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दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव: ज्ञान भारतम् मिशन मध्य प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहा
Bhopal, MP
दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव: मध्य प्रदेश नोडल प्रमुख नीलेश लोखंडे ने ज्ञान भारतम् मिशन पर खुलासा किया। 75,000+ पांडुलिपियां अपलोड, ऐप और घर-घर सर्वेक्षण तेज। मई 2026 तक पूरा लक्ष्य।
दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव: ज्ञान भारतम् मिशन मध्य प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहा
नोडल प्रमुख नीलेश लोखंडे ने दैनिक जागरण को दिया विशेष साक्षात्कार
केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम् मिशन में मध्य प्रदेश सक्रिय भूमिका निभा रहा है। दैनिक जागरण की विशेष वार्ता में मिशन के मध्य प्रदेश नोडल प्रमुख श्री नीलेश लोखंडे ने पूरी जानकारी साझा की।
मिशन का मुख्य उद्देश्य
संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के तहत यह राष्ट्रीय पहल भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने के लिए शुरू की गई है। यूनियन बजट 2025 के पैरा 84 में इसकी घोषणा हुई थी। मार्च से मई 2026 तक राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण चल रहा है।
ज्ञान भारतम् ऐप से जन भागीदारी
श्री लोखंडे ने बताया, “हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा पुरानी अभिलेखों और पांडुलिपियों में छिपी है। इन्हें उजागर करने के लिए ज्ञान भारतम् ऐप बनाया गया है।” प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर सात आसान चरणों में जानकारी भरनी होती है—मोबाइल नंबर, ईमेल, भाषा चयन और फिर पांडुलिपि की संख्या, भाषा, माध्यम (कागज, ताड़पत्र आदि) तथा स्थिति। 16 मार्च 2026 को ऐप लॉन्च होने के बाद अब तक मध्य प्रदेश में 75,000 से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी अपलोड हो चुकी है।
घर-घर सर्वेक्षण की तैयारी
ऐप के अलावा स्थानीय प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगी। श्री लोखंडे ने स्पष्ट किया, “पांडुलिपियों का भौतिक स्वामित्व संरक्षकों के पास ही रहेगा। हम केवल डिजिटल प्रतियां बनाएंगे और मूल वापस लौटा देंगे।” केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू के बाद राज्य स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समितियां गठित की जा चुकी हैं। ये समितियां रिपोर्ट की जांच, महत्व का आकलन और आगे की कार्रवाई करेंगी।
90 दिनों का लक्ष्य
भारत सरकार ने पूरे देश में 90 दिनों का समय तय किया है। मध्य प्रदेश में यह अभियान 16 मार्च से शुरू होकर मई के अंत तक चलेगा। श्री लोखंडे ने कहा, “पहले विभाग के पास जो पांडुलिपियां थीं वे सुरक्षित हैं। अब घरों, मंदिरों और निजी संग्रहों में छिपी हजारों पांडुलिपियों को ढूंढना है।”
पांडुलिपि संरक्षण की जरूरत
प्राचीन काल में ज्ञान हाथ से लिखकर संरक्षित किया जाता था। चिकित्सा, साहित्य और धार्मिक ग्रंथों की बहुमूल्य प्रतियां आज भी गांवों, मठों और घरों में मौजूद हैं। मिशन का उद्देश्य इन्हें आधुनिक तकनीक से डिजिटाइज और संरक्षित करना है ताकि भावी पीढ़ियां आसानी से इनका लाभ ले सकें।
डिजिटाइजेशन और संरक्षण का रोडमैप
सत्यापित पांडुलिपियों का व्यावसायिक डिजिटाइजेशन होगा। जरूरत पड़ने पर कंजर्वेशन कार्य भी किया जाएगा। श्री लोखंडे ने जोर दिया कि यह सामूहिक प्रयास है जिसमें नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
जनता से अपील
दैनिक जागरण के माध्यम से श्री नीलेश लोखंडे ने पूरे राज्य के नागरिकों से अपील की, “अगर आपके पास या आपके ज्ञान में कोई पुरानी पांडुलिपि है तो तुरंत ज्ञान भारतम् ऐप पर जानकारी अपलोड करें। आपकी छोटी सी पहल सदियों के ज्ञान को सुरक्षित रख सकती है।” अगले कुछ हफ्तों में दूर-दराज के इलाकों से और रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
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दैनिक जागरण एक्सक्लूसिव: ज्ञान भारतम् मिशन मध्य प्रदेश में तेजी से आगे बढ़ रहा
नोडल प्रमुख नीलेश लोखंडे ने दैनिक जागरण को दिया विशेष साक्षात्कार
केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ज्ञान भारतम् मिशन में मध्य प्रदेश सक्रिय भूमिका निभा रहा है। दैनिक जागरण की विशेष वार्ता में मिशन के मध्य प्रदेश नोडल प्रमुख श्री नीलेश लोखंडे ने पूरी जानकारी साझा की।
मिशन का मुख्य उद्देश्य
संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के तहत यह राष्ट्रीय पहल भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत को संरक्षित करने के लिए शुरू की गई है। यूनियन बजट 2025 के पैरा 84 में इसकी घोषणा हुई थी। मार्च से मई 2026 तक राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण चल रहा है।
ज्ञान भारतम् ऐप से जन भागीदारी
श्री लोखंडे ने बताया, “हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा पुरानी अभिलेखों और पांडुलिपियों में छिपी है। इन्हें उजागर करने के लिए ज्ञान भारतम् ऐप बनाया गया है।” प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड कर सात आसान चरणों में जानकारी भरनी होती है—मोबाइल नंबर, ईमेल, भाषा चयन और फिर पांडुलिपि की संख्या, भाषा, माध्यम (कागज, ताड़पत्र आदि) तथा स्थिति। 16 मार्च 2026 को ऐप लॉन्च होने के बाद अब तक मध्य प्रदेश में 75,000 से अधिक पांडुलिपियों की जानकारी अपलोड हो चुकी है।
घर-घर सर्वेक्षण की तैयारी
ऐप के अलावा स्थानीय प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगी। श्री लोखंडे ने स्पष्ट किया, “पांडुलिपियों का भौतिक स्वामित्व संरक्षकों के पास ही रहेगा। हम केवल डिजिटल प्रतियां बनाएंगे और मूल वापस लौटा देंगे।” केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू के बाद राज्य स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समितियां गठित की जा चुकी हैं। ये समितियां रिपोर्ट की जांच, महत्व का आकलन और आगे की कार्रवाई करेंगी।
90 दिनों का लक्ष्य
भारत सरकार ने पूरे देश में 90 दिनों का समय तय किया है। मध्य प्रदेश में यह अभियान 16 मार्च से शुरू होकर मई के अंत तक चलेगा। श्री लोखंडे ने कहा, “पहले विभाग के पास जो पांडुलिपियां थीं वे सुरक्षित हैं। अब घरों, मंदिरों और निजी संग्रहों में छिपी हजारों पांडुलिपियों को ढूंढना है।”
पांडुलिपि संरक्षण की जरूरत
प्राचीन काल में ज्ञान हाथ से लिखकर संरक्षित किया जाता था। चिकित्सा, साहित्य और धार्मिक ग्रंथों की बहुमूल्य प्रतियां आज भी गांवों, मठों और घरों में मौजूद हैं। मिशन का उद्देश्य इन्हें आधुनिक तकनीक से डिजिटाइज और संरक्षित करना है ताकि भावी पीढ़ियां आसानी से इनका लाभ ले सकें।
डिजिटाइजेशन और संरक्षण का रोडमैप
सत्यापित पांडुलिपियों का व्यावसायिक डिजिटाइजेशन होगा। जरूरत पड़ने पर कंजर्वेशन कार्य भी किया जाएगा। श्री लोखंडे ने जोर दिया कि यह सामूहिक प्रयास है जिसमें नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
जनता से अपील
दैनिक जागरण के माध्यम से श्री नीलेश लोखंडे ने पूरे राज्य के नागरिकों से अपील की, “अगर आपके पास या आपके ज्ञान में कोई पुरानी पांडुलिपि है तो तुरंत ज्ञान भारतम् ऐप पर जानकारी अपलोड करें। आपकी छोटी सी पहल सदियों के ज्ञान को सुरक्षित रख सकती है।” अगले कुछ हफ्तों में दूर-दराज के इलाकों से और रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
