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अब नहीं बचेंगे अपराधी, 8000 AI कैमरों से रखी जाएगी निगरानी, 30 सेकंड में पहचान कर देंगे थाने को सूचना
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में AI CCTV तकनीक से 30 सेकंड में अपराधी पहचान, डायल 112 से जुड़ा स्मार्ट सुरक्षा सिस्टम जल्द लागू होगा।
भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। प्रोजेक्ट सेफ गार्ड के तहत शहर में बड़े स्तर पर एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इस योजना के लागू होने के बाद शहर में निगरानी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेज, स्मार्ट और प्रभावी हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराध की पहचान बेहद कम समय में हो सकेगी।
शहर में अभी तक सीमित संख्या में कैमरे लगे हैं, जिनकी निगरानी पुलिस कंट्रोल रूम से की जाती है। लेकिन नई योजना के तहत हजारों कैमरों को जोड़कर पूरे शहर को एक डिजिटल सुरक्षा नेटवर्क में बदला जाएगा। यह कदम अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
एआई तकनीक से लैस होगी निगरानी व्यवस्था
नई प्रणाली में लगाए जाने वाले कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित होंगे। इनमें फेस रिकग्निशन जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान आसान हो जाएगी। जैसे ही कोई संदिग्ध चेहरा कैमरे में कैद होगा, सिस्टम तुरंत उसे डेटाबेस से मिलाकर पहचान करने की कोशिश करेगा। इससे पुलिस को मौके पर तुरंत जानकारी मिल सकेगी और कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
डायल 112 से सीधा कनेक्शन
इस प्रोजेक्ट की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे डायल 112 इमरजेंसी सेवा से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि किसी घटना की जानकारी केवल कॉल पर निर्भर नहीं रहेगी। कैमरे खुद ही संदिग्ध गतिविधि को पहचान कर अलर्ट जारी करेंगे। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय में सुधार आएगा और घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकेगा।
निजी कैमरों का भी होगा उपयोग
इस योजना में निजी संस्थानों और दुकानों के कैमरों को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक तय शुल्क पर लोग अपने कैमरों को इस नेटवर्क से जोड़ सकेंगे। इससे निगरानी का दायरा और व्यापक हो जाएगा। निजी कैमरों के जुड़ने से पुलिस को हर गली और इलाके की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी, जिससे अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल हो जाएगा।
30 सेकंड में पहचान और तुरंत अलर्ट
इस तकनीक का सबसे अहम पहलू इसकी गति है। किसी भी वांछित या फरार अपराधी की पहचान महज 30 सेकंड के भीतर की जा सकेगी। जैसे ही कैमरा किसी संदिग्ध को पहचानता है, संबंधित पुलिस थाने को तुरंत सूचना भेजी जाएगी। इससे पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर सकेगी। यह सिस्टम लापता लोगों की तलाश में भी मददगार साबित होगा।
संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर
महिला कॉलेज, स्कूल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इन कैमरों के जरिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। यदि किसी स्थान पर असामान्य गतिविधि या भीड़ बढ़ती है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी करेगा। इससे संभावित घटनाओं को पहले ही रोका जा सकेगा और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
जल्द लागू होगी योजना
पुलिस विभाग के अनुसार इस योजना को जल्द ही लागू करने की तैयारी है। इसके लागू होने के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और अपराध दर में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बड़े आयोजनों और भीड़ प्रबंधन में भी यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी।
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अब नहीं बचेंगे अपराधी, 8000 AI कैमरों से रखी जाएगी निगरानी, 30 सेकंड में पहचान कर देंगे थाने को सूचना
भोपाल (म.प्र.)
भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। प्रोजेक्ट सेफ गार्ड के तहत शहर में बड़े स्तर पर एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इस योजना के लागू होने के बाद शहर में निगरानी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेज, स्मार्ट और प्रभावी हो जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अपराध की पहचान बेहद कम समय में हो सकेगी।
शहर में अभी तक सीमित संख्या में कैमरे लगे हैं, जिनकी निगरानी पुलिस कंट्रोल रूम से की जाती है। लेकिन नई योजना के तहत हजारों कैमरों को जोड़कर पूरे शहर को एक डिजिटल सुरक्षा नेटवर्क में बदला जाएगा। यह कदम अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
एआई तकनीक से लैस होगी निगरानी व्यवस्था
नई प्रणाली में लगाए जाने वाले कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित होंगे। इनमें फेस रिकग्निशन जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल होंगी, जिससे अपराधियों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान आसान हो जाएगी। जैसे ही कोई संदिग्ध चेहरा कैमरे में कैद होगा, सिस्टम तुरंत उसे डेटाबेस से मिलाकर पहचान करने की कोशिश करेगा। इससे पुलिस को मौके पर तुरंत जानकारी मिल सकेगी और कार्रवाई में देरी नहीं होगी।
डायल 112 से सीधा कनेक्शन
इस प्रोजेक्ट की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे डायल 112 इमरजेंसी सेवा से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि किसी घटना की जानकारी केवल कॉल पर निर्भर नहीं रहेगी। कैमरे खुद ही संदिग्ध गतिविधि को पहचान कर अलर्ट जारी करेंगे। इससे पुलिस की प्रतिक्रिया समय में सुधार आएगा और घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकेगा।
निजी कैमरों का भी होगा उपयोग
इस योजना में निजी संस्थानों और दुकानों के कैमरों को भी जोड़ा जाएगा। इसके लिए एक तय शुल्क पर लोग अपने कैमरों को इस नेटवर्क से जोड़ सकेंगे। इससे निगरानी का दायरा और व्यापक हो जाएगा। निजी कैमरों के जुड़ने से पुलिस को हर गली और इलाके की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी, जिससे अपराधियों के लिए बच निकलना मुश्किल हो जाएगा।
30 सेकंड में पहचान और तुरंत अलर्ट
इस तकनीक का सबसे अहम पहलू इसकी गति है। किसी भी वांछित या फरार अपराधी की पहचान महज 30 सेकंड के भीतर की जा सकेगी। जैसे ही कैमरा किसी संदिग्ध को पहचानता है, संबंधित पुलिस थाने को तुरंत सूचना भेजी जाएगी। इससे पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर सकेगी। यह सिस्टम लापता लोगों की तलाश में भी मददगार साबित होगा।
संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर
महिला कॉलेज, स्कूल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इन कैमरों के जरिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। यदि किसी स्थान पर असामान्य गतिविधि या भीड़ बढ़ती है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी करेगा। इससे संभावित घटनाओं को पहले ही रोका जा सकेगा और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
जल्द लागू होगी योजना
पुलिस विभाग के अनुसार इस योजना को जल्द ही लागू करने की तैयारी है। इसके लागू होने के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और अपराध दर में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बड़े आयोजनों और भीड़ प्रबंधन में भी यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होगी।
