एमपी के 5 बड़े शहरों की हवा खतरनाक, स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए!

भोपाल (म.प्र.)

By Rohit.P
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मध्यप्रदेश प्रदूषण पर नई स्टडी में खुलासा, भोपाल-इंदौर समेत 5 शहरों में हवा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों द्वारा कराई गई सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी के शुरुआती निष्कर्षों ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पांच बड़े शहरों की हवा चिंताजनक स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है और इसके पीछे मुख्य कारण धूल, वाहन उत्सर्जन, कचरा जलाना और निर्माण कार्य से उड़ने वाले कण हैं।

राजधानी भोपाल में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई गई है, जहां हर साल हजारों टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव देखने को मिल रहा है, जिससे हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।

सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी का उद्देश्य और प्रक्रिया

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से यह अध्ययन कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य वायु में मौजूद प्रदूषकों के स्रोतों की पहचान करना है, ताकि समय रहते प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकें।

इस अध्ययन के तहत प्रमुख प्रदूषकों जैसे पीएम-10, पीएम-2.5, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोतों का विश्लेषण किया जाता है। इसके लिए प्रदूषण को पॉइंट सोर्स, लाइन सोर्स और एरिया सोर्स के रूप में वर्गीकृत कर समझा जाता है।

भोपाल की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक

स्टडी के अनुसार भोपाल में हर साल लगभग 10,309 टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान धूल का है, जो कुल प्रदूषण का आधे से अधिक हिस्सा बनाती है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और खुले में कचरा जलाना भी प्रमुख कारण हैं।

शहर के कुछ इलाकों को प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां ट्रैफिक जाम और धूल के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इंदौर में निर्माण और ट्रैफिक बना बड़ा कारण

इंदौर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य, यातायात जाम और कचरे के अनुचित प्रबंधन को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों की खराब सड़कें और मेट्रो परियोजना से जुड़ी गतिविधियां भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। कच्चे डायवर्जन और निर्माण से उठने वाली धूल शहर की हवा को लगातार खराब कर रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

अन्य शहरों में भी बढ़ती समस्या

ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, सागर और देवास जैसे शहर भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। इन सभी शहरों को नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया जा चुका है, जहां वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों से नीचे है। इन शहरों में भी धूल, वाहन उत्सर्जन और कचरा जलाने की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को चुनौती मिल रही है।

लक्ष्य से पीछे छूटता प्रदेश

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2025-26 तक पीएम-10 स्तर में 40 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा था। इसके साथ ही 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का राष्ट्रीय मानक तय किया गया था। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य काफी दूर नजर आ रहा है, क्योंकि अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है।

स्टडी में सुझाए गए उपाय

रिपोर्ट में प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें सड़कों की मरम्मत और किनारों को बंद करना, पुराने डीजल वाहनों पर रोक, कचरा जलाने पर सख्ती, निर्माण स्थलों पर सुरक्षा कवर और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं। यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए तो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है।

प्रशासनिक उदासीनता बनी चुनौती

रिपोर्ट मिलने के बावजूद अभी तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। यह स्थिति दर्शाती है कि समस्या की पहचान के बाद भी समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

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06 Apr 2026 By Rohit.P

एमपी के 5 बड़े शहरों की हवा खतरनाक, स्टडी में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए!

भोपाल (म.प्र.)

मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों द्वारा कराई गई सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी के शुरुआती निष्कर्षों ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के पांच बड़े शहरों की हवा चिंताजनक स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है और इसके पीछे मुख्य कारण धूल, वाहन उत्सर्जन, कचरा जलाना और निर्माण कार्य से उड़ने वाले कण हैं।

राजधानी भोपाल में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बताई गई है, जहां हर साल हजारों टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव देखने को मिल रहा है, जिससे हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं।

सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी का उद्देश्य और प्रक्रिया

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से यह अध्ययन कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य वायु में मौजूद प्रदूषकों के स्रोतों की पहचान करना है, ताकि समय रहते प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू किए जा सकें।

इस अध्ययन के तहत प्रमुख प्रदूषकों जैसे पीएम-10, पीएम-2.5, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोतों का विश्लेषण किया जाता है। इसके लिए प्रदूषण को पॉइंट सोर्स, लाइन सोर्स और एरिया सोर्स के रूप में वर्गीकृत कर समझा जाता है।

भोपाल की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक

स्टडी के अनुसार भोपाल में हर साल लगभग 10,309 टन पीएम-10 कण हवा में मिल रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा योगदान धूल का है, जो कुल प्रदूषण का आधे से अधिक हिस्सा बनाती है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य और खुले में कचरा जलाना भी प्रमुख कारण हैं।

शहर के कुछ इलाकों को प्रदूषण हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां ट्रैफिक जाम और धूल के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इंदौर में निर्माण और ट्रैफिक बना बड़ा कारण

इंदौर में तेजी से हो रहे निर्माण कार्य, यातायात जाम और कचरे के अनुचित प्रबंधन को प्रदूषण का मुख्य कारण बताया गया है। औद्योगिक क्षेत्रों की खराब सड़कें और मेट्रो परियोजना से जुड़ी गतिविधियां भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। कच्चे डायवर्जन और निर्माण से उठने वाली धूल शहर की हवा को लगातार खराब कर रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ता जा रहा है।

अन्य शहरों में भी बढ़ती समस्या

ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, सागर और देवास जैसे शहर भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। इन सभी शहरों को नॉन अटेनमेंट सिटी घोषित किया जा चुका है, जहां वायु गुणवत्ता राष्ट्रीय मानकों से नीचे है। इन शहरों में भी धूल, वाहन उत्सर्जन और कचरा जलाने की समस्या प्रमुख रूप से सामने आई है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को चुनौती मिल रही है।

लक्ष्य से पीछे छूटता प्रदेश

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2025-26 तक पीएम-10 स्तर में 40 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा था। इसके साथ ही 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर का राष्ट्रीय मानक तय किया गया था। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह लक्ष्य काफी दूर नजर आ रहा है, क्योंकि अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है।

स्टडी में सुझाए गए उपाय

रिपोर्ट में प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें सड़कों की मरम्मत और किनारों को बंद करना, पुराने डीजल वाहनों पर रोक, कचरा जलाने पर सख्ती, निर्माण स्थलों पर सुरक्षा कवर और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हैं। यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए तो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिल सकती है।

प्रशासनिक उदासीनता बनी चुनौती

रिपोर्ट मिलने के बावजूद अभी तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। यह स्थिति दर्शाती है कि समस्या की पहचान के बाद भी समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/air-hazard-study-of-5-big-cities-of-mp-revealed/article-50308

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