मध्यप्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए प्रदेश के बच्चों का भविष्य सशक्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को राजधानी भोपाल में कहा कि बच्चे किसी भी राज्य की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं और उनके भविष्य को संवारना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ शिक्षा की बुनियादी संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और आधुनिक सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा पद्धति से प्रेरित होकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त “सांदीपनि विद्यालयों” की शुरुआत की गई है। अब तक राज्य में ऐसे 369 नए सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। इन विद्यालयों का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी मजबूत करना है।
डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि स्कूल जाने योग्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और सुलभ शिक्षा पहुंचे। इसके लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अधिनियम के तहत प्रदेश के 8.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी और पुख्ता व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं, ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक या सामाजिक कारणों से बाधित न हो।
उन्होंने बताया कि इन व्यवस्थाओं में स्कूल भवन, शिक्षक पदस्थापन, शिक्षण सामग्री, छात्रवृत्ति, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिले और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि कुशल मानव संसाधन प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए लगातार योजनाएं लागू की जा रही हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिल रहा है।
राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा में निवेश सीधे तौर पर सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। बेहतर शिक्षा से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है, बल्कि इससे प्रदेश को कुशल और जिम्मेदार नागरिक भी मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में और नए प्रयोग किए जाएंगे, ताकि बदलते समय की जरूरतों के अनुसार विद्यार्थियों को तैयार किया जा सके।
सरकार की इस पहल को शिक्षा विशेषज्ञ भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जमीन पर सुनिश्चित किया गया, तो इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निजी संस्थानों के बराबर अवसर मिल सकते हैं।
फिलहाल, प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों और योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि सांदीपनि विद्यालय और अन्य शैक्षणिक सुधार बच्चों के शैक्षणिक परिणाम और सामाजिक विकास में कितना बदलाव ला पाते हैं।
-------