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जगदीशपुर में आज मोहन कैबिनेट, 10.54 लाख किसानों को मिलेंगे ₹1460 करोड़; कांग्रेस भी बनाएगी सत्र की रणनीति
मध्य प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज अहम कैबिनेट बैठक होगी, किसानों को फसल बीमा राशि मिलेगी, वहीं मानसून सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल भी बैठक करेगा
मध्य प्रदेश में रविवार, 19 जुलाई को राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहने वाली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के ऐतिहासिक जगदीशपुर में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस दौरान सरकार कई विधायी और नीतिगत प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के 10.54 लाख किसानों के खातों में 1460.25 करोड़ रुपए की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। दूसरी ओर, 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें विपक्ष सदन के भीतर सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रविवार का कार्यक्रम सुबह से शुरू होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह करीब 10:30 बजे जगदीशपुर के लिए रवाना होंगे। वहां पहुंचने के बाद वे एक प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन करेंगे। इसके बाद करीब 11:30 बजे उनकी अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक शुरू होगी। बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़े विधायी प्रस्तावों के साथ विभिन्न विभागों के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कैबिनेट के फैसलों के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे, जहां बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी सामने आ सकती है।
जगदीशपुर के कार्यक्रम में किसानों के लिए भी बड़ा आयोजन रखा गया है। मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पात्र किसानों के खातों में बीमा दावा राशि भेजेंगे। करीब 10.54 लाख किसानों को कुल 1460.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है। सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक प्रदेश के प्रभावित किसानों को 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बीमा दावों का भुगतान किया जा चुका है। खेती को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान के आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए संचालित इस योजना की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी।
जगदीशपुर से कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:45 बजे झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। इसके बाद करीब 3:20 बजे उनके भोपाल स्थित निवास पहुंचने का कार्यक्रम है। शाम करीब 5 बजे मुख्यमंत्री एक अन्य बैठक में हिस्सा लेंगे। इस तरह रविवार को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कैबिनेट बैठक, किसान कल्याण, कृषि कार्यक्रम और प्रशासनिक बैठकों के आसपास केंद्रित रहेगा।
जगदीशपुर में होने वाली मंत्रि-परिषद की बैठक को मोहन सरकार की आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बताया जा रहा है। सरकार इससे पहले भी राजधानी के नियमित बैठक स्थल से बाहर प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय महत्व वाले स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित कर चुकी है। इसके पीछे सरकार की कोशिश अलग-अलग क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता देने के साथ स्थानीय विकास से जुड़े विषयों को सामने लाने की रही है। इससे पहले जबलपुर के शक्ति भवन, दमोह जिले के सिंग्रामपुर, महेश्वर, इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, पचमढ़ी, खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर और बड़वानी जिले के जनजातीय क्षेत्र स्थित नागलवाड़ी जैसे स्थानों पर मंत्रि-परिषद की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
आज की कैबिनेट बैठक पर इसलिए भी खास नजर है क्योंकि इसके अगले ही दिन मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। सरकार कई विधेयकों को सदन में पेश करने से पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रख सकती है। संभावित विधायी एजेंडे में मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026, अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रस्ताव, निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े संशोधन तथा चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विधायी बदलाव शामिल बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की संरचना से जुड़े बदलावों पर भी कैबिनेट में विचार होने की संभावना है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबंधित संशोधन और प्रस्तावित धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय से जुड़े विषय बैठक के एजेंडे में आ सकते हैं। इसके अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नियमों को सरल बनाने और श्रम कानूनों से जुड़े प्रस्तावों पर भी सरकार चर्चा कर सकती है। हालांकि किन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिलती है, इसकी आधिकारिक स्थिति कैबिनेट बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।
समान नागरिक संहिता यानी UCC से जुड़ी संभावित चर्चा भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे संबंधित मसौदे या प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखे जाने की चर्चा है। संभावित प्रावधानों में विवाह, तलाक, पंजीकरण, पारिवारिक अधिकार और बच्चों के कानूनी दर्जे जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषय संवेदनशील और व्यापक कानूनी प्रभाव वाले हैं, इसलिए यदि सरकार इस दिशा में कोई प्रस्ताव मंजूर करती है तो उसकी वास्तविक रूपरेखा विधेयक और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इधर, विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विपक्षी कांग्रेस भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। इसमें कांग्रेस विधायक मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने वाले मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पार्टी किसानों की समस्याओं, रोजगार, सरकारी भर्ती, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, आदिवासी-दलित अधिकार और कथित भ्रष्टाचार जैसे विषयों को सदन में प्रमुखता से उठा सकती है।
किसानों से जुड़े मुद्दे विपक्ष की रणनीति का बड़ा हिस्सा रह सकते हैं। खाद की उपलब्धता, फसल नुकसान, कृषि लागत, समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कांग्रेस सरकार से सवाल पूछने की तैयारी कर सकती है। इसके साथ ही युवाओं के रोजगार और सरकारी भर्तियों का मुद्दा भी विधानसभा में उठने की संभावना है। कांग्रेस वार्षिक जॉब कैलेंडर, रिक्त सरकारी पदों को भरने, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और चयन के बाद समय पर नियुक्तियां देने जैसे विषयों पर सरकार से जवाब मांग सकती है।
UCC से जुड़ा कोई प्रस्ताव कैबिनेट से आगे बढ़ता है तो यह मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकता है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इसके संभावित सामाजिक और कानूनी प्रभावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में अधिकारों, पेसा कानून, अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मुद्दों और महिला सुरक्षा को लेकर विपक्ष अपनी रणनीति तैयार कर सकता है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन तथा कथित घोटालों से जुड़े मामलों को भी कांग्रेस सदन में उठा सकती है।
20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले रविवार का दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। जगदीशपुर में सरकार अपनी कैबिनेट बैठक के जरिए कई नीतिगत और विधायी प्रस्तावों पर निर्णय की तैयारी में है, जबकि भोपाल में कांग्रेस विधायक दल अपने विधायकों के साथ सदन में उठाए जाने वाले सवालों और मुद्दों की रूपरेखा तय करेगा। कैबिनेट से जिन विधेयकों को मंजूरी मिलेगी, उन्हें मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश करने का रास्ता साफ हो सकता है।
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जगदीशपुर में आज मोहन कैबिनेट, 10.54 लाख किसानों को मिलेंगे ₹1460 करोड़; कांग्रेस भी बनाएगी सत्र की रणनीति
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में रविवार, 19 जुलाई को राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज रहने वाली हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के ऐतिहासिक जगदीशपुर में मंत्रि-परिषद की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस दौरान सरकार कई विधायी और नीतिगत प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रदेश के 10.54 लाख किसानों के खातों में 1460.25 करोड़ रुपए की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। दूसरी ओर, 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें विपक्ष सदन के भीतर सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रविवार का कार्यक्रम सुबह से शुरू होगा। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह करीब 10:30 बजे जगदीशपुर के लिए रवाना होंगे। वहां पहुंचने के बाद वे एक प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन करेंगे। इसके बाद करीब 11:30 बजे उनकी अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक शुरू होगी। बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़े विधायी प्रस्तावों के साथ विभिन्न विभागों के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। कैबिनेट के फैसलों के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 1:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होंगे, जहां बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी सामने आ सकती है।
जगदीशपुर के कार्यक्रम में किसानों के लिए भी बड़ा आयोजन रखा गया है। मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पात्र किसानों के खातों में बीमा दावा राशि भेजेंगे। करीब 10.54 लाख किसानों को कुल 1460.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है। सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक प्रदेश के प्रभावित किसानों को 30 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बीमा दावों का भुगतान किया जा चुका है। खेती को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान के आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए संचालित इस योजना की राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी।
जगदीशपुर से कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:45 बजे झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेंगे। इसके बाद करीब 3:20 बजे उनके भोपाल स्थित निवास पहुंचने का कार्यक्रम है। शाम करीब 5 बजे मुख्यमंत्री एक अन्य बैठक में हिस्सा लेंगे। इस तरह रविवार को मुख्यमंत्री का कार्यक्रम कैबिनेट बैठक, किसान कल्याण, कृषि कार्यक्रम और प्रशासनिक बैठकों के आसपास केंद्रित रहेगा।
जगदीशपुर में होने वाली मंत्रि-परिषद की बैठक को मोहन सरकार की आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बताया जा रहा है। सरकार इससे पहले भी राजधानी के नियमित बैठक स्थल से बाहर प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय महत्व वाले स्थानों पर कैबिनेट बैठकें आयोजित कर चुकी है। इसके पीछे सरकार की कोशिश अलग-अलग क्षेत्रों के ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता देने के साथ स्थानीय विकास से जुड़े विषयों को सामने लाने की रही है। इससे पहले जबलपुर के शक्ति भवन, दमोह जिले के सिंग्रामपुर, महेश्वर, इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, पचमढ़ी, खजुराहो के महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर और बड़वानी जिले के जनजातीय क्षेत्र स्थित नागलवाड़ी जैसे स्थानों पर मंत्रि-परिषद की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
आज की कैबिनेट बैठक पर इसलिए भी खास नजर है क्योंकि इसके अगले ही दिन मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। सरकार कई विधेयकों को सदन में पेश करने से पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रख सकती है। संभावित विधायी एजेंडे में मध्य प्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026, मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026, अग्नि सुरक्षा से संबंधित प्रस्ताव, निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े संशोधन तथा चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विधायी बदलाव शामिल बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों की संरचना से जुड़े बदलावों पर भी कैबिनेट में विचार होने की संभावना है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबंधित संशोधन और प्रस्तावित धनवंतरी स्वास्थ्य विश्वविद्यालय से जुड़े विषय बैठक के एजेंडे में आ सकते हैं। इसके अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नियमों को सरल बनाने और श्रम कानूनों से जुड़े प्रस्तावों पर भी सरकार चर्चा कर सकती है। हालांकि किन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी मिलती है, इसकी आधिकारिक स्थिति कैबिनेट बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।
समान नागरिक संहिता यानी UCC से जुड़ी संभावित चर्चा भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे संबंधित मसौदे या प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने रखे जाने की चर्चा है। संभावित प्रावधानों में विवाह, तलाक, पंजीकरण, पारिवारिक अधिकार और बच्चों के कानूनी दर्जे जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषय संवेदनशील और व्यापक कानूनी प्रभाव वाले हैं, इसलिए यदि सरकार इस दिशा में कोई प्रस्ताव मंजूर करती है तो उसकी वास्तविक रूपरेखा विधेयक और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इधर, विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विपक्षी कांग्रेस भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी है। रविवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। इसमें कांग्रेस विधायक मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने वाले मुद्दों पर चर्चा करेंगे। पार्टी किसानों की समस्याओं, रोजगार, सरकारी भर्ती, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, आदिवासी-दलित अधिकार और कथित भ्रष्टाचार जैसे विषयों को सदन में प्रमुखता से उठा सकती है।
किसानों से जुड़े मुद्दे विपक्ष की रणनीति का बड़ा हिस्सा रह सकते हैं। खाद की उपलब्धता, फसल नुकसान, कृषि लागत, समर्थन मूल्य, सरकारी खरीद और कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कांग्रेस सरकार से सवाल पूछने की तैयारी कर सकती है। इसके साथ ही युवाओं के रोजगार और सरकारी भर्तियों का मुद्दा भी विधानसभा में उठने की संभावना है। कांग्रेस वार्षिक जॉब कैलेंडर, रिक्त सरकारी पदों को भरने, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और चयन के बाद समय पर नियुक्तियां देने जैसे विषयों पर सरकार से जवाब मांग सकती है।
UCC से जुड़ा कोई प्रस्ताव कैबिनेट से आगे बढ़ता है तो यह मानसून सत्र के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो सकता है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इसके संभावित सामाजिक और कानूनी प्रभावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में अधिकारों, पेसा कानून, अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े मुद्दों और महिला सुरक्षा को लेकर विपक्ष अपनी रणनीति तैयार कर सकता है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं, विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन तथा कथित घोटालों से जुड़े मामलों को भी कांग्रेस सदन में उठा सकती है।
20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से पहले रविवार का दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। जगदीशपुर में सरकार अपनी कैबिनेट बैठक के जरिए कई नीतिगत और विधायी प्रस्तावों पर निर्णय की तैयारी में है, जबकि भोपाल में कांग्रेस विधायक दल अपने विधायकों के साथ सदन में उठाए जाने वाले सवालों और मुद्दों की रूपरेखा तय करेगा। कैबिनेट से जिन विधेयकों को मंजूरी मिलेगी, उन्हें मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पेश करने का रास्ता साफ हो सकता है।
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