इंदौर में मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरा, 5,108 नाम हटे

इंदौर (म.प्र.)

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विधानसभा-5, सांवेर और इंदौर-1 में सर्वाधिक विलोपन; जिले में अब 24.19 लाख मतदाता दर्ज

मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद 5,108 नाम अंतिम प्रकाशन से पहले सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है। जिला निर्वाचन कार्यालय की स्क्रूटनी और सुनवाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह कार्रवाई की गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक प्रभाव विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-5, सांवेर और इंदौर-1 में देखने को मिला है।

निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, पुनरीक्षण के दौरान ऐसे मतदाताओं की पहचान की गई जिनके रिकॉर्ड में त्रुटियां थीं, नाम दोहराए गए थे या वे निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतर रहे थे। पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत नोटिस जारी कर सुनवाई के बाद संपन्न की गई।

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर

जारी सूची के अनुसार इंदौर-5 में 979 नाम विलोपित किए गए, सांवेर में 946 और इंदौर-1 में 900 मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके अलावा इंदौर-3 में 630, इंदौर-4 में 580, राऊ में 565 नाम हटे। इंदौर-2 में 192, देपालपुर में 168 और महू में 148 नाम हटाए गए, जो जिले में सबसे कम है।

क्यों और कैसे हुई कार्रवाई

प्रशासन ने बताया कि ‘नो मैपिंग’ और रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियों के आधार पर कुल 6 लाख 78 हजार 748 मतदाताओं को नोटिस भेजे गए थे। इनमें से 6 लाख 73 हजार से अधिक मामलों में जानकारी सही पाई गई और पोर्टल पर अद्यतन कर दी गई। 5,108 लोगों को अपात्र घोषित किया गया, जबकि 551 मतदाता अन्य स्थानों पर स्थानांतरित पाए गए, जिनके नाम संबंधित सूचियों में स्थानांतरित या विलोपित किए गए।

अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। पात्र नागरिक यदि सूची से छूट गए हैं तो वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

जिले में मतदाताओं की नई तस्वीर

सुधार प्रक्रिया के बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 24 लाख 19 हजार 620 दर्ज की गई है। इस दौरान 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले 60 हजार से अधिक नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने 33,701 रिकॉर्ड्स में मौके पर जाकर सुधार किए।

चुनावी तैयारी और पब्लिक इंटरेस्ट

विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। सटीक मतदाता सूची न केवल निष्पक्ष मतदान के लिए जरूरी है, बल्कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ाती है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम प्रकाशन से पहले भी निर्धारित समय सीमा के भीतर दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। 

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