियो में हाथ में संदिग्ध पदार्थ का पैकेट दिखने पर वकील ने DGP से की शिकायत, FIR और जांच...
बालीवुड 
पंजाबी सिंगर प्रेम ढिल्लों पर नशे के प्रचार का आरोप, चंडीगढ़ कार शोरूम वीडियो से उठा विवाद

रोजमर्रा की जिंदगी में माइंडफुलनेस क्यों बन रही है ज़रूरत, कैसे अपनाएं यह आदत

भागदौड़, तनाव और डिजिटल शोर के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने का सरल लेकिन प्रभावी तरीका
लाइफ स्टाइल 
रोजमर्रा की जिंदगी में माइंडफुलनेस क्यों बन रही है ज़रूरत, कैसे अपनाएं यह आदत

बिजनेस

Copyright (c) Dainik Jagran All Rights Reserved.