- Hindi News
- राज्य
- मध्य प्रदेश
- गैस संकट में एजेंसियों का खेल, उपभोक्ताओं से 28 लाख वसूले, प्रशासन की जांच में ऐसे हुआ ठगी का खुलासा...
गैस संकट में एजेंसियों का खेल, उपभोक्ताओं से 28 लाख वसूले, प्रशासन की जांच में ऐसे हुआ ठगी का खुलासा
भोपाल (म.प्र.)
गैस संकट में एजेंसियों ने उपभोक्ताओं से 28 लाख वसूले, होम डिलीवरी शुल्क में गड़बड़ी उजागर, प्रशासन ने शुरू की जांच।
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते देशभर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी देखने को मिली। इस संकट का असर मध्यप्रदेश में भी साफ नजर आया, जहां हजारों उपभोक्ताओं को गैस के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कुछ गैस एजेंसियों ने नियमों के खिलाफ जाकर अतिरिक्त रकम वसूल ली।
होम डिलीवरी शुल्क के नाम पर वसूली
नियमों के अनुसार, गैस कंपनियां एजेंसियों को हर सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए 35 रुपए देती हैं। लेकिन जब उपभोक्ता खुद एजेंसी जाकर सिलेंडर लेते हैं, तो यह राशि उन्हें वापस मिलनी चाहिए। आरोप है कि एजेंसियों ने यह रकम लौटाने के बजाय उपभोक्ताओं से ही वसूल ली। करीब 80 हजार उपभोक्ताओं से इस तरह लगभग 28 लाख रुपए की वसूली की गई।
शिकायतों से खुला मामला
भोपाल के जनता नगर करोंद निवासी राजेश कुमार ने इस मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से की। उन्होंने बताया कि उनकी एजेंसी ने होम डिलीवरी से मना कर दिया, जिसके बाद उन्हें खुद सिलेंडर लेने जाना पड़ा। जब उन्होंने 35 रुपए वापस मांगे, तो एजेंसी ने इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई और राशि वापस दिलाने की मांग की।
रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे एजेंसियों पर
स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। रोजाना करीब 3000 उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर ले रहे हैं, जबकि 12 हजार से ज्यादा बुकिंग के मुकाबले सिर्फ 6 से 7 हजार डिलीवरी ही हो पा रही है। जिले में लगभग 50 गैस एजेंसियां संचालित हैं।
प्रशासन की जांच और कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। नापतौल विभाग और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। अधिकारियों का कहना है कि तौल में गड़बड़ी और अवैध वसूली के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने भी साफ किया है कि कालाबाजारी और नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
गैस संकट में एजेंसियों का खेल, उपभोक्ताओं से 28 लाख वसूले, प्रशासन की जांच में ऐसे हुआ ठगी का खुलासा
भोपाल (म.प्र.)
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते देशभर में घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी देखने को मिली। इस संकट का असर मध्यप्रदेश में भी साफ नजर आया, जहां हजारों उपभोक्ताओं को गैस के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कुछ गैस एजेंसियों ने नियमों के खिलाफ जाकर अतिरिक्त रकम वसूल ली।
होम डिलीवरी शुल्क के नाम पर वसूली
नियमों के अनुसार, गैस कंपनियां एजेंसियों को हर सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए 35 रुपए देती हैं। लेकिन जब उपभोक्ता खुद एजेंसी जाकर सिलेंडर लेते हैं, तो यह राशि उन्हें वापस मिलनी चाहिए। आरोप है कि एजेंसियों ने यह रकम लौटाने के बजाय उपभोक्ताओं से ही वसूल ली। करीब 80 हजार उपभोक्ताओं से इस तरह लगभग 28 लाख रुपए की वसूली की गई।
शिकायतों से खुला मामला
भोपाल के जनता नगर करोंद निवासी राजेश कुमार ने इस मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर से की। उन्होंने बताया कि उनकी एजेंसी ने होम डिलीवरी से मना कर दिया, जिसके बाद उन्हें खुद सिलेंडर लेने जाना पड़ा। जब उन्होंने 35 रुपए वापस मांगे, तो एजेंसी ने इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई और राशि वापस दिलाने की मांग की।
रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे एजेंसियों पर
स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। रोजाना करीब 3000 उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचकर सिलेंडर ले रहे हैं, जबकि 12 हजार से ज्यादा बुकिंग के मुकाबले सिर्फ 6 से 7 हजार डिलीवरी ही हो पा रही है। जिले में लगभग 50 गैस एजेंसियां संचालित हैं।
प्रशासन की जांच और कार्रवाई की तैयारी
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। नापतौल विभाग और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम एजेंसियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। अधिकारियों का कहना है कि तौल में गड़बड़ी और अवैध वसूली के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने भी साफ किया है कि कालाबाजारी और नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
