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दिग्विजय सिंह बोले- धर्म जोड़ता है, राजनीति नहीं; गुना महायज्ञ में जुटे लाखों श्रद्धालु
गुना,(म.प्र.)
भैंसाना में श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति, आठ दिन में 30 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन समिति के मुताबिक आठ दिनों के दौरान करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने महायज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए। समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।
भैंसाना गांव पिछले कई दिनों से धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। रामायण पाठ, भागवत कथा और यज्ञ में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही थीं। गुरुवार को पूर्णाहुति के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दौरान आयोजन के मुख्य केंद्र रहे गुड्डा महाराज भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार पूरे 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। जैसे ही उन्होंने भोजन ग्रहण किया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे भावुक पल बताया। कई लोग मंच के सामने खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “हम लोगों ने हमेशा धर्म को आस्था का केंद्र माना है। हमने कभी धर्म को बेचा नहीं। धर्म को राजनीति में नहीं लाए।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सभी को आमंत्रित किया गया था, चाहे किसी भी दल या विचारधारा से जुड़े लोग हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति अक्सर समाज को बांट देती है। उनके इस बयान के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और लोगों को एक मंच पर लाते हैं।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राघौगढ़ किले के हनुमान मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का अस्तित्व हनुमान जी की कृपा से जुड़ा है। गुड्डा महाराज की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे आयोजन की तैयारी की गई, वह अपने आप में अनोखी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देखे, लेकिन आपके जैसा इंजीनियर नहीं देखा।” इस दौरान मंच पर मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।
दिग्विजय सिंह ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बीच सूखी लकड़ियों से बना विशाल पंडाल सुरक्षित तरीके से चलाना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त और योजना के कारण पूरा कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ। उन्होंने मजाक में कुंभराज वाले महाराज से अपनी कुंडली बनाने की भी बात कही। बोले कि “मुझे कुंडली पर कभी ज्यादा विश्वास नहीं रहा, क्योंकि हजारों लोगों ने कुंडली बनाई लेकिन किसी ने नहीं बताया कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।”
गुड्डा महाराज ने भी मंच से दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आत्मीयता का है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आयोजन का संरक्षक बताया और कहा कि राजा के संरक्षण के बिना ऐसा बड़ा यज्ञ सफल नहीं हो सकता।
विधायक जयवर्धन सिंह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में संस्कार और सकारात्मक सोच फैलाने का माध्यम भी बना। उन्होंने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों और सेवा समितियों ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था संभाली। गर्मी के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ।
महायज्ञ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी बड़ी चुनौती रही। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। गांव की छोटी सड़कों पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन इस इलाके में पहली बार देखने को मिला। आसपास के गांवों में भी कई दिनों तक इसी आयोजन की चर्चा होती रही।
समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक बनी रही। लोग यज्ञशाला और कथा स्थल के दर्शन करते रहे। पूरा भैंसाना गांव भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा नजर आया। आयोजन खत्म होने के बाद भी यहां का माहौल लोगों को लंबे समय तक याद रहने वाला है।
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दिग्विजय सिंह बोले- धर्म जोड़ता है, राजनीति नहीं; गुना महायज्ञ में जुटे लाखों श्रद्धालु
गुना,(म.प्र.)
गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन समिति के मुताबिक आठ दिनों के दौरान करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने महायज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए। समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।
भैंसाना गांव पिछले कई दिनों से धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। रामायण पाठ, भागवत कथा और यज्ञ में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही थीं। गुरुवार को पूर्णाहुति के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दौरान आयोजन के मुख्य केंद्र रहे गुड्डा महाराज भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार पूरे 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। जैसे ही उन्होंने भोजन ग्रहण किया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे भावुक पल बताया। कई लोग मंच के सामने खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “हम लोगों ने हमेशा धर्म को आस्था का केंद्र माना है। हमने कभी धर्म को बेचा नहीं। धर्म को राजनीति में नहीं लाए।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सभी को आमंत्रित किया गया था, चाहे किसी भी दल या विचारधारा से जुड़े लोग हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति अक्सर समाज को बांट देती है। उनके इस बयान के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और लोगों को एक मंच पर लाते हैं।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राघौगढ़ किले के हनुमान मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का अस्तित्व हनुमान जी की कृपा से जुड़ा है। गुड्डा महाराज की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे आयोजन की तैयारी की गई, वह अपने आप में अनोखी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देखे, लेकिन आपके जैसा इंजीनियर नहीं देखा।” इस दौरान मंच पर मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।
दिग्विजय सिंह ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बीच सूखी लकड़ियों से बना विशाल पंडाल सुरक्षित तरीके से चलाना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त और योजना के कारण पूरा कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ। उन्होंने मजाक में कुंभराज वाले महाराज से अपनी कुंडली बनाने की भी बात कही। बोले कि “मुझे कुंडली पर कभी ज्यादा विश्वास नहीं रहा, क्योंकि हजारों लोगों ने कुंडली बनाई लेकिन किसी ने नहीं बताया कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।”
गुड्डा महाराज ने भी मंच से दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आत्मीयता का है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आयोजन का संरक्षक बताया और कहा कि राजा के संरक्षण के बिना ऐसा बड़ा यज्ञ सफल नहीं हो सकता।
विधायक जयवर्धन सिंह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में संस्कार और सकारात्मक सोच फैलाने का माध्यम भी बना। उन्होंने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों और सेवा समितियों ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था संभाली। गर्मी के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ।
महायज्ञ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी बड़ी चुनौती रही। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। गांव की छोटी सड़कों पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन इस इलाके में पहली बार देखने को मिला। आसपास के गांवों में भी कई दिनों तक इसी आयोजन की चर्चा होती रही।
समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक बनी रही। लोग यज्ञशाला और कथा स्थल के दर्शन करते रहे। पूरा भैंसाना गांव भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा नजर आया। आयोजन खत्म होने के बाद भी यहां का माहौल लोगों को लंबे समय तक याद रहने वाला है।
